केन्या में अब तक कोई इबोला मामला नहीं मिला, 80 हजार यात्रियों की जांच और सभी नमूने निगेटिव। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

कांगो में इबोला के मामले बढ़कर 515 हुए, 91 लोगों के मौत की पुष्टि

कांगो में इबोला के 515 मामले दर्ज, संपर्क खोजने में मुश्किलें बढ़ीं; केन्या सतर्क, 80 हजार से अधिक यात्रियों की जांच।

Dayanidhi

  • कांगो में इबोला के कुल 515 मामले दर्ज हुए, 27 नए संक्रमित मिलने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ी।

  • इलाज केंद्र छोड़कर भागे मरीजों के कारण संपर्क खोजने और संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने में बड़ी कठिनाइयां सामने आईं।

  • पूर्वी डीआरसी में सुरक्षा समस्याएं, सीमित स्वास्थ्य संसाधन और जनसंख्या की आवाजाही नियंत्रण प्रयासों को प्रभावित कर रही।

  • स्वास्थ्य टीमें सक्रिय जांच, नमूना परीक्षण, सामुदायिक जागरूकता और संक्रमण रोकथाम उपायों को तेज करने में जुटी हैं।

  • केन्या में अब तक कोई इबोला मामला नहीं मिला, 80 हजार यात्रियों की जांच और सभी नमूने निगेटिव।

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हाल ही में जांच किए गए 27 नए नमूनों में इबोला संक्रमण की पुष्टि हुई है। छह जून तक कांगो में कुल पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 515 हो गई है, जबकि 91 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और राहत कार्यों में जुटी टीमों की चिंता बढ़ा दी है।

इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल सकती है। बीमारी को नियंत्रित करने के लिए संक्रमित लोगों को अलग रखकर इलाज दिया जाता है, लेकिन कई स्थानों पर यह प्रक्रिया आसान नहीं हो रही है।

संपर्कों की पहचान में आ रही परेशानी

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कई संक्रमित मरीज इलाज पूरा होने से पहले ही स्वास्थ्य केंद्रों से निकल गए। ऐसे मरीजों के समुदाय में घूमने से वायरस के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण उन लोगों की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हो सकते हैं।

इबोला के प्रसार को रोकने के लिए संपर्कों की पहचान और निगरानी सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक माना जाता है। लेकिन जब मरीज अपनी जानकारी छिपाते हैं या इलाज केंद्र छोड़ देते हैं, तब स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बीमारी की श्रृंखला को तोड़ना कठिन हो जाता है।

सुरक्षा और संसाधनों की कमी

पूर्वी डीआरसी के कई प्रभावित इलाकों में सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। कुछ क्षेत्रों में अस्थिर स्थिति और लोगों की लगातार आवाजाही के कारण स्वास्थ्य टीमों को काम करने में कठिनाई हो रही है। इसके अलावा कई स्थानों पर स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं और आवश्यक संसाधनों की भी कमी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नए मामलों का समय पर पता नहीं लगाया गया और सभी संभावित संपर्कों तक नहीं पहुंचा गया, तो संक्रमण और अधिक फैल सकता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है।

जागरूकता और जांच पर जोर

इबोला को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य अधिकारी सक्रिय रूप से नए मामलों की तलाश कर रहे हैं। संदिग्ध मरीजों की जांच की जा रही है और समुदायों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। लोगों को बीमारी के लक्षणों, बचाव के तरीकों और समय पर इलाज की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी जा रही है।

इसके साथ ही अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में संक्रमण रोकथाम के उपायों को मजबूत किया जा रहा है ताकि मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

केन्या ने जनता को किया आश्वस्त

इधर, पड़ोसी देशों में बढ़ते इबोला मामलों के बीच केन्या ने अपने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि देश में अब तक इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि डीआरसी और युगांडा में चल रहे प्रकोप को देखते हुए सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।

देश के हवाई अड्डों, भूमि सीमाओं और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर यात्रियों की जांच लगातार की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, पांच जून तक 80 हजार से अधिक यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

सभी संदिग्ध नमूने निकले निगेटिव

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि डीआरसी और युगांडा से आने वाले यात्रियों से जुड़े 56 संदिग्ध नमूनों की जांच की गई थी। सभी नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

हालांकि केन्या की सरकार अभी भी पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए निगरानी और जांच व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा जाएगा।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि इबोला के प्रकोप को रोकने के लिए तेजी से जांच, प्रभावी संपर्क खोज, लोगों का सहयोग और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद जरूरी है। डीआरसी में बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां मिलकर संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।

आने वाले दिनों में इन प्रयासों की सफलता ही यह तय करेगी कि बीमारी को कितनी जल्दी काबू में लाया जा सकता है।