भारत में पांच से 14 साल के बच्चों में मोटापे का दूसरा स्थान, अनुमानित 16 लाख लड़के और 14 लाख लड़कियां अधिक वजन वाली हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

5 से 14 साल के बच्चों में मोटापे को लेकर दूसरे पायदान पर भारत: रिपोर्ट

अध्ययन के अनुसार, 1975 में दुनिया के बच्चों में मोटापे का प्रतिशत केवल चार फीसदी था, जो अब 2022 में लगभग 20 फीसदी यानी पांच गुना तक बढ़ गया है।

Dayanidhi

  • 1975 में विश्व के 4 फीसदी बच्चे मोटापे से ग्रस्त थे, 2022 में बढ़कर लगभग 20 फीसदी हो गए।

  • भारत में 2050 तक लगभग 44.9 करोड़ लोग ज्यादा वजन या मोटापा वाले होंगे, पुरुष 21.8 करोड़ और महिलाएं 23.1 करोड़।

  • भारत में पांच से 14 साल के बच्चों में मोटापे का दूसरा स्थान, अनुमानित 16 लाख लड़के और 14 लाख लड़कियां अधिक वजन वाली हैं।

  • 1975 से 2022 तक बच्चों में मोटापे में पांच गुना वृद्धि, वैश्विक स्वास्थ्य चिंता का मुख्य मुद्दा बन गया।

  • कम और मध्यम आय वाले देशों में बच्चों में मोटापे की वृद्धि सबसे तेज, भारत और बांग्लादेश में चिंता का विषय।

आज के समय में बच्चों में मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। भारत के बच्चों में मोटापा और वजन बढ़ता जा रहा है। कोलकाता के स्कूलों में हाल ही में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, 12 से 16 साल के लगभग हर आठ में से एक बच्चा मोटापे से ग्रस्त है

कल जारी वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस के मुताबिक, अधिक वजन और मोटापे से जूझ रहे बच्चों के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या तेजी से बढ़ रही है और इसके पीछे अस्वस्थ जीवनशैली और गलत खाने की आदतें जिम्मेवार हैं।

बच्चों में मोटापे के कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में मोटापे के कई कारण हैं -

असंतुलित आहार: जंक फूड, मिठाई और कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजें बच्चों में मोटापा बढ़ाती हैं।

शारीरिक गतिविधियों की कमी: बच्चे अब पहले की तरह बाहर खेलना पसंद नहीं करते, जिससे उनका शरीर सक्रिय नहीं रहता

परिवार और सामाजिक आदतें: माता-पिता की आदतें और घरेलू खान-पान भी बच्चों के मोटापे पर असर डालती हैं।

स्वास्थ्य पर असर

बच्चों में मोटापा सिर्फ वजन बढ़ने का कारण नहीं बनता, बल्कि इससे कई गंभीर रोग भी होने लगते हैं। मोटे बच्चों में डायबिटीज, दिल की बीमारियां और कुछ प्रकार के कैंसर होने का खतरा अधिक होता है। आजकल बच्चों में क्रॉनिक रोगों के शुरुआती संकेत भी दिखाई देने लगे हैं। कोलकाता में लगभग 25 फीसदी बच्चों को डायबिटीज या प्री-डायबिटीज है।

भारत और दुनिया में मोटापे की स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन और लांसेट में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, 1975 में दुनिया के बच्चों में मोटापे का प्रतिशत केवल चार फीसदी था, जो अब 2022 में लगभग 20 फीसदी तक बढ़ गया है। सबसे तेजी से यह वृद्धि कम और मध्यम आय वाले देशों, जैसे भारत और बांग्लादेश में हो रही है। अनुमान है कि 2050 तक भारत में लगभग 44.9 करोड़ लोग मोटापे या अधिक वजन के शिकार होंगे, जिसमें 21.8 करोड़ पुरुष और 23.1 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।

भारत में पांच से 14 साल के बच्चों में मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अनुमान है कि लगभग 16 लाख लड़के और 14 लाख लड़कियां अधिक वजन वाली होंगी।

समाधान और सावधानियां

बच्चों में मोटापे को रोकने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं -

  • संतुलित आहार: फलों, सब्जियों और हरी सब्जियों को अपने भोजन में शामिल करें।

  • नियमित व्यायाम: बच्चों को हर दिन कम से कम 1 घंटा खेल या व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित करें।

  • जंक फूड से दूरी: कोल्ड ड्रिंक और तली-भुनी चीजों से बचें।

  • जागरूकता कार्यक्रम: स्कूलों और घरों में मोटापे के बारे में जानकारी फैलाएं।

बच्चों में मोटापा सिर्फ एक शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती है। कोलकाता और भारत के अन्य शहरों में बच्चों में मोटापे की बढ़ती दर को देखकर समय रहते सावधानी और जागरूकता बेहद जरूरी है। माता-पिता, शिक्षक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ मिलकर बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें।