रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते वाहनों के बावजूद 2011 से 2025 तक सड़क मौतों की दर 21% घटी, लेकिन 11.6 लाख जानें गई। प्रतीकात्मक छवि, साभार: आईस्टॉक
राजकाज

दुनिया में सड़क हादसों में कमी, फिर भी हर दिन तीन हजार से ज्यादा मौतें: रिपोर्ट

डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट: 15 साल में सड़क हादसों की दर 21 फीसदी घटी, लेकिन 2025 में 11.6 लाख लोगों ने गंवाई जान

Dayanidhi

  • रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते वाहनों के बावजूद 2011 से 2025 तक सड़क मौतों की दर 21% घटी, लेकिन 11.6 लाख जानें गई।

  • संयुक्त राष्ट्र का नया संकल्प: 2030 तक सड़क हादसों में मौत और गंभीर चोटों को 50% कम करने का लक्ष्य।

  • मोटरसाइकिल हादसे बढ़े: दुनिया में सड़क मौतों का लगभग एक तिहाई हिस्सा दोपहिया वाहन चालकों का, हेलमेट सुरक्षा जरूरी।

  • डब्ल्यूएचओ की चेतावनी: पैदल यात्री, साइकिल चालक और बाइक सवार सबसे ज्यादा जोखिम में, सुरक्षित सड़क व्यवस्था की जरूरत।

  • सुरक्षित सड़कों पर जोर: मजबूत कानून, बेहतर बुनियादी ढांचा और जागरूकता से सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

दुनिया की सड़कों पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 15 सालों में एक अरब से ज्यादा नए वाहन सड़कों पर उतरे, इसके बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की दर में कमी आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011 से 2025 के बीच सड़क हादसों में होने वाली मौतों की दर में 21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

यह गिरावट सड़क सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का परिणाम मानी जा रही है। कई देशों ने बेहतर यातायात नियम, सुरक्षित सड़क निर्माण और लोगों में जागरूकता बढ़ाने जैसे प्रयास किए हैं। हालांकि, सड़क दुर्घटनाएं अब भी दुनिया के सामने बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई हैं।

हर साल लाखों परिवारों पर टूटता है दुख का पहाड़

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में करीब 11.6 लाख लोगों की मौत हुई। सड़क हादसे आज भी बच्चों और युवाओं के लिए सबसे बड़े खतरों में शामिल हैं। पांच से 29 वर्ष की उम्र के लोगों की मौत का एक प्रमुख कारण सड़क दुर्घटनाएं बनी हुई हैं।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि सड़क पर होने वाली ज्यादातर मौतों को रोका जा सकता है। इसके लिए सुरक्षित सड़क व्यवस्था, बेहतर कानून और नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।

सड़कें लोगों के लिए बननी चाहिए

रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस के हवाले से कहा गया है कि पिछले 15 वर्षों में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में वास्तविक सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि देशों द्वारा सुरक्षित सड़क व्यवस्था में निवेश करने से सकारात्मक बदलाव आया है।

उन्होंने जोर दिया कि सड़कें केवल वाहनों की तेज आवाजाही के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। पैदल चलने वालों, साइकिल चालकों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य- 2030 तक आधी हों सड़क मौतें

सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने नई घोषणा जारी की है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक सड़क हादसों में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को वर्ष 2021 के मुकाबले 50 प्रतिशत तक कम करना है।

नई योजना के तहत देशों को मजबूत सड़क सुरक्षा नीतियां बनानी होंगी। इसमें दुर्घटनाओं के आंकड़ों को बेहतर तरीके से जुटाना, यातायात कानूनों को मजबूत करना और सुरक्षित सड़क एवं वाहन व्यवस्था तैयार करना शामिल है।

संयुक्त राष्ट्र ने ‘सेफ सिस्टम’ मॉडल अपनाने पर जोर दिया है। इस सोच के अनुसार, इंसान से गलती हो सकती है, इसलिए सड़क व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि गलती होने पर भी गंभीर नुकसान की संभावना कम हो।

मोटरसाइकिल बढ़ीं तो बढ़ा खतरा

पिछले कुछ वर्षों में मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2011 से 2025 के बीच दुनिया में मोटरसाइकिलों की संख्या तीन गुना से अधिक बढ़ गई। अब सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली लगभग एक तिहाई मौतें मोटरसाइकिल सवार लोगों की होती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि हेलमेट का इस्तेमाल जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाता है। सुरक्षित हेलमेट दुर्घटना के समय मौत के खतरे को छह गुना से ज्यादा कम कर सकता है।

पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती

डब्ल्यूएचओ ने बताया कि सड़क हादसों में मरने वाले आधे से अधिक लोग कारों में बैठे लोग नहीं होते। इनमें पैदल यात्री, साइकिल चालक और मोटरसाइकिल सवार शामिल हैं।

सड़क व्यवस्था में अक्सर कारों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे कमजोर यातायात उपयोगकर्ताओं के लिए खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम गति सीमा, सुरक्षित फुटपाथ, बेहतर साइकिल मार्ग और कड़े यातायात नियम हादसों को कम कर सकते हैं।

नए साधनों के साथ नई सुरक्षा जरूरतें

ई-स्कूटर, ई-बाइक और अन्य नए यातायात साधनों के बढ़ते इस्तेमाल ने परिवहन व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। इन साधनों के लिए सुरक्षित नियम और मानक तय करना जरूरी है।

डब्ल्यूएचओ नए वाहनों और तकनीकों को सुरक्षित बनाने के लिए विशेषज्ञों के साथ काम कर रहा है, ताकि बदलते समय के साथ सड़क सुरक्षा भी बेहतर हो सके।

दुनिया के हर हिस्से में नहीं दिखी समान प्रगति

रिपोर्ट बताती है कि सड़क सुरक्षा में सुधार सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं रहा। कुछ देशों ने सड़क मौतों को आधा करने में सफलता हासिल की है, जबकि कई जगह अभी भी हालात गंभीर हैं।

यूरोप में सड़क मौतों में बड़ी कमी दर्ज की गई है, जबकि अफ्रीकी क्षेत्र में सड़क हादसों में मौतों की संख्या बढ़ी है। दक्षिण-पूर्व एशिया में भी सुधार की गति धीमी रही है।

सुरक्षित सड़कें, स्वस्थ भविष्य की नींव

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि सुरक्षित सड़कें केवल हादसे कम नहीं करतीं, बल्कि बेहतर और स्वस्थ समाज बनाने में भी मदद करती हैं। पैदल चलने, साइकिल चलाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने से प्रदूषण और यातायात का दबाव भी कम किया जा सकता है।

सड़क सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। प्रशासन, वाहन निर्माता कंपनियां, निजी संस्थान और आम लोगों को मिलकर प्रयास करने होंगे। तभी ऐसी सड़कें बनाई जा सकेंगी, जहां हर व्यक्ति सुरक्षित यात्रा कर सके।