रेत खनन का कारोबार; प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक 
खनन

अवैध खनन पर पंजाब सरकार की चुप्पी से एनजीटी नाराज, चार सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

पुल की सुरक्षा और सैकड़ों गांवों की आवाजाही पर संकट के बावजूद पंजाब सरकार की कार्रवाई में देरी पर एनजीटी ने नाराजगी जताई है।

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • पुल की सुरक्षा और 200 गांवों की आवाजाही से जुड़े अवैध खनन के मामले में पंजाब सरकार की सुस्ती पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ी नाराजगी जताई है।

  • रूपनगर जिले में स्वां नदी पर बने अलग्रान पुल को कथित अवैध और बेतरतीब रेत खनन से नुकसान पहुंचने के मामले में राज्य सरकार लंबे समय से जरूरी जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पाई है।

  • 4 अगस्त 2026 को सुनवाई के दौरान पंजाब के मुख्य सचिव की ओर से बताया गया कि पुल के आसपास खनन गतिविधियों से जुड़ी सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण की रिपोर्ट पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से अभी मिलनी बाकी है।

  • एनजीटी ने इस दलील पर असंतोष जताते हुए कहा कि जनवरी 2026 के बाद राज्य की ओर से ऐसा कोई ठोस प्रयास सामने नहीं आया, जिससे लगे कि मामले में गंभीरता से कार्रवाई की जा रही है। अधिकरण ने पंजाब को चार सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

  • यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पुल बंद होने से नंगल और गढ़शंकर के बीच संपर्क प्रभावित हुआ और करीब 200 गांवों के लोगों को 30 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ा। विशेषज्ञों ने अत्यधिक खनन से नदी तल के नीचे जाने और पुल की स्थिरता पर भी गंभीर चिंता जताई है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पंजाब के रूपनगर जिले में कथित अवैध खनन के मामले में राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। अधिकरण ने कहा कि राज्य की ओर से कोई जवाब दाखिल किए हुए काफी समय बीत चुका है, जबकि अवैध खनन से स्वां नदी पर बने पुल को नुकसान पहुंचने का मामला गंभीर है।

4 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई में पंजाब के मुख्य सचिव की ओर से पेश वकील ने बताया कि अलग्रान पुल के आसपास खनन गतिविधियों से जुड़ी सैटेलाइट तस्वीरों की व्याख्या और विश्लेषण संबंधी जानकारी पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से अभी मिलना बाकी है।

एनजीटी ने सरकारी कार्रवाई पर उठाए सवाल

हालांकि, एनजीटी ने सरकार के इस जवाब पर असंतोष जताया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि जनवरी 2026 के बाद राज्य की ओर से ऐसा कोई जवाब या कार्रवाई सामने नहीं आई, जिससे यह पता चले कि जरूरी जानकारी हासिल करने के लिए कोई ठोस प्रयास किए गए हैं।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राज्य और उसके संबंधित अधिकारी इस मामले में कार्रवाई करने और जवाब देने को लेकर गंभीर नजर नहीं आते।

अधिकरण ने पंजाब को आगे की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को होगी।

अवैध खनन से बंद हुआ था पुल

यह मामला एनजीटी ने अप्रैल 2024 में प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के आधार पर स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज किया था। खबर में बताया गया था कि रूपनगर में स्वां नदी पर बना पुल अवैध और बेतरतीब रेत खनन के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था।

इस पुल के बंद होने से नंगल और होशियारपुर के गढ़शंकर के बीच संपर्क प्रभावित हुआ और रूपनगर जिले के कम से कम 200 गांवों के लोगों को करीब 30 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ा।

अप्रैल 2024 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, पुल बंद हुए करीब तीन महीने बीत चुके थे। इसके बाद इन गांवों और नंगल के लोगों के पास हिमाचल प्रदेश के रास्ते जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्हें हिमाचल में प्रवेश शुल्क भी देना पड़ता था और गढ़शंकर पहुंचने के लिए करीब 30 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ता था।

पुल की मजबूती पर भी उठे सवाल

गौरतलब है कि इससे पहले पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के विशेषज्ञों की जांच में बड़े पैमाने पर अवैध खनन के संकेत मिले थे। विशेषज्ञों ने यह भी चिंता जताई थी कि अत्यधिक खनन के कारण नदी की तलहटी का मौजूदा स्तर पुल के मूल डिजाइन में तय स्तर से काफी नीचे पहुंच गया है।

इससे पुल की स्थिरता और मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ऐसे में यह मामला सिर्फ एक पुल के क्षतिग्रस्त होने तक सीमित नहीं है। यह उन सैकड़ों गांवों के लोगों की आवाजाही, उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और पुल की सुरक्षा से भी जुड़ा है। इसके बावजूद राज्य की ओर से लंबे समय तक कोई ठोस जवाब सामने न आने पर एनजीटी की नाराजगी इस मामले की गंभीरता को उजागर करती है।