ब्रिटेन के पॉविस और श्रॉपशायर के दो डेयरी फार्मों में अक्टूबर 2026 में शामोंडा वायरस की पुष्टि हुई।
शामोंडा वायरस मुख्य रूप से क्यूलिकोइडीज नामक छोटे काटने वाले कीड़ों के जरिए पशुओं में फैलता है।
यूरोप के कई देशों के अलावा जर्सी और आयरलैंड में भी मवेशियों में इस वायरस के मामले सामने आए हैं।
फ्रांस में अब तक इंसान के संक्रमण का केवल एक मामला मिला है, आम लोगों के लिए खतरा बेहद कम है।
ब्रिटेन की खाद्य मानक एजेंसी के अनुसार, फिलहाल शामोंडा वायरस से खाद्य सुरक्षा को कोई खतरा होने का प्रमाण नहीं है।
यूरोप में पशुओं के लिए एक नए खतरे के रूप में उभर रहा शामोंडा वायरस (एसएचएवी) अब ब्रिटेन के डेयरी फार्मों तक पहुंच गया है। अक्टूबर 2026 में इंग्लैंड और वेल्स के दो डेयरी फार्मों में मवेशियों के नमूनों की जांच के दौरान इस वायरस की पुष्टि हुई है। वेल्स के पॉविस और इंग्लैंड के श्रॉपशायर में सामने आए इन मामलों ने पशुपालन और पशु स्वास्थ्य से जुड़ी एजेंसियों का ध्यान खींचा है।
ब्रिटेन की पशु एवं वनस्पति स्वास्थ्य एजेंसी (एपीएचए) की वेब्रिज प्रयोगशाला में नमूनों की जांच के बाद संक्रमण की पहचान हुई। अधिकारियों के मुताबिक, यूरोप के दूसरे देशों में पहले से सामने आ रहे मामलों को देखते हुए ब्रिटेन में इसकी मौजूदगी अप्रत्याशित नहीं है। हालांकि, नए वायरस की दस्तक ने पशुओं की निगरानी और समय पर बीमारी की पहचान के महत्व को फिर उजागर कर दिया है।
छोटे कीड़ों के काटने से फैलता है वायरस
शामोंडा वायरस मुख्य रूप से क्यूलिकोइडीज नामक बेहद छोटे काटने वाले कीड़ों के जरिए फैलता है। ये कीड़े आकार में छोटे होते हैं, लेकिन पशुओं में संक्रमण फैलाने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि पशुपालकों के लिए इनकी गतिविधियों और अपने मवेशियों के स्वास्थ्य पर नजर रखना जरूरी है।
हाल के महीनों में यूरोप के कई देशों में इस वायरस की मौजूदगी दर्ज की गई है। जर्सी और आयरलैंड गणराज्य में भी मवेशियों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। अब ब्रिटेन में दो डेयरी फार्मों पर इसके मिलने से साफ है कि वायरस यूरोप में अपना दायरा बढ़ा रहा है।
पशुओं के लक्षणों पर रखें नजर
विशेषज्ञों ने पशुपालकों को सलाह दी है कि वे अपने मवेशियों के व्यवहार और स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करें। गाय, भेड़ और बकरियों में शामोंडा वायरस से जुड़ी बीमारी के लक्षणों की जानकारी पशु चिकित्सकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
पशुओं में कोई असामान्य लक्षण दिखाई देने पर पशुपालकों को तुरंत अपने निजी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बीमारी के लक्षणों के आधार पर जल्द से जल्द इलाज शुरू करना जरूरी है। पशु चिकित्सकों को भी इस वायरस से जुड़े संभावित लक्षणों और जांच की प्रक्रिया से परिचित रहने की सलाह दी गई है।
फिलहाल अतिरिक्त पाबंदियों की जरूरत नहीं
ब्रिटेन के पर्यावरण, खाद्य एवं ग्रामीण मामलों के विभाग (डेफ्रा), वेल्स और स्कॉटलैंड की सरकारों तथा एपीएचए ने स्पष्ट किया है कि शामोंडा वायरस फिलहाल अधिसूचित या रिपोर्ट करने योग्य बीमारी की श्रेणी में नहीं है। मौजूदा जानकारी के आधार पर पशुओं की आवाजाही या पालन-पोषण पर अतिरिक्त नियंत्रण
उपाय लागू करने की जरूरत नहीं बताई गई है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि खतरे को नजरअंदाज किया जा सकता है। संबंधित सरकारी एजेंसियां यूरोप में संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं। नई जानकारी और वैज्ञानिक प्रमाण सामने आने के साथ सरकारी प्रतिक्रिया की समीक्षा भी की जाएगी।
इंसानों के लिए कितना खतरनाक?
पशुओं में संक्रमण की खबरों के बीच इंसानों की सेहत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब तक फ्रांस में शामोंडा वायरस से इंसान के संक्रमित होने का केवल एक मामला सामने आया है। संक्रमित व्यक्ति गंभीर रूप से कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाला था।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इंसानों के बीच बड़े पैमाने पर संक्रमण फैलने का फिलहाल कोई प्रमाण नहीं है। आम लोगों के लिए इसका जोखिम बेहद कम माना जा रहा है। ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी (यूकेएचएसए ) स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
खाने-पीने की चीजों से संक्रमण का खतरा नहीं
इस मामले में राहत की बात यह है कि ब्रिटेन की खाद्य मानक एजेंसी (एफएसए) ने कहा है कि फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे शामोंडा वायरस को खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा माना जाए। यानी मौजूदा वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर दूध और मांस जैसे खाद्य पदार्थों से जुड़े किसी जोखिम की पुष्टि नहीं हुई है।
निगरानी ही सबसे बड़ा बचाव
शामोंडा वायरस की ब्रिटेन में दस्तक ने एक बार फिर साबित किया है कि पशुओं की बीमारियों पर समय रहते नजर रखना कितना जरूरी है। फिलहाल न तो आम लोगों में घबराने की जरूरत है और न ही पशुपालकों के लिए अतिरिक्त सरकारी पाबंदियां घोषित की गई हैं। लेकिन पशुओं में बीमारी के लक्षणों को पहचानना, समय पर जांच कराना और इलाज में देरी न करना बेहद अहम है। आने वाले दिनों में यूरोप में वायरस की गतिविधियां ही तय करेंगी कि यह मामला कितना बड़ा रूप लेता है।