तट की ओर बढ़ता चक्रवात 'फानी'; फोटो: आईस्टॉक 
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क्यों तट से टकराने से पहले ही ‘बरस’ पड़ते हैं चक्रवात? वैज्ञानिकों ने सुलझाई गुत्थी

वैज्ञानिकों के मुताबिक चक्रवातों के तट से टकराने से 60 घंटे पहले ही बारिश 20 फीसदी से अधिक बढ़ जाती है

Lalit Maurya

  • तट से टकराने से पहले ही चक्रवात ‘बरस’ क्यों पड़ते हैं, इस गुत्थी को हांगकांग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने सुलझा दिया है।

  • 40 वर्षों के आंकड़ों और 1,500 चक्रवातों के विश्लेषण पर आधारित अध्ययन बताता है कि तूफान के जमीन पर पहुंचने से करीब 60 घंटे पहले ही बारिश औसतन 20 फीसदी से अधिक बढ़ जाती है।

  •  शोध के मुताबिक इसकी वजह सिर्फ गर्म होते समुद्र नहीं, बल्कि तट के पास जमीन-समुद्र के अंतर से पैदा होने वाली अतिरिक्त नमी, हवा का जमाव और बढ़ती वायुमंडलीय अस्थिरता है, जो तेज मूसलाधार बारिश को जन्म देती है।

  • स्पष्ट संदेश है, चक्रवात की असली तबाही टकराने से पहले शुरू हो जाती है। तटीय इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा पहले ही बढ़ जाता है, इसलिए चेतावनी और तैयारियां भी पहले शुरू करनी होंगी।

चक्रवाती तूफान जब तट की ओर बढ़ता है, तो खतरा सिर्फ उसके टकराने तक सीमित नहीं रहता। असली सवाल यह है कि आखिर चक्रवात के तट से टकराने से पहले ही बारिश अचानक बेकाबू क्यों हो जाती है?

अब वैज्ञानिकों ने इस अनदेखे रहस्य को उजागर किया है और यह खोज तटीय इलाकों के लिए एक गंभीर चेतावनी की तरह है, क्योंकि खतरा तूफान के टकराने से पहले ही दस्तक देने लगता है।

अपने इस अध्ययन में हांगकांग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एचकेयूएसटी) से जुड़े वैज्ञानिकों ने 40 वर्षों के आंकड़ों और करीब 1,500 उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का विश्लेषण किया है। नतीजे दर्शाते हैं कि चक्रवाती तूफान का खतरा महज तट से टकराने तक सीमित नहीं।

इसके जमीन से टकराने से करीब 60 घंटे पहले ही बारिश की औसत दर में 20 फीसदी से अधिक की वृद्धि हो जाती है।

इस अध्ययन के नतीजे अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर कम्युनिकेशन्स में प्रकाशित हुए हैं।

क्यों बढ़ती है बारिश?

अब तक ज्यादातर शोधों में जलवायु परिवर्तन और गर्म होते समुद्र के कारण उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की लंबे समय में बदलती बारिश पर ही ध्यान दिया गया है।

लेकिन तट से टकराने से ठीक पहले के महत्वपूर्ण घंटों में बारिश कैसे तेज या अलग रूप ले लेती है, इस पर बहुत कम अध्ययन हुआ है, जबकि यही समय लोगों को समय पर चेतावनी देने और जान-माल को बचाने के लिए सबसे अहम होता है।

इसी कमी को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने 1980 से 2020 के बीच सैटेलाइट से प्राप्त बारिश के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। उनका उद्देश्य यह समझना था कि जैसे-जैसे तूफान तट के करीब पहुंचता है, बारिश के स्वरूप में कैसे बदलाव आते हैं और इसके पीछे कौन-सी भौतिक प्रक्रियाएं काम करती हैं।

नतीजे दर्शाते हैं कि दुनिया के सभी महासागरीय क्षेत्रों में भले ही चक्रवात की तीव्रता अलग-अलग हो, तूफान के तट से टकराने से पहले बारिश लगातार बढ़ती है।

सबसे अहम बात यह है कि यह बढ़ोतरी सीधे समुद्र की सतह के गर्म होने से नहीं होती। असल में, जैसे-जैसे तूफान तट के करीब आता है, जमीन और समुद्र के बीच का अंतर (लैंड-सी कॉन्ट्रास्ट) इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

तटीय इलाकों में जमीन के ऊपर निचले स्तर पर नमी बढ़ जाती है। साथ ही जमीन पर समुद्र की तुलना में घर्षण अधिक होता है, नतीजन हवा का जमाव (कन्वर्जेंस) बढ़ता है। इसके साथ ही, वातावरण में अस्थिरता बढ़ती है, जिससे बादल और तेजी से बनते हैं। इन सबके कारण संवहन (कन्वेक्शन) मजबूत होता है और बारिश अचानक तेजी से बढ़ जाती है।

तूफान की दस्तक से पहले ही शुरू हो जाती है तबाही

इसका सीधा अर्थ है कि तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा तूफान के जमीन पर पहुंचने से काफी पहले ही बढ़ने लगता है।

यानी असली चुनौती उसके टकराने से पहले शुरू हो जाती है। ऐसे में समय रहते चेतावनी जारी करना और तैयारियां तेज करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो जाता है। यह शोध तटीय राज्यों और मौसम एजेंसियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि अलर्ट सिस्टम को चक्रवात के टकराने से कई घंटे पहले ही सक्रिय कर देना चाहिए, ताकि बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।