चिली को डब्ल्यूएचओ की ऐतिहासिक मान्यता मिली, बना दक्षिण अमेरिका का पहला देश, जिसने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज खत्म की।
1972 के बाद चिली में कुत्तों से इंसानों में रेबीज का कोई मामला नहीं आया, लगातार रोकथाम प्रयास सफल रहे।
कुत्तों और बिल्लियों के टीकाकरण, निगरानी, प्रयोगशाला जांच और समय पर इलाज ने रेबीज रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञों ने चिली की रिपोर्ट जांचकर माना कि देश में रेबीज की वापसी रोकने के लिए मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था है।
चिली की सफलता से दुनिया को सीख मिली कि लगातार निवेश, जनभागीदारी और वन हेल्थ दृष्टिकोण से रेबीज खत्म हो सकती है।
दक्षिण अमेरिका के देश चिली ने रेबीज की रोकथाम के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चिली को कुत्तों से फैलने वाली रेबीज को सार्वजनिक स्वास्थ्य की समस्या के रूप में खत्म करने के लिए आधिकारिक मान्यता दी है। इसके साथ ही चिली दक्षिण अमेरिका का पहला देश बन गया है जिसे यह मान्यता मिली है।
प्रेस विज्ञप्ति में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने चिली की सरकार और वहां के लोगों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता कई दशकों तक स्वास्थ्य व्यवस्था में किए गए लगातार निवेश और लोगों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों का परिणाम है।
1972 के बाद नहीं आया कोई मामला
चिली में कुत्तों से इंसानों में फैलने वाली रेबीज का आखिरी मामला वर्ष 1972 में सामने आया था। इसके बाद पांच दशक से अधिक समय बीत चुका है और कुत्तों से इंसानों में रेबीज का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
रेबीज एक वायरल बीमारी है, जो लक्षण दिखाई देने के बाद लगभग हमेशा जानलेवा होती है। यह बीमारी संक्रमित जानवर के काटने, खरोंचने या उसकी लार के संपर्क में आने से फैल सकती है। हालांकि समय पर सही इलाज और बचाव के उपायों से इससे होने वाली मौत को रोका जा सकता है।
टीकाकरण से मिली बड़ी सफलता
चिली ने रेबीज को रोकने के लिए लंबे समय तक कुत्तों और बिल्लियों के टीकाकरण पर जोर दिया। देश में बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाए गए। लोगों को पालतू जानवरों के टीकाकरण और रेबीज से बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई।
सरकार ने कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए भी जरूरी कदम उठाए। इसके साथ ही बीमारी की निगरानी को मजबूत किया गया, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण की पहचान जल्दी हो सके। चिली ने अपनी राष्ट्रीय रेबीज रोकथाम और नियंत्रण योजना को लगातार जारी रखा। इसके तहत जानवरों में वायरस की निगरानी, बीमारी की जांच और प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने जैसे काम किए गए।
संक्रमित व्यक्ति को समय पर इलाज
रेबीज की रोकथाम में समय पर इलाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि किसी व्यक्ति को संदिग्ध या संक्रमित कुत्ता काट ले, तो उसे तुरंत चिकित्सा सहायता और पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस दिया जाना जरूरी है।
चिली में जोखिम वाले लोगों को यह सुविधा समय पर उपलब्ध कराई गई। इससे संक्रमण के बाद बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद मिली। देश ने हाल के वर्षों में उन सीमावर्ती क्षेत्रों में भी विशेष सावधानी बढ़ाई है, जहां रेबीज के दोबारा आने का खतरा अधिक माना जाता है।
जांच के बाद मिली मान्यता
चिली को यह मान्यता केवल लंबे समय तक कोई मामला सामने नहीं आने के कारण नहीं मिली। देश को यह भी साबित करना पड़ा कि उसके पास रेबीज की निगरानी, जांच, टीकाकरण और आपात स्थिति में कार्रवाई करने की मजबूत व्यवस्था है।
चिली ने डब्ल्यूएचओ के सामने एक तकनीकी रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में देश के रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी दी गई। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के एक स्वतंत्र समूह ने रिपोर्ट की समीक्षा की। विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि चिली ने डब्ल्यूएचओ द्वारा तय किए गए सभी जरूरी मानकों को पूरा किया है।
दक्षिण अमेरिका के लिए बड़ी उपलब्धि
चिली की यह सफलता पूरे अमेरिका महाद्वीप के लिए भी महत्वपूर्ण है। वर्ष 1983 के बाद से अमेरिका क्षेत्र में कुत्तों से फैलने वाली रेबीज के मानव मामलों में 98 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। यह उपलब्धि कई देशों द्वारा लंबे समय से किए जा रहे टीकाकरण और निगरानी के प्रयासों का परिणाम है।
हालांकि दुनिया के कई देशों में रेबीज अभी भी गंभीर समस्या बनी हुई है। खासकर एशिया और अफ्रीका में हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत कुत्तों से फैलने वाली रेबीज के कारण होती है।
दुनिया के लिए चिली की सीख
चिली की सफलता बताती है कि रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी को रोका जा सकता है और उसे खत्म करना भी संभव है। इसके लिए केवल सरकार के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पशु चिकित्सा सेवाओं और आम लोगों को मिलकर काम करना जरूरी है।
चिली ने मानव स्वास्थ्य और पशु स्वास्थ्य को एक साथ देखते हुए काम किया। यही ‘वन हेल्थ’ यानी एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण है। देश की उपलब्धि दुनिया के उन देशों के लिए एक उदाहरण है, जो कुत्तों से फैलने वाली रेबीज को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। लगातार टीकाकरण, मजबूत निगरानी और समय पर इलाज के जरिए इस जानलेवा बीमारी से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।