इंग्लैंड के नए अध्ययन में एचपीवी वैक्सीन से युवा महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर से मौतें लगभग समाप्त होने के संकेत मिले।
लैंसेट में प्रकाशित शोध के अनुसार किशोरावस्था में दी गई एचपीवी वैक्सीन ने कैंसर रोकथाम में अत्यंत प्रभावी परिणाम दिखाए।
अध्ययन में पाया गया कि 20-24 वर्ष की वैक्सीन प्राप्त महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर से किसी भी मौत की पुष्टि नहीं हुई।
25-29 आयु वर्ग में भी सर्वाइकल कैंसर से मौतों और मामलों में भारी गिरावट दर्ज, वैक्सीन प्रभाव स्पष्ट दिखा।
भारत में भी सरकार ने फरवरी 2026 से 14 साल की लड़कियों के लिए मुफ्त एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया
एक नई वैज्ञानिक स्टडी में सामने आया है कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से बचाव करने वाली वैक्सीन ने इंग्लैंड में युवा महिलाओं की जान बचाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। यह वायरस सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण माना जाता है, जो महिलाओं में होने वाला एक गंभीर कैंसर है।
यह शोध इंग्लैंड की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों ने किया है और इसे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन के नतीजों को कैंसर रोकथाम के क्षेत्र में अब तक के सबसे मजबूत सबूतों में से एक माना जा रहा है।
20 से 24 साल की उम्र में कोई मौत नहीं दर्ज
अध्ययन में पाया गया कि वर्ष 2020 से 2024 के बीच 20 से 24 साल की उम्र की उन महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर से एक भी मौत नहीं हुई, जिन्हें किशोरावस्था में एचपीवी वैक्सीन लगाई गई थी। यह परिणाम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले रुझानों के आधार पर इस उम्र समूह में लगभग 23 मौतें होने की आशंका जताई गई थी।
इससे यह संकेत मिलता है कि वैक्सीन ने केवल बीमारी को रोका ही नहीं, बल्कि गंभीर स्थिति में पहुंचने से भी बचाया है।
टीकाकरण कार्यक्रम से हजारों लोगों को फायदा
इंग्लैंड में एचपीवी वैक्सीन कार्यक्रम 2008 में शुरू किया गया था। यह 12 से 13 साल की लड़कियों को नियमित रूप से दिया जाने वाला टीका है। बाद में कुछ बड़ी उम्र की किशोरियों के लिए भी “कैच-अप” अभियान चलाया गया, ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षा मिल सके।
शोध के अनुसार, इस कार्यक्रम से 90 प्रतिशत तक टीकाकरण कवरेज हासिल किया गया, जो किसी भी बड़े स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए बहुत ऊंचा माना जाता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अब तक यह योजना लगभग 200 सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों को रोक चुकी है।
25 से 29 साल की उम्र में भी मौतों में बड़ी गिरावट
अध्ययन में यह भी देखा गया कि 25 से 29 साल की महिलाओं में भी सर्वाइकल कैंसर से मौतों की संख्या में काफी कमी आई है। यह संकेत देता है कि जैसे-जैसे वैक्सीन से सुरक्षित पीढ़ी बड़ी हो रही है, वैसे-वैसे बीमारी का असर और कम होता जा रहा है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन लड़कियों को कम उम्र में वैक्सीन दी गई, उन्हें सबसे ज्यादा फायदा हुआ है, क्योंकि उन्हें वायरस के संपर्क में आने से पहले ही सुरक्षा मिल गई थी।
एचपीवी वायरस और इसका खतरा
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) एक बहुत आम वायरस है, जो त्वचा के संपर्क से फैल सकता है। यह संक्रमण ज्यादातर मामलों में बिना लक्षण के होता है, लेकिन कुछ प्रकार के एचपीवी लंबे समय बाद सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकते हैं।
इसी वजह से समय पर टीकाकरण बहुत जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैक्सीन संक्रमण से पहले लगाई जाए तो यह सबसे अधिक सुरक्षा देती है।
डब्ल्यूएचओ के लक्ष्य की ओर एक कदम आगे
यह अध्ययन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की उस योजना को मजबूत करता है, जिसमें सर्वाइकल कैंसर को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर दुनिया के अन्य देश भी इंग्लैंड की तरह उच्च टीकाकरण दर हासिल कर लें, तो इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।
वैक्सीन से जीवन बचाने की मजबूत पुष्टि
यह नया अध्ययन इस बात का मजबूत प्रमाण देता है कि एचपीवी वैक्सीन न केवल सर्वाइकल कैंसर के मामलों को कम करती है, बल्कि इससे होने वाली मौतों को भी लगभग खत्म कर सकती है। इंग्लैंड में मिले नतीजे दिखाते हैं कि अगर टीकाकरण सही समय पर और बड़े स्तर पर किया जाए, तो आने वाले वर्षों में यह बीमारी काफी हद तक समाप्त की जा सकती है।
भारत में 14 साल की लड़कियों के लिए मुफ्त 'एचपीवी टीकाकरण'
भारत में भी सरकार ने फरवरी 2026 से 14 साल की लड़कियों के लिए एक विशेष ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव करना है। सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश के अनुसार एक खुराक (सिंगल डोज) वाली योजना अपनाने का निर्णय लिया है।
हर साल लगभग 1.15 करोड़ लड़कियां 14 वर्ष की उम्र पूरी करती हैं। ये सभी इस टीके के लिए पात्र होंगी। सरकार का मानना है कि 14 साल की उम्र में टीका लगाने से शरीर में सबसे मजबूत और लंबे समय तक सुरक्षा मिलती है।