कांगो से फैला इबोला वायरस पांच देशों तक पहुंचा, अफ्रीका के तीन क्षेत्रों में संक्रमण फैलने से स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ी। फोटो साभार: आईस्टॉक
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कांगो से फैला इबोला का संक्रमण पांच देशों तक पहुंचा; दुनियाभर में बढ़ी चिंता

कांगो से फैला इबोला पांच देशों तक पहुंचा, नाइजीरिया में नया मरीज मिलने से बढ़ी चिंता; केन्या में नौ मामले, डब्ल्यूएचओ ने तेज प्रसार पर जताई गंभीर चिंता

Dayanidhi

  • कांगो से फैला इबोला वायरस पांच देशों तक पहुंचा, अफ्रीका के तीन क्षेत्रों में संक्रमण फैलने से स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ी।

  • नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में महिला संक्रमित मिली, मरीज के संपर्क में आए 44 लोगों की पहचान कर निगरानी शुरू की गई।

  • केन्या में इबोला के नौ मामले सामने आए, 135 संपर्कों की पहचान हुई और 134 लोगों को क्वारंटीन में रखा गया।

  • युगांडा में इबोला का प्रकोप समाप्त घोषित, 20 संक्रमितों में 18 स्वस्थ हुए और दो लोगों की मौत हुई थी।

  • दुर्लभ बुंदिबुग्यो वायरस के खिलाफ स्वीकृत टीका या दवा नहीं, समय पर जांच और संक्रमितों के संपर्कों की निगरानी जरूरी।

अफ्रीका में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। कांगो से शुरू हुई इस बीमारी ने अब चार अन्य देशों तक दस्तक दे दी है। इनमें से दो देशों में संक्रमण के सक्रिय मामले सामने आए हैं। इस बीमारी के फैलाव ने स्वास्थ्य एजेंसियों और सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, यह इबोला का अब तक का सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रकोप बताया जा रहा है। इसकी खास चिंता इसलिए भी है, क्योंकि संक्रमण अफ्रीका के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों तक पहुंच चुका है।

इस प्रकोप की शुरुआत मई के मध्य में कांगो के पूर्वी हिस्से से हुई थी। अब नाइजीरिया में भी संक्रमण का मामला सामने आने के बाद बीमारी को रोकने की चुनौती और बढ़ गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी परेशानी संक्रमित लोगों की समय पर पहचान करना और उनके संपर्क में आए लोगों को निगरानी में रखना है।

दुर्लभ वायरस बना बड़ी चुनौती

इस बार संक्रमण के लिए बुंदिबुग्यो नाम का दुर्लभ इबोला वायरस जिम्मेदार है। इस वायरस के खिलाफ फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता और सहायक उपचार देकर उनकी जान बचाने की कोशिश की जा सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कांगो में करीब 9,500 लोग संक्रमित हुए हैं और कम से कम 4,600 लोगों की मौत हो चुकी है। इतनी बड़ी संख्या में मौतों ने बीमारी की गंभीरता को उजागर कर दिया है। इबोला आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के खून और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। इसलिए मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों और परिवार के सदस्यों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

नाइजीरिया में महिला संक्रमित, 44 लोगों पर नजर

नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में एक महिला में इबोला संक्रमण की पुष्टि हुई है। बताया गया है कि महिला करीब दो सप्ताह पहले युगांडा से नाइजीरिया पहुंची थी। उसे सात अक्टूबर को बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगे और 11 अक्टूबर को अबुजा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में जांच में इबोला की पुष्टि हुई।

हालांकि महिला नाइजीरिया में किस तारीख को पहुंची थी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, मरीज के संपर्क में आए 44 लोगों की पहचान की गई है। इन सभी पर नजर रखी जा रही है, ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

युगांडा में राहत, केन्या में बढ़े मामले

युगांडा में भी कांगो के साथ ही इस बीमारी का प्रकोप सामने आया था। यहां शुरुआती मरीजों में कांगो के वे लोग शामिल थे, जो किसी अज्ञात बीमारी का इलाज कराने के लिए सीमा पार करके आए थे। बाद में उनमें इबोला संक्रमण की पुष्टि हुई।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 27 अगस्त को युगांडा में प्रकोप समाप्त होने की घोषणा की थी। वहां कुल 20 पुष्ट मामले सामने आए, जिनमें 15 मरीज कांगो के थे। इनमें 18 लोग ठीक हो गए, जबकि दो की मौत हुई। अधिकारियों ने 800 से अधिक संपर्कों की पहचान कर उनकी निगरानी की। मंगलवार को युगांडा ने बताया कि वहां कोई नया मामला नहीं है।

दूसरी ओर, केन्या में स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है। देश में पहला मामला छह अक्टूबर को सामने आया था। संक्रमित व्यक्ति कांगो से युगांडा होते हुए तीन अक्टूबर को नैरोबी पहुंचा था। अब केन्या में कुल नौ मामले सामने आ चुके हैं। इनमें पहले मरीज के चार रिश्तेदार और चार स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। अधिकारियों ने 135 संपर्कों की पहचान की है, जिनमें से 134 को क्वारंटीन में रखा गया है। फिलहाल पहले मरीज के ज्ञात संपर्कों से बाहर संक्रमण फैलने का प्रमाण नहीं मिला है।

फ्रांस में भी पहुंचा था संक्रमण

अफ्रीका के बाहर फ्रांस में भी इस प्रकोप का एक मामला सामने आया था। जून में कांगो में मानवीय सहायता अभियान से लौटे एक डॉक्टर में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। डॉक्टर को फ्रांस के विशेष चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मरीज ठीक हो गया और उसे चार जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

समय पर पहचान ही सबसे बड़ा बचाव

इस पूरे प्रकोप में एक बड़ी समस्या मरीजों की पहचान में देरी रही है। कई मामलों में लोगों में लक्षण दिखाई देने के काफी समय बाद संक्रमण की पुष्टि हुई। कुछ संक्रमित लोग यात्रा भी कर चुके थे, जिससे वायरस के दूसरे देशों तक पहुंचने का खतरा बढ़ गया।

ऐसे में संदिग्ध मरीजों की जल्द जांच, संपर्क में आए लोगों की निगरानी, अस्पतालों में संक्रमण से बचाव और देशों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है। इबोला का प्रसार रोकने के लिए केवल इलाज ही नहीं, बल्कि समय पर पहचान और सतर्कता भी अहम भूमिका निभाती है।