साल 2024 में दुनिया भर में लगभग 28.2 करोड़ मलेरिया के मामले सामने आए और करीब 6 लाख 10 हजार लोगों की मौत हुई।  फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स
स्वास्थ्य

सरकार का लक्ष्य: क्या साल 2030 तक मलेरिया मुक्त हो पाएगा भारत?

विश्व मलेरिया दिवस 2026: दुनिया के आंकड़े बताते हैं कि मलेरिया अब भी बड़ी चुनौती, लाखों मामले और हजारों मौतें हर साल, फिर भी रोकथाम और इलाज से संभव है नियंत्रण

Dayanidhi

विश्व स्तर पर मलेरिया के करोड़ों मामले सामने आते हैं, फिर भी रोकथाम, दवाओं और जागरूकता से लगातार सुधार देखा जा रहा है

भारत ने पिछले वर्षों में मलेरिया मामलों और मौतों में बड़ी कमी दर्ज की, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अभी भी खतरा बना हुआ है

मच्छरों के बढ़ते प्रजनन और जलवायु परिवर्तन के कारण नए इलाकों में मलेरिया फैलने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है

समय पर जांच और पूरा इलाज न लेने से दवाओं का असर कम होता है और बीमारी गंभीर रूप ले सकती है

मच्छरदानी का उपयोग, साफ-सफाई और जागरूकता जैसे सरल उपाय मलेरिया से बचाव में सबसे प्रभावी साबित हो रहे हैं

हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मलेरिया आज भी दुनिया के लाखों लोगों के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है। यह बीमारी रोकी और ठीक की जा सकती है, फिर भी जागरूकता की कमी और सही इलाज न मिलने के कारण कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं।

विश्व मलेरिया दिवस 2026, जिसकी थीम है "मलेरिया को खत्म करने का संकल्प: अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा," एक ऐसी पुकार है जो हमें इस पल का लाभ उठाकर अभी लोगों की जान बचाने और मलेरिया-मुक्त भविष्य के लिए आर्थिक सहायता देने के लिए प्रेरित करती है।

मलेरिया क्या है और कैसे फैलता है

मलेरिया एक संक्रामक बीमारी है जो संक्रमित मच्छर के काटने से फैलती है। जब कोई संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो उसके शरीर में परजीवी प्रवेश कर जाते हैं। इसके बाद बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और जानलेवा भी साबित हो सकती है।

वैश्विक स्थिति और चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, साल 2024 में दुनिया भर में लगभग 28.2 करोड़ मलेरिया के मामले सामने आए और करीब 6 लाख 10 हजार लोगों की मौत हुई। यह आंकड़े बताते हैं कि मलेरिया अब भी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में काफी प्रगति भी हुई है। साल 2000 के बाद से अब तक करोड़ों मामलों और लाखों मौतों को रोका गया है। कई देशों ने मलेरिया को पूरी तरह खत्म भी कर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने 47 देशों को मलेरिया-मुक्त घोषित किया है। फिर भी, कुछ क्षेत्रों में यह बीमारी अभी भी तेजी से फैल रही है।

भारत की स्थिति

भारत ने मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में अच्छी प्रगति की है। 2015 से 2023 के बीच मलेरिया के मामलों में 80 प्रतिशत से ज्यादा कमी आई है और मौतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

इसके बावजूद, भारत में अभी भी लाखों मामले सामने आते हैं। खासकर आदिवासी और दूरदराज के इलाकों में यह समस्या ज्यादा है। सरकार ने 2030 तक मलेरिया खत्म करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसके लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं।

बढ़ती चुनौतियां

मलेरिया से लड़ाई में कुछ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। एक बड़ी समस्या दवाओं के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता है। जब लोग दवाइयों का सही तरीके से उपयोग नहीं करते या बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं, तो मलेरिया के परजीवी मजबूत हो जाते हैं और दवाएं असर करना बंद कर देती हैं।

इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन भी एक बड़ी चिंता बन गया है। तापमान बढ़ने और बारिश के पैटर्न में बदलाव के कारण मच्छरों के पनपने के लिए नए इलाके तैयार हो रहे हैं। इससे मलेरिया का खतरा उन क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है, जहां पहले यह बीमारी कम थी।

बचाव ही सबसे बेहतर उपाय

मलेरिया से बचाव करना कठिन नहीं है, बस थोड़ी सावधानी जरूरी है। रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करना बेहद प्रभावी तरीका है। इससे मच्छरों के काटने से बचा जा सकता है।

घर के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी जगह होती है। साफ-सफाई बनाए रखना और नियमित रूप से पानी की टंकियों को ढककर रखना भी जरूरी है। इसके साथ ही, शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना और मच्छर भगाने वाली क्रीम का उपयोग करना भी फायदेमंद होता है।

समय पर इलाज है जरूरी

अगर किसी व्यक्ति को तेज बुखार, ठंड लगना या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और पूरा इलाज लेने से मलेरिया को आसानी से ठीक किया जा सकता है। इलाज को बीच में छोड़ना खतरनाक हो सकता है।

सामूहिक प्रयास से ही जीत संभव

मलेरिया को खत्म करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। जागरूकता फैलाना, सही जानकारी साझा करना और साफ-सफाई बनाए रखना छोटे-छोटे कदम हैं, जो बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

विश्व मलेरिया दिवस 2026 हमें यही संदेश देता है कि अब हमारे पास साधन भी हैं और ज्ञान भी। जरूरत है तो सिर्फ मिलकर प्रयास करने की, ताकि आने वाली पीढ़ियां मलेरिया मुक्त दुनिया में जी सकें।