मिलेट्स जैसे रागी, ज्वार और बाजरा कम पानी में उगते हैं और पोषण से भरपूर जलवायु अनुकूल अनाज हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
खान-पान

सतत पाक-कला से भोजन की बर्बादी कम करने व जैव विविधता बचाने का दिन है आज

सतत गैस्ट्रोनॉमी दिवस: स्थानीय भोजन, मिलेट्स और पारंपरिक खाद्य विरासत को अपनाकर पर्यावरण, स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित बनाने का वैश्विक संदेश

Dayanidhi

  • सतत गैस्ट्रोनॉमी दिवस भोजन को पर्यावरण, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था से जोड़कर टिकाऊ खानपान अपनाने का संदेश देता है।

  • संयुक्त राष्ट्र और एफएओ भोजन की बर्बादी घटाने, स्थानीय किसानों को समर्थन देने और जैव विविधता बचाने पर जोर देते हैं।

  • पारंपरिक खाद्य विरासत और स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देकर सांस्कृतिक पहचान और टिकाऊ भोजन प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है।

  • मिलेट्स जैसे रागी, ज्वार और बाजरा कम पानी में उगते हैं और पोषण से भरपूर जलवायु अनुकूल अनाज हैं।

  • मौसमी और स्थानीय भोजन अपनाकर हम कार्बन उत्सर्जन घटा सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

हर साल 18 जून को पूरी दुनिया में सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी या सतत पाक-कला दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र और खाद्य एवं कृषि संगठन के सहयोग से मनाया जाता है।

इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि हम जो खाना खाते हैं, उसे कैसे उगाया जाता है, कैसे पकाया जाता है और कैसे वह हमारी थाली तक पहुंचता है, इसका हमारे ग्रह पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।

सतत गैस्ट्रोनॉमी क्या है?

गैस्ट्रोनॉमी का मतलब है भोजन की कला और भोजन से जुड़ी परंपराएं। इसमें किसी क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजन और खानपान की शैली भी शामिल होती है। सतत का मतलब है ऐसा तरीका जो लंबे समय तक चल सके और जिससे प्रकृति को नुकसान न हो।

इसलिए सतत गैस्ट्रोनॉमी का अर्थ है ऐसा भोजन और खाना बनाने की शैली जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए और प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करे। इसमें इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि भोजन के लिए उपयोग होने वाली सामग्री कहां से आई है, उसे कैसे उगाया गया है और वह कितनी दूर यात्रा करके हमारी थाली तक पहुंची है।

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और उद्देश्य

संयुक्त राष्ट्र और उसका संगठन खाद्य एवं कृषि संगठन इस विचार को बढ़ावा देते हैं कि दुनिया में भोजन की व्यवस्था अधिक टिकाऊ और जिम्मेदार होनी चाहिए। इसका उद्देश्य भोजन की बर्बादी को कम करना, स्थानीय किसानों को बढ़ावा देना और जैव विविधता की रक्षा करना है। साथ ही, यह भी जरूरी है कि लोग ऐसा भोजन चुनें जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हो।

भोजन और पर्यावरण का संबंध

आज के समय में भोजन का संबंध केवल खाने-पीने तक सीमित नहीं है। यह जलवायु परिवर्तन, पानी की खपत और मिट्टी की गुणवत्ता से भी जुड़ा हुआ है। कृषि के लिए बहुत अधिक पानी और रासायनिक खादों का उपयोग पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, भोजन को लंबी दूरी तक ले जाने से कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग की समस्या और गंभीर होती है। इसलिए यह जरूरी है कि हम स्थानीय और मौसमी भोजन को अधिक महत्व दें।

भारत में खाद्य विरासत का महत्व

इस साल सतत गैस्ट्रोनॉमी दिवस की थीम “खाद्य विरासत का उत्सव” है। इसका मतलब है कि हमें अपनी पारंपरिक और स्थानीय खाद्य परंपराओं को फिर से अपनाना चाहिए। भारत जैसे देश में यह विषय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां भोजन की समृद्ध परंपरा रही है। यहां अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रकार के अनाज, सब्जियां और व्यंजन पाए जाते हैं, जो स्थानीय जलवायु और संस्कृति से जुड़े हैं।

मिलेट्स: जलवायु के लिए अनुकूल अनाज

भारत में आजकल मिलेट्स यानी मोटे अनाजों की ओर फिर से ध्यान दिया जा रहा है। इनमें रागी, ज्वार, बाजरा और फॉक्सटेल मिलेट शामिल हैं। ये अनाज कम पानी में भी आसानी से उग जाते हैं और सूखे मौसम में भी अच्छी पैदावार देते हैं। इसलिए इन्हें जलवायु के अनुकूल अनाज कहा जाता है। इसके अलावा, ये पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें फाइबर, प्रोटीन, आयरन और कई जरूरी खनिज पाए जाते हैं। यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं और आधुनिक जीवनशैली में संतुलित आहार का अच्छा विकल्प बन सकते हैं।

हमारी जिम्मेदारी क्या है

सतत गैस्ट्रोनॉमी दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम अपने खाने को लेकर कितने जिम्मेदार हैं। यदि हम स्थानीय बाजार से ताजा और मौसमी भोजन खरीदें, भोजन की बर्बादी कम करें और पारंपरिक अनाजों को अपने आहार में शामिल करें, तो हम पर्यावरण की रक्षा में योगदान दे सकते हैं। इससे स्थानीय किसानों और उत्पादकों को भी मदद मिलती है और उनकी आजीविका मजबूत होती है।

भोजन केवल जीवन की आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, प्रकृति और भविष्य से जुड़ा हुआ है। सतत गैस्ट्रोनॉमी दिवस हमें यह सिखाता है कि यदि हम समझदारी से भोजन चुनें और प्रकृति का सम्मान करें, तो हम एक स्वस्थ शरीर के साथ-साथ एक स्वस्थ ग्रह भी बना सकते हैं। आज लिए गए छोटे-छोटे फैसले आने वाले समय में बड़े बदलाव ला सकते हैं।