20 हजार खुराक से तृतीय चरण क्लिनिकल ट्रायल होगा, जिसमें बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ वैक्सीन की प्रभावशीलता जांची जाएगी। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

डीआर कांगो में इबोला के बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ 70 हजार वैक्सीन की मंजूरी

डीआर कांगो में इबोला के बुंडिबुग्यो वायरस का प्रकोप जारी, 70 हजार इरवेबो वैक्सीन खुराक मंजूर; स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के साथ वैक्सीन की प्रभावशीलता पर होगा अहम अध्ययन

Dayanidhi

  • डीआर कांगो को बुंडिबुग्यो वायरस प्रकोप के बीच आईसीजी से इरवेबो वैक्सीन की 70 हजार खुराक मिलीं।

  • 50 हजार खुराक फ्रंटलाइन और स्वास्थ्यकर्मियों को दी जाएंगी, ताकि बीमारी के खिलाफ सुरक्षा मजबूत हो सके।

  • 20 हजार खुराक से तृतीय चरण क्लिनिकल ट्रायल होगा, जिसमें बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ वैक्सीन की प्रभावशीलता जांची जाएगी।

  • वैज्ञानिकों के अनुसार, शुरुआती प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों में वैक्सीन से संभावित सुरक्षा के संकेत मिले हैं।

  • डब्ल्यूएचओ और अफ्रीका सीडीसी ने समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर प्रभावित लोगों की सुरक्षा और प्रकोप रोकने पर जोर दिया।

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) में इबोला के बुंडिबुग्यो वायरस बीमारी का प्रकोप जारी है। इस बीच देश की सरकार ने इबोला वैक्सीन की वैश्विक व्यवस्था से वैक्सीन की मांग की थी। इंटरनेशनल कोऑर्डिनेटिंग ग्रुप ऑन वैक्सीन प्रोविजन (आईसीजी) ने डीआर कांगो को तुरंत 70 हजार खुराक देने की मंजूरी दी है। इस फैसले को बीमारी से प्रभावित लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, इन 70 हजार खुराक में से 50 हजार खुराक का इस्तेमाल सबसे पहले फ्रंटलाइन और स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाने के लिए किया जाएगा। बाकी 20 हजार खुराक का इस्तेमाल एक बड़े वैज्ञानिक अध्ययन यानी तृतीय चरण क्लिनिकल ट्रायल में किया जाएगा। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इरवेबो वैक्सीन बुंडिबुग्यो वायरस से लोगों को कितनी सुरक्षा दे सकती है।

इरवेबो वैक्सीन पर बड़ा सवाल

इरवेबो एक ऐसी वैक्सीन है जिसे इबोला वायरस बीमारी के एक खास प्रकार, जिसे पहले जायर इबोलावायरस कहा जाता था, के खिलाफ इस्तेमाल के लिए लाइसेंस और सिफारिश मिली हुई है। लेकिन बुंडिबुग्यो वायरस इससे अलग है। इसलिए अभी यह साफ नहीं है कि इरवेबो वैक्सीन बुंडिबुग्यो वायरस से संक्रमित होने से इंसानों को बचा सकती है या नहीं।

वैज्ञानिकों को प्रयोगशाला और जानवरों पर किए गए शुरुआती अध्ययनों से कुछ उम्मीद जरूर मिली है। इन अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि यह वैक्सीन कुछ हद तक सुरक्षा दे सकती है। हालांकि, इंसानों में इसके प्रभाव को लेकर अभी पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं हैं। यही वजह है कि क्लिनिकल ट्रायल को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्लिनिकल ट्रायल से मिलेगी जरूरी जानकारी

20 हजार वैक्सीन खुराक का इस्तेमाल तृतीय चरण क्लिनिकल ट्रायल में किया जाएगा। इस अध्ययन से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ इरवेबो कितनी प्रभावी है और इसका इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है।

इस अध्ययन के नतीजे केवल मौजूदा प्रकोप के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं होंगे, बल्कि भविष्य में होने वाले ऐसे प्रकोपों से निपटने में भी मदद कर सकते हैं। अगर वैक्सीन प्रभावी साबित होती है, तो भविष्य में बुंडिबुग्यो वायरस के प्रकोप के दौरान वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर बेहतर फैसले लिए जा सकेंगे।

लोगों की सहमति जरूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस बात पर भी जोर दिया है कि वैक्सीन लेने वाले लोगों को इसकी सही जानकारी दी जानी चाहिए। खासकर बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ इरवेबो के संभावित फायदे और सीमाओं के बारे में लोगों को पहले से बताया जाना जरूरी है।

क्योंकि इस वायरस के खिलाफ वैक्सीन की प्रभावशीलता अभी साबित नहीं हुई है, इसलिए लोगों को संभावित जोखिम और लाभ समझाकर उनकी सहमति लेना महत्वपूर्ण है। क्लिनिकल ट्रायल में शामिल लोगों के लिए यह प्रक्रिया और भी जरूरी होगी।

डब्ल्यूएचओ और अफ्रीका सीडीसी का समर्थन

डब्ल्यूएचओ और अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने डीआर कांगो को वैक्सीन मिलने का स्वागत किया है। दोनों संगठनों ने कहा है कि मौजूदा स्थिति में डीआर कांगो का मुख्य लक्ष्य प्रभावित लोगों की सुरक्षा करना और जान बचाना होना चाहिए।

डब्ल्यूएचओ और अफ्रीका सीडीसी ने यह भी कहा है कि बीमारी से निपटने में स्थानीय समुदायों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। समुदायों को केवल मदद लेने वाले लोगों के रूप में नहीं, बल्कि बीमारी को रोकने की कोशिशों में सक्रिय भागीदार के रूप में शामिल करना जरूरी है।

भविष्य की तैयारी के लिए भी अहम कदम

आईसीजी में डब्ल्यूएचओ, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज, मेडेसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स और यूनिसेफ शामिल हैं। वैक्सीन के वैश्विक भंडार के लिए गावी, द वैक्सीन एलायंस, आर्थिक सहायता देता है।

डीआर कांगो को मिली 70 हजार खुराक फिलहाल बीमारी के खिलाफ तत्काल सुरक्षा देने के साथ-साथ वैज्ञानिक जानकारी जुटाने का भी काम करेंगी। बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ इरवेबो की वास्तविक क्षमता सामने आने से भविष्य की स्वास्थ्य नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।

डब्ल्यूएचओ और अफ्रीका सीडीसी ने डीआर कांगो की सरकार के साथ मिलकर प्रभावित समुदायों की रक्षा करने, लोगों की जान बचाने और प्रकोप को समाप्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, इस प्रकोप से मिलने वाला वैज्ञानिक अनुभव अफ्रीका को भविष्य की महामारियों और वायरस के प्रकोप के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने में मदद कर सकता है।