डब्ल्यूएचओ ने 2030 तक हर देश में उभरते स्वास्थ्य खतरों की पहचान 24 घंटे के भीतर करने का लक्ष्य रखा है।
कोरोना महामारी से मिले सबक के बाद डब्ल्यूएचओ ने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत करने के लिए पांच वर्षीय नई रणनीति शुरू की है।
डब्ल्यूएचओ का हब 160 सदस्य देशों और 190 साझेदार संगठनों के साथ मिलकर महामारी के खतरों की निगरानी कर रहा है।
नई रणनीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोगाणुओं की पहचान, आंकड़ों का विश्लेषण और सुरक्षित डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों पर विशेष जोर दिया गया है।
डब्ल्यूएचओ ने महामारी रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, लगातार निवेश और वैज्ञानिक विशेषज्ञता को जरूरी बताते हुए सभी देशों से मिलकर काम करने की अपील की है।
कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को यह सिखाया कि किसी बीमारी का खतरा समय रहते पहचानना कितना जरूरी है। अगर किसी नए संक्रमण का पता देर से चलता है, तो वह देखते ही देखते कई देशों तक फैल सकता है और लाखों लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल सकता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक नई पांच वर्षीय रणनीति शुरू की है। इसका लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक दुनिया का हर देश किसी भी उभरते स्वास्थ्य खतरे का पता उसके सामने आने के 24 घंटे के भीतर लगा सके और उसे समझने की क्षमता विकसित कर सके।
डब्ल्यूएचओ की यह पहल वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इसका मकसद केवल बीमारियों की पहचान करना नहीं, बल्कि उनके फैलने से पहले जरूरी कदम उठाने की तैयारी करना भी है।
कोरोना के अनुभव से मिली नई दिशा
डब्ल्यूएचओ ने साल 2021 में जर्मनी सरकार के सहयोग से महामारी और संक्रामक रोगों की जानकारी जुटाने के लिए अपना हब स्थापित किया था। कोरोना महामारी के दौरान दुनिया ने महसूस किया कि समय पर जानकारी, वैज्ञानिक सहयोग और मजबूत निगरानी व्यवस्था के बिना किसी बड़े स्वास्थ्य संकट को रोकना बेहद मुश्किल है।
इसी कमी को दूर करने के लिए बनाए गए इस हब ने पिछले पांच वर्षों में उल्लेखनीय काम किया है। डब्ल्यू के अनुसार, इसने 160 सदस्य देशों, 190 साझेदार संगठनों और हजारों वैज्ञानिकों तथा नीति-निर्माताओं के साथ मिलकर काम किया है। इसका उद्देश्य नए संक्रमणों की पहचान करना, रोगाणुओं का अध्ययन करना और स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में समय रहते चेतावनी देना है।
बर्लिन में विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि पांच वर्षों में यह हब वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई रणनीति सरकारों और साझेदारों को एक साझा लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाएगी, ताकि किसी स्वास्थ्य खतरे को बड़े संकट में बदलने से पहले रोका जा सके।
पांच पहल से मजबूत होगी निगरानी
नई रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए डब्ल्यूएचओ ने पांच प्रमुख पहलों पर जोर दिया है। इनमें आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), वैज्ञानिक शोध और देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की अहम भूमिका होगी।
पहली पहल है ‘एपिडेमिक इंटेलिजेंस फ्रॉम ओपन सोर्सेज’ (ईआईओएस)। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से रोजाना हजारों सार्वजनिक स्रोतों से जानकारी जुटाती है और संभावित स्वास्थ्य खतरों के संकेत पहचानने में मदद करती है। इस व्यवस्था से 125 से अधिक सदस्य देश और 30 क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय संगठन जुड़े हैं। इसके वैश्विक नेटवर्क में 4,000 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हैं।
दूसरी पहल ‘इंटरनेशनल पैथोजन सर्विलांस नेटवर्क’ (आईपीएसएन) है। इसका उद्देश्य रोगाणुओं की आनुवंशिक जानकारी का अध्ययन करने और उनकी पहचान करने की क्षमता बढ़ाना है। इससे नए वायरस और दूसरे रोगाणुओं को समझने के साथ जांच, दवाओं और टीकों के विकास में भी मदद मिल सकती है।
तीसरी पहल ‘द कोलैबोरेटरी’ है, जो आंकड़ों के विश्लेषण और गणितीय मॉडल तैयार करने वाले 2,000 से अधिक विशेषज्ञों को जोड़ती है। किसी नए संक्रमण के सामने आने पर ये विशेषज्ञ उसके संभावित प्रसार और प्रभाव को समझने में सहयोग कर सकते हैं।
इंसान, जानवर और पर्यावरण पर एक साथ नजर
चौथी पहल ‘कोलैबोरेटिव सर्विलांस इनिशिएटिव’ है। यह 83 से अधिक देशों में लागू की जा रही है। इसका आधार ‘वन हेल्थ’ यानी एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण है। इसके तहत इंसानों, जानवरों और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसका कारण यह है कि कई संक्रामक बीमारियां जानवरों से इंसानों तक पहुंच सकती हैं। इसलिए बीमारी के खतरे को समझने के लिए इन तीनों क्षेत्रों पर एक साथ नजर रखना जरूरी है।
पांचवीं पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करेगी। इसके तहत ऐसे सुरक्षित डिजिटल सिस्टम विकसित किए जाएंगे, जिनसे देश और साझेदार स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को साझा कर सकें, उनका विश्लेषण कर सकें और उनका बेहतर इस्तेमाल कर सकें। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग पर भी ध्यान दिया जाएगा।
लक्ष्य बड़ा, सहयोग की जरूरत
डब्ल्यूएचओ का यह हब केवल जानकारी जुटाने वाली संस्था नहीं है। यह सरकारों, वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को एक मंच पर लाने के साथ नई तकनीकों और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने का काम भी करता है।
हालांकि 2030 तक हर देश को 24 घंटे में स्वास्थ्य खतरे पहचानने में सक्षम बनाना आसान नहीं होगा। इसके लिए लगातार निवेश, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, भरोसेमंद आंकड़ों और देशों के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत पड़ेगी।
आज जब दुनिया एक-दूसरे से तेजी से जुड़ी हुई है, तब किसी एक देश में उभरा संक्रमण भी पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकता है। ऐसे में डब्ल्यूएचओ की नई रणनीति का संदेश साफ है - महामारी से लड़ने का सबसे कारगर तरीका केवल बीमारी फैलने के बाद इलाज करना नहीं, बल्कि खतरे को समय रहते पहचानकर उसके प्रसार को रोकना है।