रक्सोलिटिनिब दवा मलेरिया इलाज में सूजन कम कर शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया संतुलित करने में सहायक पाई गई। 
स्वास्थ्य

खून की बीमारियों के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा से बेहतर हो सकता है मलेरिया का उपचार

मलेरिया के इलाज में नई दवा रक्सोलिटिनिब सूजन कम कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और मरीजों की जान बचाने की उम्मीद दिखाती है

Dayanidhi

  • रक्सोलिटिनिब दवा मलेरिया इलाज में सूजन कम कर शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया संतुलित करने में सहायक पाई गई।

  • अध्ययन में स्वस्थ वयस्कों पर रक्सोलिटिनिब सुरक्षित और अच्छी तरह सहन की जाने वाली दवा साबित हुई।

  • यह दवा परजीवी को मारने वाली मलेरिया दवाओं के साथ मिलकर बेहतर इलाज का रास्ता खोलती है।

  • शोध में रक्सोलिटिनिब से दोबारा संक्रमण पर मजबूत और नियंत्रित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया देखी गई।

  • आगे मलेरिया प्रभावित देशों में बच्चों और गंभीर मरीजों पर बड़े परीक्षणों की आवश्यकता बताई गई।

मलेरिया दुनिया की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। हर साल मलेरिया से छह लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। इनमें से लगभग 75 प्रतिशत मौतें पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होती हैं। मलेरिया खासतौर पर अफ्रीका और एशिया के कई गरीब देशों में बड़ी समस्या बना हुआ है।

मलेरिया एक परजीवी (पैरासाइट) के कारण होता है, जिसे प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम कहा जाता है। यह परजीवी मच्छरों के काटने से इंसान के शरीर में प्रवेश करता है। आज मौजूद मलेरिया की दवाएं इस परजीवी को मारने में मदद करती हैं, लेकिन इसके बावजूद गंभीर मलेरिया में मौत का खतरा बना रहता है।

अब ऑस्ट्रेलिया के कीमर बर्गहोफर मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी ऑफ सनशाइन कोस्ट क्लिनिकल ट्रायल्स नेटवर्क के वैज्ञानिकों ने एक नई उम्मीद दिखाई है। उन्होंने पाया है कि एक दवा, रक्सोलिटिनिब, मलेरिया के इलाज को और प्रभावी बना सकती है।

रक्सोलिटिनिब क्या है?

रक्सोलिटिनिब एक दवा है, जिसका उपयोग पहले से ही कुछ खून से जुड़ी बीमारियों के इलाज में किया जाता है। यह दवा शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली (इम्यून सिस्टम) पर काम करती है और ज्यादा सूजन को कम करती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि मलेरिया में सिर्फ परजीवी ही नुकसान नहीं करता, बल्कि शरीर की अत्यधिक सूजन प्रतिक्रिया भी मरीज की हालत को गंभीर बना देती है। यही सूजन कई बार मौत का कारण बनती है।

इस नए शोध में क्या किया गया?

साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन नामक पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में 20 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्हें पहले कभी मलेरिया नहीं हुआ था। सभी प्रतिभागियों को बहुत सावधानी और डॉक्टरों की निगरानी में मलेरिया से संक्रमित किया गया।

आठ दिनों के बाद सभी प्रतिभागियों को मलेरिया की सामान्य दवा आर्टेमेथर-ल्यूमेफैन्ट्रिन दी गई। इनमें से 11 लोगों को रक्सोलिटिनिब भी दिया गया, जबकि बाकी को नहीं। तीन महीने बाद, सभी प्रतिभागियों को दोबारा मलेरिया से संक्रमित किया गया, ताकि यह देखा जा सके कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे काम कर रही है।

क्या कहते हैं शोध के नतीजे?

शोध में पाया गया कि रक्सोलिटिनिब सुरक्षित है और इसके कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं दिखे। जिन लोगों को यह दवा दी गई, उनके शरीर में हानिकारक सूजन कम थी। उनके शरीर में ऐसे संकेत मिले जो बताते हैं कि बीमारी की गंभीरता कम हो सकती है। दोबारा संक्रमण पर उनकी इम्यून प्रतिक्रिया अधिक संतुलित थी।

शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि मलेरिया की मौजूदा दवाएं परजीवी को तो मारती हैं, लेकिन सूजन को नहीं रोकतीं। अगर हम शरीर की सूजन प्रतिक्रिया को भी नियंत्रित कर सकें, तो मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

क्यों अहम है यह खोज?

आज मलेरिया के टीके पूरी तरह प्रभावी नहीं हैं और उनकी सुरक्षा लंबे समय तक नहीं रहती। इस वजह से लोग बार-बार मलेरिया से संक्रमित हो जाते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि रक्सोलिटिनिब जैसी दवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बना सकती हैं। बिना नुकसान पहुंचाए बेहतर इम्यून प्रतिक्रिया विकसित कर सकती हैं। भविष्य में मलेरिया से होने वाली गंभीर बीमारी को कम कर सकती हैं।

शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि अगर हम सूजन को नुकसान पहुंचाए बिना नियंत्रित कर सकें, तो मलेरिया से लड़ने में यह एक बड़ा कदम होगा।

आगे क्या?

यह शोध अभी शुरुआती चरण में है। यह अध्ययन स्वस्थ वयस्कों पर किया गया था, जो मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में नहीं रहते थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब इस दवा का परीक्षण मलेरिया प्रभावित देशों में, बच्चों और गंभीर मरीजों पर बड़े स्तर के क्लिनिकल ट्रायल में किया जाना जरूरी है।

रक्सोलिटिनिब मलेरिया का नया इलाज नहीं है, लेकिन यह मौजूदा इलाज को और बेहतर बना सकती है। अगर आगे के शोध सफल होते हैं, तो यह दवा मलेरिया से होने वाली लाखों मौतों को रोकने में मदद कर सकती है। यह खोज मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में एक नई और मजबूत उम्मीद लेकर आई है।