करीब 4.80 लाख लोगों पर हुए अध्ययन में खुलासा, शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन दिल को पहुंचा सकती है नुकसान। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

दिल को चुपचाप नुकसान पहुंचा रही है शरीर की सूजन, हार्ट अटैक का खतरा 43% ज्यादा

शरीर में छिपी सूजन से चुपचाप बदल रही दिल की बनावट, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 43 फीसदी तक ज्यादा; लक्षणों से पहले नुकसान के संकेत

Dayanidhi

  • करीब 4.80 लाख लोगों पर हुए अध्ययन में खुलासा, शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन दिल को पहुंचा सकती है नुकसान।

  • सूजन के कारण दिल की दीवारें मोटी, कक्ष छोटे और खून भरने की क्षमता प्रभावित होने का वैज्ञानिकों ने लगाया पता।

  • शरीर में सबसे ज्यादा सूजन वाले लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 43 प्रतिशत अधिक पाया गया।

  • मोटापा, धूम्रपान, मानसिक तनाव, खराब खानपान और आर्थिक परेशानियां शरीर में लंबे समय तक सूजन बढ़ाने से जुड़ी मिलीं।

  • नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान, वजन नियंत्रण और धूम्रपान से दूरी बनाकर दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।

दिल की बीमारी हमेशा अचानक दस्तक नहीं देती। कई बार शरीर के भीतर ऐसी प्रक्रिया वर्षों तक चलती रहती है, जिसका न तो कोई साफ लक्षण दिखाई देता है और न ही व्यक्ति को इसका अहसास होता है। शरीर में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन यानी क्रॉनिक इंफ्लेमेशन भी ऐसी ही एक छिपी हुई समस्या है। एक बड़े वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि लगातार बनी रहने वाली सूजन धीरे-धीरे दिल की बनावट को बदल सकती है। इसका असर इतना गहरा हो सकता है कि व्यक्ति को बीमारी का पता चलने से पहले ही उसका दिल कमजोर होने लगे।

करीब 4.80 लाख लोगों पर हुआ अध्ययन

ब्रिटेन के एमआरसी लेबोरेटरी ऑफ मेडिकल साइंसेज और इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने करीब 4.80 लाख लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें दिल की इमेजिंग, खून की जांच और आनुवंशिक जानकारी को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने शरीर में सूजन के स्तर का पता लगाने के लिए ग्लाइकोप्रोटीन एसिटाइल्स नामक रक्त संकेतक का इस्तेमाल किया।

अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के शरीर में सूजन का स्तर ज्यादा था, उनके दिल की मांसपेशियों की दीवारें अपेक्षाकृत मोटी थीं। उनके दिल के कक्ष छोटे थे और दिल में खून भरने की क्षमता भी प्रभावित दिखाई दी। चिंता की बात यह है कि ऐसे बदलाव लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के होते रह सकते हैं। यह शोध यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।

सूजन ज्यादा तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी ज्यादा

शोध में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। जिन लोगों में सूजन का स्तर सबसे ज्यादा था, उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा सबसे कम सूजन वाले लोगों की तुलना में 43 प्रतिशत अधिक पाया गया।

इसका मतलब यह नहीं है कि सूजन बढ़ने से हर व्यक्ति को हार्ट अटैक आएगा, लेकिन यह जरूर बताता है कि शरीर में लगातार बनी रहने वाली सूजन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह दिल की सेहत के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम संकेत हो सकती है।

आखिर क्यों बढ़ती है शरीर में सूजन?

सूजन शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। जब शरीर में चोट लगती है या संक्रमण होता है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय होकर उससे लड़ती है। सामान्य स्थिति में संक्रमण या चोट ठीक होने के बाद यह प्रक्रिया शांत हो जाती है।

लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब शरीर में सूजन लंबे समय तक बनी रहती है। धूम्रपान, मोटापा, खराब खानपान, मानसिक तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसी स्थितियां इसमें भूमिका निभा सकती हैं।

अध्ययन में आर्थिक परेशानियों, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक परिस्थितियों का भी सूजन के स्तर से संबंध पाया गया। यानी दिल की बीमारी के पीछे केवल खानपान या शारीरिक मेहनत की कमी ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की सामाजिक और मानसिक स्थिति भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

जीन भी तय करते हैं दिल की सेहत

शोधकर्ताओं ने पाया कि आनुवंशिक कारण भी इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ लोगों में शरीर सूजन के नुकसान से बचाव करने में अधिक सक्षम हो सकता है, जबकि कुछ लोगों में इसके प्रति संवेदनशीलता अधिक हो सकती है।

वैज्ञानिकों ने इंटरल्यूकिन-1 और टीएनएफ परिवार के कुछ प्रोटीन की भी पहचान की, जो दिल में होने वाले बदलावों में भूमिका निभा सकते हैं। इन प्रोटीन को निशाना बनाने वाली कुछ दवाओं पर पहले से परीक्षण चल रहे हैं। भविष्य में ऐसी दवाएं दिल को होने वाले नुकसान से बचाने में मददगार साबित हो सकती हैं।

समय रहते सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

शोध के मुताबिक, लाखों लोग शरीर में छिपी सूजन के साथ जी रहे हो सकते हैं, जो धीरे-धीरे उनके दिल को नुकसान पहुंचा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि धूम्रपान छोड़ना, वजन नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम करना, संतुलित भोजन लेना और मानसिक तनाव कम करना दिल की सेहत के लिए जरूरी है। साथ ही ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रण में रखना भी महत्वपूर्ण है।

भविष्य में खून की जांच, आनुवंशिक जोखिम और दिल की इमेजिंग को मिलाकर ऐसे लोगों की पहचान की जा सकती है, जिनके दिल को बीमारी के लक्षण आने से पहले ही नुकसान पहुंचने का खतरा है। हालांकि, इस दिशा में अभी और शोध की जरूरत है। यह अध्ययन सूजन और दिल की बीमारी के बीच संबंध को मजबूत करता है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि सूजन ही हर मामले में बीमारी का सीधा कारण है।

इस शोध का सबसे बड़ा संदेश यही है कि दिल की सेहत का ध्यान केवल तब नहीं रखना चाहिए, जब सीने में दर्द हो या सांस फूलने लगे। कई बार दिल को बचाने की लड़ाई उन दिनों से शुरू करनी पड़ती है, जब शरीर कोई चेतावनी दे ही नहीं रहा होता।