रिपोर्ट के अनुसार, छह राज्यों के 13 हल्दी नमूनों की जांच में पाया गया कि खेती के बजाय प्रसंस्करण और बाजार स्तर पर मिलावट चिंता का कारण है। प्रतीकात्मक छवि, साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

खेतों से नहीं, बाजार तक पहुंचने के दौरान हल्दी में मिल रहा है सीसा: टॉक्सिक्स लिंक रिपोर्ट

खेतों की हल्दी सुरक्षित, बाजार में मिलावट पर सवाल; टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट में छह राज्यों के नमूनों से खुलासा, सप्लाई चेन की जांच की जरूरत

Dayanidhi

  • टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट में खुलासा, खेतों से ली गई कच्ची हल्दी में सीसे की मात्रा बेहद कम और सुरक्षित सीमा के भीतर पाई गई।

  • छह राज्यों के 13 हल्दी नमूनों की जांच में पाया गया कि खेती के बजाय प्रसंस्करण और बाजार स्तर पर मिलावट चिंता का कारण है।

  • हल्दी में सीसा मिलावट से स्वास्थ्य खतरे बढ़ सकते हैं, खासकर बच्चों के दिमागी विकास और सीखने की क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  • रिपोर्ट ने खाद्य सुरक्षा एजेंसियों से बाजार निगरानी बढ़ाने, पैकेजिंग इकाइयों की जांच और मिलावट करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

  • भारत के सबसे बड़े हल्दी उत्पादक देश होने के कारण सुरक्षित सप्लाई चेन बनाना उपभोक्ता विश्वास और वैश्विक बाजार प्रतिष्ठा के लिए जरूरी है।

हल्दी भारतीय रसोई का एक महत्वपूर्ण मसाला है। इसका इस्तेमाल खाने के साथ-साथ पारंपरिक इलाज और धार्मिक कार्यों में भी किया जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में बाजार में मिलने वाली हल्दी में सीसे की मात्रा को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी बीच पर्यावरण संगठन टॉक्सिक्स लिंक की एक नई रिपोर्ट ने बताया है कि खेतों में उगाई जाने वाली कच्ची हल्दी में सीसे की मात्रा बहुत कम होती है और यह तय सीमा के अंदर है।

टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट "लेड इन टर्मरिक" में महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के खेतों से सीधे लिए गए कच्ची हल्दी के 13 नमूनों की जांच की गई। इन सभी नमूनों की जांच एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक से की गई।

जांच में हल्दी के नमूनों में सीसे की मात्रा बहुत कम पाई गई। कुछ नमूनों में सीसा जांच की न्यूनतम सीमा से भी नीचे था, जबकि सबसे अधिक मात्रा 1.87 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम पाई गई। यह मात्रा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा तय 10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम की सीमा से काफी कम है।

खेतों में नहीं, सप्लाई चेन में हो सकती है मिलावट

रिपोर्ट के अनुसार, खेतों में उगने वाली हल्दी में सीसे का स्तर सामान्य रूप से बहुत कम है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में बिकने वाली हल्दी पाउडर में पाए जाने वाले अधिक सीसे का कारण खेती नहीं, बल्कि कटाई के बाद की प्रक्रिया, पैकिंग, रखरखाव या जानबूझकर की जाने वाली मिलावट हो सकती है।

वैज्ञानिक अध्ययनों में पहले भी सामने आया है कि कुछ बाजारों में बिकने वाली हल्दी में सीसे की मात्रा बहुत अधिक पाई गई है। कई मामलों में हल्दी का रंग ज्यादा चमकीला बनाने और उसे बेहतर दिखाने के लिए सीसा क्रोमेट जैसे खतरनाक पदार्थों की मिलावट की आशंका जताई गई है।

टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट बताती है कि हल्दी में सीसा पहुंचने की प्रक्रिया खेत से शुरू नहीं होती, बल्कि सप्लाई चेन के किसी अन्य चरण में हो सकती है। इसलिए अब ध्यान हल्दी की प्रोसेसिंग, भंडारण और पैकेजिंग व्यवस्था की जांच पर देने की जरूरत है।

सीसा स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा

सीसा एक जहरीली धातु है, जिसका शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। बच्चों के लिए सीसे का खतरा सबसे ज्यादा माना जाता है क्योंकि यह उनके दिमागी विकास को प्रभावित कर सकता है। इससे बच्चों में सीखने की क्षमता कम हो सकती है, व्यवहार संबंधी समस्याएं हो सकती हैं और आईक्यू पर भी असर पड़ सकता है।

लंबे समय तक सीसे के संपर्क में रहने से किडनी, हृदय और प्रजनन स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भारत में हल्दी का इस्तेमाल लगभग हर घर में नियमित रूप से होता है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की मिलावट लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चिंता बन सकती है।

निगरानी बढ़ाने की जरूरत

रिपोर्ट में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और राज्य खाद्य सुरक्षा विभागों से हल्दी सहित अन्य मसालों की नियमित जांच बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा बाजारों में बिकने वाले उत्पादों की निगरानी, सप्लाई चेन की पहचान और प्रोसेसिंग व पैकेजिंग इकाइयों की जांच को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है।

टॉक्सिक्स लिंक ने यह भी सुझाव दिया है कि देशभर में बड़े स्तर पर अध्ययन किए जाएं, जिसमें मिट्टी, सिंचाई के पानी, खेती में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और प्रसंस्करण केंद्रों की जांच शामिल हो। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सीसा किस चरण में हल्दी तक पहुंच रहा है।

हल्दी की गुणवत्ता बचाना जरूरी

भारत दुनिया में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक देश है। ऐसे में हल्दी की गुणवत्ता बनाए रखना केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि देश के मसाला उद्योग की प्रतिष्ठा के लिए भी जरूरी है।

टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि किसान स्तर पर उगाई गई हल्दी में सीसे की मात्रा सामान्य है। अब जरूरत है कि बाजार तक पहुंचने वाले रास्ते में होने वाली संभावित मिलावट और लापरवाही को रोका जाए, ताकि देश और दुनिया के उपभोक्ताओं को सुरक्षित हल्दी मिल सके।