जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में सपने होने चाहिए, उस उम्र में दुनिया भर के करीब 4 करोड़ किशोर तंबाकू और निकोटिन की गिरफ्त में फंस चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि तंबाकू उद्योग अब अगली पीढ़ी को अपना नया बाजार बनाने में जुटा है।
फ्लेवर युक्त ई-सिगरेट, निकोटिन पाउच, आकर्षक पैकेजिंग और सोशल मीडिया प्रचार के जरिए युवाओं को लत के जाल में फंसाया जा रहा है।
चिंता की बात यह है कि दुनिया के 160 देशों में निकोटिन पाउच को नियंत्रित करने के लिए कोई स्पष्ट कानून नहीं है।
तंबाकू पहले से ही दुनिया में हर साल 87 लाख मौतों का कारण बन रहा है, जबकि भारत में करीब 26.7 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में इसका सेवन करते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक निकोटिन बच्चों और किशोरों के विकसित हो रहे मस्तिष्क पर गंभीर असर डाल सकता है तथा उनकी याददाश्त, सीखने और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर सकता है।
ऐसे में डब्ल्यूएचओ ने सरकारों से फ्लेवर्ड उत्पादों पर प्रतिबंध, विज्ञापनों पर रोक और तंबाकू विरोधी कानूनों के सख्त पालन की मांग की है। संदेश साफ है—यह लड़ाई सिर्फ स्वास्थ्य बचाने की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करने की है।
जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में सुनहरे सपने होने चाहिए, उस उम्र में दुनिया के 4 करोड़ मासूम तंबाकू के धीमे जहर की गिरफ्त में फंस चुके हैं।
सच कहें तो मुनाफा कमाने की अंधी दौड़ में डूबी तंबाकू कंपनियों ने बच्चों के भविष्य को अपना नया बाजार बना लिया है। ये तंबाकू कंपनियां रंग-बिरंगी पैकेजिंग, मीठे स्वाद, नए उत्पादों और आकर्षक प्रचार के जरिए युवाओं को लुभा रही हैं। नतीजन ई-सिगरेट और निकोटिन पाउच जैसे नए उत्पादों का चलन युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है।
ऐसे में विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) से ठीक पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया भर की सरकारों से नई पीढ़ी को तंबाकू और निकोटिन की लत से बचाने के लिए सख्त कदम उठाने की अपील की है।
अगली पीढ़ी को लत का ग्राहक बनाने की तैयारी
स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया कि तंबाकू और निकोटीन उत्पाद बनाने वाली कंपनियां जानबूझकर अपने उत्पादों को इस तरह डिजाइन कर रही हैं ताकि वे युवाओं और किशोरों को आकर्षक लगें, उनका इस्तेमाल आसान हो और एक बार आदत लगने के बाद उन्हें छोड़ना नामुमकिन हो जाए।
यह उत्पाद कितने खतरनाक है इसका अंदाजा यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से जुड़े वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक स्टडी के निष्कर्षों से लगाया जा सकता है, जिसके मुताबिक एक सिगरेट धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की जिंदगी के करीब 20 मिनट छीन लेती है।
वैश्विक स्तर पर देखें तो तम्बाकू हर चार सेकंड में एक जिंदगी को लील रही है। इसका मतलब की हर साल 87 लाख मौतों के लिए कहीं न कहीं तम्बाकू जिम्मेवार है। विडंबना देखिए कि इनमें से 13 लाख लोग वो है जो न चाहते हुए भी दूसरों द्वारा किए धूम्रपान के कारण पैदा हुए धुंए का शिकार बन जाते हैं।
कैसे युवाओं को लुभा रहे ई-सिगरेट और निकोटिन पाउच
डब्ल्यूएचओ में निदेशक डॉक्टर एटियेन क्रुग का इस बारे में प्रेस विज्ञप्ति में कहना है, "तंबाकू हर साल लाखों लोगों की जान ले रहा है, लेकिन इस खेल की बड़ी कंपनियां अब अपने कारोबार का नया मॉडल तैयार कर रही हैं। एक ओर वे घातक सिगरेट बेचकर मुनाफा कमा रही हैं, वहीं दूसरी ओर फ्लेवर वाले ई-सिगरेट, निकोटिन पाउच और अन्य उत्पादों को आक्रामक तरीके से बाजार में उतारकर अगली पीढ़ी को अपनी गिरफ्त में लेने की कोशिश कर रही हैं।“
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, निकोटिन पाउच बाजार में सबसे तेजी से फैलने वाले निकोटिन उत्पादों में शामिल हैं। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, आकर्षक फ्लेवर और ग्लैमरस जीवनशैली की छवि के जरिए इनका प्रचार किया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में युवा इनके प्रति आकर्षित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक निकोटिन अत्यधिक नशीला पदार्थ है। यह बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए विशेष रूप से खतरनाक है क्योंकि इस उम्र में उनका मस्तिष्क अभी विकसित हो रहा होता है।
160 देशों में कोई कानून नहीं: 'निकोटीन पाउच' का बेलगाम काला कारोबार
संगठन ने अपनी द निकोटिन पाउच रिपोर्ट में आगाह किया है कि दुनिया के करीब 160 देशों में निकोटिन पाउच को लेकर कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं, जबकि इनकी बिक्री लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चमकीली पैकिंग, मीठे स्वाद और सोशल मीडिया प्रचार वही रणनीतियां हैं जिनका इस्तेमाल पहले अन्य निकोटिन उत्पादों के लिए किया गया था। इनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को निकोटिन की लत लगाना है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक दुनिया भर में 130 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तम्बाकू का सेवन कर रहे हैं। इनमें से 80 फीसदी निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रह रहे हैं।
तम्बाकू के मायाजाल में फंसे 26.7 करोड़ भारतीय
भारत की बात करें तो अपना देश दुनिया में तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे इंडिया, 2016-17 के मुताबिक देश में 29 फीसदी वयस्क (करीब 26.7 करोड़ लोग) तंबाकू का सेवन करते हैं। इसमें खैनी, गुटखा, सुपारी, जर्दा, बीड़ी, सिगरेट और हुक्का जैसे उत्पाद शामिल हैं।
वहीं इससे होने वाले नुकसान को देखें तो लैंसेट में छपे एक अध्ययन से पता चला है कि भारत में धूम्रपान के कारण हर साल 10 लाख लोगों की मौत हो रही है। इतना ही नहीं इस आंकड़े में पिछले तीन दशकों में 58.9 फीसदी का इजाफा हुआ है।
वहीं यदि सभी रूपों में तम्बाकू के सेवन की बात करें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल होने वाली साढ़े तरह लाख मौतों के लिए तम्बाकू जिम्मेवार है।
सवाल सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, भविष्य का है
इस संकट से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सरकारों से तत्काल कदम उठाने की अपील की है। इसके तहत फ्लेवर्ड तंबाकू उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने, इनके विज्ञापनों और स्पॉन्सरशिप को रोकने, तथा सभी सार्वजनिक एवं इनडोर जगहों को पूरी तरह 'स्मोक-फ्री' और 'वेप-फ्री' बनाने की मांग की गई है। तंबाकू विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करना ही अब एकमात्र रास्ता बचा है।
इस जंग में ब्राजील का रियो डी जेनेरियो शहर पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी मिसाल बनकर उभरा है। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए इस शहर ने ई-सिगरेट की बिक्री और विज्ञापनों पर न सिर्फ रोक लगाई, बल्कि सैकड़ों छापेमारी करके इसे सख्ती से लागू भी किया। धूम्रपान-मुक्त कानूनों का दायरा बढ़ाकर सभी तंबाकू एवं निकोटिन उत्पादों को शामिल किया गया।
साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाए गए।
अब कार्रवाई का समय: डब्ल्यूएचओ की सरकारों से अपील
चिंता की बात यह है कि तंबाकू हर साल 70 लाख से अधिक जिंदगियां निगल रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह दुनिया में रोकी जा सकने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है। बता दें कि तंबाकू का संबंध न केवल हृदय और सांस सम्बन्धी रोगों से है बल्कि यह 20 से अधिक तरह के कैंसर से भी जुड़ा है।
एक अध्ययन से पता चला है कि धूम्रपान करने से मस्तिष्क सिकुड़ सकता है। रिसर्च के मुताबिक धूम्रपान की लत दिमाग को समय से पहले बूढ़ा बना सकती है। इसी तरह एक अन्य रिसर्च से पता चला है कि धूम्रपान न करने वालों की तुलना में इसकी लत का शिकार लोगों को अपनी याददाश्त, सोचने-समझने, बोलने, सीखने और निर्णय लेने जैसे दिमागी कौशल में 85 फीसदी से अधिक की गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर डब्ल्यूएचओ ने दुनिया भर के 100 करोड़ से अधिक तंबाकू, ई-सिगरेट और निकोटिन पाउच उपयोग करने वालों से अपील की है कि वे नशे की इस गिरफ्त से बाहर निकलने की दिशा में पहला कदम उठाएं और खुद को एक नया, स्वस्थ जीवन उपहार में दें।