बच्चों के चमकीले कपड़ों में पाया गया उच्च स्तर का सीसा, जो सुरक्षा मानक 100 पार्ट्स पर मिलियन (पीपीएम) से अधिक था। प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

चिंताजनक खुलासा: आपके बच्चे के कपड़ों में हो सकता है जहरीला सीसा

बच्चों के चमकीले कपड़ों में छिपा सीसा: फास्ट फैशन के कारण स्वास्थ्य को खतरे, रंगों में भारी धातु और बच्चों को होने वाले खतरों की जांच

Dayanidhi

  • बच्चों के चमकीले कपड़ों में पाया गया उच्च स्तर का सीसा, जो अमेरिकी सुरक्षा मानक 100 पार्ट्स पर मिलियन (पीपीएम) से अधिक था।

  • लाल और पीले रंग वाले कपड़े सबसे अधिक सीसा रखते हैं, जिससे छोटे बच्चों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरे हो सकते हैं।

  • बच्चे अक्सर कपड़े मुंह में डालते हैं, जिससे शरीर में सीसा आसानी से प्रवेश कर सकता है और नुकसान पहुंचा सकता है।

  • अध्ययन में यह देखा गया कि कपड़े धोने से भी सीसा अन्य कपड़ों या पानी में फैल सकता है।

  • सुरक्षित विकल्प हैं जैसे प्राकृतिक रंग और एलम, लेकिन उद्योग को बदलाव के लिए उपभोक्ता और नीति दबाव की जरूरत है।

आजकल बच्चों के लिए चमकीले और रंग-बिरंगे कपड़े बहुत लोकप्रिय हैं। फैशन की दुनिया इतनी तेज हो गई है कि बच्चे जल्दी बड़े हो जाते हैं और नए कपड़े चाहिए होते हैं। लेकिन हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि ये चमकीले कपड़े बच्चों के लिए खतरा भी बन सकते हैं। मरीअन यूनिवर्सिटी की केमिस्ट्री लैब में हुई जांच में यह पाया गया कि बाजार में बिक रहे बच्चों के कई कपड़े सीसे (लेड) से अधिक मात्रा में प्रभावित हैं।

जांच की शुरुआत

इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाली शोधकर्ता के द्वारा अपनी बेटी में उच्च स्तर का सीसा पाया गया था, जो खिलौनों की सतह से आया था। उस समय अमेरिका में सीसे की कड़ी सीमाएं नहीं थीं। आज, यूएस कंज़्यूमर प्रोडक्ट सेफ्टी कमिशन बच्चों के उत्पादों जैसे कपड़ों और खिलौनों में सीसा की अधिकतम सीमा 100 पार्ट्स पर मिलियन (पीपीएम) निर्धारित करता है।

शोधकर्ता ने देखा कि बहुत से माता-पिता इस समस्या से अनजान हैं। इसीलिए उन्होंने अपने अंडरग्रेजुएट छात्रों के साथ मिलकर बच्चों के रोजमर्रा के सामान में भारी धातु के खतरों का अध्ययन करना शुरू किया।

कपड़ों में सीसा कैसे आता है

अध्ययन से पता चला है कि बच्चों के कपड़ों में सीसा केवल जिपर, बटन या स्नैप्स में ही नहीं होता, बल्कि सीधे कपड़े की फैब्रिक में भी पाया जा सकता है। कुछ निर्माता लीड (द्वितीय) एसीटेट का इस्तेमाल करते हैं ताकि कपड़े में रंग लंबे समय तक चमकदार और टिकाऊ बने रहें। यह तरीका सस्ता होता है और चमकीले रंग बनाने में मदद करता है।

बच्चों के लिए खतरे

सीसा किसी भी उम्र के लिए हानिकारक है, लेकिन छोटे बच्चे सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। यह उनके मस्तिष्क, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और व्यवहार पर गंभीर असर डाल सकता है। बच्चे अक्सर अपने कपड़े मुंह में डालते या चबाते हैं, जिससे शरीर में सीसा आसानी से प्रवेश कर सकता है। अध्ययन में पाया गया कि अगर बच्चे कपड़े चबाएं, तो उनका शरीर सुरक्षित सीमा से अधिक सीसा ग्रहण कर सकता है।

जांच के परिणाम

शोधकर्ताओं ने 11 रंगीन शर्टों का अध्ययन किया। ये शर्ट चार अलग-अलग रिटेलर्स से खरीदी गई थीं, जिनमें फास्ट फैशन और डिस्काउंट ब्रांड शामिल थे। उन्होंने पाया कि सभी कपड़े 100 पीपीएम के सरकारी सुरक्षा मानक से अधिक थे। सबसे अधिक सीसा लाल और पीले रंग की शर्टों में पाया गया। यह संकेत देता है कि चमकीले रंग वाले कपड़े बच्चों के लिए ज्यादा जोखिमपूर्ण हो सकते हैं।

मुंह में डालने से सीसा का असर

दूसरे चरण में शोधकर्ताओं ने यह देखा कि अगर बच्चे कपड़े मुंह में डालते या चबाते हैं तो कितना सीसा शरीर में प्रवेश कर सकता है। उन्होंने पेट की स्थितियों को नकली तौर पर बनाया और गणना की। उनके निष्कर्ष से पता चला कि यह व्यवहार एफडीए की रोजमर्रा की सुरक्षित सीमा से अधिक सीसा ग्रहण करवा सकता है।

कपड़े धोने का प्रभाव

शोधकर्ताओं का अगला कदम यह जांचना है कि कपड़े धोने से क्या होता है। क्या सीसा दूसरे कपड़ों में चला जाता है, या वॉशिंग मशीन में जमा होकर पानी में चला जाता है। यह अध्ययन अभी जारी है, लेकिन अगर धोने से भी सीसा फैलता है, तो यह बच्चों के लिए और अधिक खतरा पैदा कर सकता है।

सुरक्षित विकल्प और भविष्य

शोध में कहा गया है कि शोधकर्ता चाहते हैं कि कपड़े बनाने वाली कंपनियां सुरक्षित रंग बनाने के विकल्प अपनाएं। प्राकृतिक पदार्थ जैसे ओक की छाल, अनार के छिलके, रोजमेरी और एलम का इस्तेमाल रंग टिकाऊ बनाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि इसे अपनाने में खर्चा आएगा, इसलिए कंपनियों को बदलाव के लिए उपभोक्ताओं या नीति निर्माताओं का दबाव चाहिए।

जागरूकता बढ़ाना

इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य माता-पिता और परिवारों को जागरूक करना है। बच्चे जो कपड़े पहनते हैं, उनमें सीसा हो सकता है और यह एक छिपा हुआ खतरा है। शोधकर्ताओं का मानना है कि जैसे ही अधिक लोग इसके बारे में जानेंगे, वे बच्चों के लिए सुरक्षित विकल्प चुन सकते हैं और कंपनियों पर दबाव डाल सकते हैं कि वे सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल रंगों का उपयोग करें।

चमकीले, रंग-बिरंगे बच्चों के कपड़े सुंदर लगते हैं, लेकिन उनमें सीसा का खतरा हो सकता है। माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के लिए कपड़े चुनते समय सुरक्षित विकल्पों का चयन करें और अधिक जानकारी के लिए जागरूक रहें। साथ ही, टेक्सटाइल उद्योग को सुरक्षित रंगों और तकनीकों की ओर बढ़ने की जरूरत है।