डब्ल्यूएचओ की नई शेक गाइड में पैकेट खाद्य पदार्थों में नमक की सीमा तय करने और स्पष्ट लेबलिंग पर जोर दिया गया। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

ज्यादा नमक बना दुनिया के लिए बड़ा खतरा, डब्ल्यूएचओ ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

ज्यादा नमक से बढ़ रहा दिल की बीमारियों का खतरा, डब्ल्यूएचओ ने दुनिया के देशों से सख्त कानून बनाकर लोगों का नमक का सेवन कम करने की अपील की

Dayanidhi

  • डब्ल्यूएचओ ने ज्यादा नमक को वैश्विक स्वास्थ्य खतरा बताते हुए देशों से सख्त नीतियां बनाकर सेवन कम करने की अपील की।

  • रिपोर्ट के अनुसार जरूरत से ज्यादा नमक खाने से 2023 में दुनिया भर में लगभग 17 लाख लोगों की मौत हुई।

  • डब्ल्यूएचओ की नई शेक गाइड में पैकेट खाद्य पदार्थों में नमक की सीमा तय करने और स्पष्ट लेबलिंग पर जोर दिया गया।

  • संगठन ने कहा कि केवल जागरूकता नहीं, बल्कि सरकारों द्वारा अनिवार्य नियम लागू करना लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

  • स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक संस्थानों में कम नमक वाला भोजन उपलब्ध कराने के लिए व्यापक अभियान चलाने की सलाह दी गई।

दुनिया भर में लोग जरूरत से ज्यादा नमक खा रहे हैं और इसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है। इसी चिंता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने “शेक द साल्ट हैबिट” या “नमक की आदत छोड़ें” नाम से अपनी नई तकनीकी गाइड जारी की है। इसका उद्देश्य देशों को ऐसी नीतियां बनाने में मदद देना है, जिससे लोगों का नमक सेवन कम हो सके और गंभीर बीमारियों से बचाव हो।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, आज अधिकांश लोग प्रतिदिन तय सीमा से दोगुना नमक खा रहे हैं। संगठन का कहना है कि एक व्यक्ति को दिनभर में लगभग पांच ग्राम नमक यानी एक चम्मच से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए। लेकिन पैकेट वाले खाद्य पदार्थ, फास्ट फूड और बाहर मिलने वाले खाने में नमक की मात्रा काफी अधिक होती है। इसी कारण लोग चाहकर भी अपने नमक सेवन को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पाते।

हर साल लाखों लोगों की मौत

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार ज्यादा नमक खाने की वजह से साल 2023 में लगभग 17 लाख लोगों की मौत हुई। अधिक नमक शरीर में रक्तचाप बढ़ाता है, जिससे दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी की समस्या का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि उच्च रक्तचाप को “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है क्योंकि कई बार इसके लक्षण जल्दी दिखाई नहीं देते। लगातार ज्यादा नमक खाने से शरीर धीरे-धीरे बीमारियों की तरफ बढ़ने लगता है।

डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि अगर दुनिया को साल 2030 तक नमक सेवन में 30 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य हासिल करना है, तो सरकारों को सख्त कदम उठाने होंगे। फिलहाल दुनिया की केवल 28 प्रतिशत आबादी ऐसे देशों में रहती है जहां नमक कम करने के लिए अनिवार्य सरकारी नियम लागू हैं।

क्या है शेक योजना?

डब्ल्यूएचओ की नई गाइड “शेक” पांच मुख्य बातों पर आधारित है। इसमें निगरानी, खाद्य उद्योग के साथ काम, खाने पर सही लेबल, लोगों में जागरूकता और स्वस्थ वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया है।

इस योजना का मकसद सिर्फ लोगों को सलाह देना नहीं है, बल्कि खाने की पूरी व्यवस्था में बदलाव करना है। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि जब तक बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में नमक की मात्रा कम नहीं होगी, तब तक लोग आसानी से स्वस्थ विकल्प नहीं चुन पाएंगे।

खाद्य कंपनियों पर रहेगा फोकस

नई गाइड में सबसे ज्यादा ध्यान खाद्य कंपनियों की जिम्मेदारी पर दिया गया है। डब्ल्यूएचओ ने साफ कहा है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियां तय करने का अधिकार केवल सरकारों के पास होना चाहिए। खाद्य उद्योग को नीति बनाने में सीधा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

गाइड में यह भी बताया गया है कि पैकेट वाले खाद्य पदार्थों में नमक की अधिकतम सीमा तय की जाए। इसके अलावा खाने के पैकेट पर साफ और बड़े अक्षरों में यह जानकारी दी जाए कि उसमें कितना नमक है।

डब्ल्यूएचओ ने बच्चों को जंक फूड के विज्ञापनों से बचाने की भी सलाह दी है। संगठन का कहना है कि कम उम्र से ही बच्चे ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जिससे आगे चलकर स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं

स्कूल और अस्पतालों में भी बदलाव जरूरी

नई नीति में स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी संस्थानों में कम नमक वाला भोजन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि अगर सार्वजनिक जगहों पर स्वस्थ भोजन मिलेगा तो लोगों की आदतों में धीरे-धीरे सुधार आएगा।

इसके साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया के जरिए अभियान चलाने की बात कही गई है। संगठन ने नमक के विकल्प के रूप में कम सोडियम वाले नमक के उपयोग को भी बढ़ावा देने की सलाह दी है।

सरकारों से सख्त कदम उठाने की अपील

डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने कहा है कि नमक की अधिक मात्रा दुनिया में रोकी जा सकने वाली मौतों का बड़ा कारण है। इसलिए सरकारों को केवल सलाह देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मजबूत कानून बनाने चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में दिल की बीमारियों और उच्च रक्तचाप के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों से अपील की है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर नमक कम करने की योजना बनाएं और लोगों के लिए स्वस्थ खाद्य वातावरण तैयार करें।

नई शेक गाइड को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डब्ल्यूएचओ ने उम्मीद जताई है कि अगर देश मिलकर इस योजना को लागू करेंगे तो आने वाले वर्षों में लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।