प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक 
खनन

पंजाब में गाद हटाने के नाम पर रेत खनन का खतरा, एनजीटी ने तय किए नियम

2025 की बाढ़ के बाद पंजाब की नदियों से गाद हटाने के लिए नौ साइट्स पर निजी जमीन मालिकों को खुदाई की अनुमति दी गई थी, लेकिन इस फैसले से अवैध रेत खनन और पर्यावरण को अपूरणीय नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है।

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • पंजाब में 2025 की बाढ़ के बाद नदियों में जमा गाद हटाने की कोशिश अब पर्यावरणीय चिंताओं के घेरे में है।

  • राज्य सरकार ने गाद निकासी के लिए 85 स्थलों की पहचान की थी, जबकि अप्रैल 2026 में नौ संवेदनशील स्थलों पर निजी जमीन मालिकों को अपने खर्च पर खुदाई करने की अनुमति दी गई। इस छूट के तहत निकाली गई सामग्री का इस्तेमाल जमीन मालिक अपनी जरूरत के अनुसार मुफ्त में कर सकते थे।

  • इस फैसले को चुनौती देते हुए आशंका जताई गई कि पर्याप्त निगरानी के अभाव में गाद हटाने की आड़ में अवैध रेत खनन को बढ़ावा मिल सकता है और नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 27 मई, 2026 को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि आगे की कार्रवाई राष्ट्रीय गाद प्रबंधन ढांचे और पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन करते हुए ही की जाए।

  • अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि खुदाई केवल अधिसूचना में दर्ज खसरा नंबरों तक सीमित रहनी चाहिए। पंजाब सरकार ने अपनी कार्रवाई को जनहित में उठाया गया कदम बताया है। हालांकि, बाढ़ का खतरा कम करने के लिए गाद निकालना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि इस प्रक्रिया में नदियों और पर्यावरण की सुरक्षा से समझौता न हो।

पंजाब में 2025 में आई बाढ़ के बाद नदियों में जमा गाद हटाने के लिए सरकार ने कदम उठाए थे, लेकिन निजी जमीन के मालिकों को अपने खर्च पर गाद निकालने की अनुमति देने के फैसले पर पर्यावरणीय नुकसान और अवैध रेत खनन की आशंका जताई गई है।

गौरतलब है कि 2025 में आई बाढ़ ने पंजाब की नदियों में बड़ी मात्रा में गाद जमा कर दी थी। इससे पानी के बहाव में रुकावट आने और भविष्य में दोबारा बाढ़ आने का खतरा बढ़ने की आशंका थी। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने नदियों से गाद हटाने की प्रक्रिया शुरू की। हालांकि, इस प्रक्रिया में पर्यावरण सम्बन्धी नियमों के पालन और निजी जमीन मालिकों को दी गई छूट पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

बाढ़ से बचाव की कवायद, गाद निकासी पर उठे सवाल

जल शक्ति मंत्रालय की ओर से 12 जुलाई, 2023 को जारी राष्ट्रीय गाद प्रबंधन ढांचे के अनुसार, नदियों समेत जल निकायों से समय-समय पर निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करते हुए गाद हटाई जानी चाहिए। पंजाब के जल संसाधन विभाग ने उन स्थानों की पहचान के लिए विस्तृत सर्वेक्षण किया, जहां जमा गाद बाढ़ के पानी के निर्बाध बहाव में बाधा बन रही थी।

इसके बाद 15 अक्टूबर, 2025 को एक अधिसूचना जारी कर राज्य में गाद हटाने के लिए 85 स्थलों की पहचान की गई। यह जानकारी पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में 6 अक्टूबर, 2026 को दाखिल अपने जवाब में दी है।

इसके बाद 16 अक्टूबर, 2025 को पंजाब सरकार ने पंजाब पारदर्शी सार्वजनिक खरीद अधिनियम, 2019 की धारा 63 के तहत एक अधिसूचना जारी की। इसके जरिए जल संसाधन विभाग को इन स्थलों पर गाद हटाने के काम के लिए निविदाएं आमंत्रित करने की निर्धारित समयसीमा 21 दिन से घटाकर 14 दिन करने की छूट दी गई।

85 स्थलों की पहचान, नौ जगहों पर निजी खुदाई की छूट

20 अप्रैल, 2026 को जल संसाधन विभाग ने एक और अधिसूचना जारी की। इसके तहत राज्य के नौ संवेदनशील स्थलों पर जमीन मालिकों को अपने खर्च पर गाद निकालने की अनुमति दी गई। निकाली गई सामग्री का इस्तेमाल संबंधित जमीन मालिक अपनी जरूरत के अनुसार बिना किसी कीमत के कर सकते थे।

हालांकि, अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया था कि गाद हटाने का काम जल संसाधन विभाग की निगरानी और मार्गदर्शन में किया जाएगा। काम केवल उन्हीं स्थानों तक सीमित रहना था, जिन्हें विभाग ने चिह्नित किया था। इसके लिए राज्य की तकनीकी सलाहकार समिति (एसटीएसी) से मंजूर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और उसमें दर्ज खसरा नंबरों का पालन करना अनिवार्य था।

पंजाब सरकार ने इन कदमों को जनहित में उठाया गया फैसला बताते हुए कहा कि इनका उद्देश्य बाढ़ के कारणों को नियंत्रित करना था और इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने जवाब में कहा कि ये फैसले उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, हालांकि वह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर एनजीटी की ओर से दिए जाने वाले किसी भी निर्देश का पालन करेगा।

एनजीटी ने पर्यावरणीय नियमों के पालन पर दिया था जोर

इस मामले में 27 मई, 2026 को एनजीटी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि आगे की कार्रवाई जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय गाद प्रबंधन ढांचे के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करने और सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के बाद ही की जाए। अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया था कि खुदाई केवल उन्हीं जमीन मालिकों को करनी चाहिए, जिनके खसरा नंबर संबंधित अधिसूचना में दर्ज हैं।

आवेदक ने 20 अप्रैल, 2026 की इस अधिसूचना को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि निजी जमीन मालिकों को बिना पर्याप्त नियंत्रण के गाद निकालने की अनुमति देने से अवैध रेत खनन को बढ़ावा मिल सकता है और पर्यावरण को ऐसा नुकसान पहुंच सकता है, जिसकी भरपाई मुश्किल हो।

बाढ़ के बाद नदियों से गाद हटाना भविष्य में जलभराव और बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए जरूरी हो सकता है। लेकिन यह काम किस तरह, किन स्थानों पर और किन शर्तों के तहत किया जाता है, इसका महत्व भी उतना ही है।

यदि निगरानी और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी हुई, तो बाढ़ से हुए नुकसान को कम करने की कोशिश नदियों और उनके आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक नई चुनौती बन सकती है।