फ्रांस में जुलाई 2026 केवल एक और गर्म महीना नहीं रहा, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन की भयावह तस्वीर बनकर सामने आया।
126 वर्षों में पहली बार औसत तापमान 24.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 3.8 डिग्री अधिक था। पूरे महीने बारिश में 70 फीसदी की कमी और धूप में 35 फीसदी की बढ़ोतरी ने देश को भीषण गर्मी, सूखे और जंगल की आग जैसी कई आपदाओं के बीच धकेल दिया।
16 दिनों तक चली लू, 40.5 डिग्री सेल्सियस का नया तापमान रिकॉर्ड और 30.6 डिग्री सेल्सियस की सबसे गर्म रात ने साफ कर दिया कि चरम मौसम अब अपवाद नहीं, बल्कि नई हकीकत बनता जा रहा है।
सूखी मिट्टी, घटते जल स्रोत, खेतों पर बढ़ता संकट और 42 हजार हेक्टेयर जंगल को निगलने वाली आग ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक 2010 के बाद फ्रांस में लू की घटनाओं में तेज बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि जलवायु परिवर्तन तेजी से अपना असर दिखा रहा है। यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यूरोप समेत दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी विनाशकारी गर्मी सामान्य बन सकती है।
फ्रांस ने जुलाई 2026 में ऐसी गर्मी का सामना किया है, जैसी उसने बीते 126 सालों में कभी नहीं देखी। फ्रांस के लिए पिछला महीना जलवायु इतिहास का सबसे गर्म और दूसरा सबसे सूखा जुलाई साबित हुआ।
इस दौरान तपती धूप और झुलसाने वाली हवाओं ने न केवल तापमान के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए, बल्कि साबित कर दिया है कि बदली जलवायु से धरती का कोई भी हिस्सा सुरक्षित नहीं है। कहीं न कहीं यह इंसान और प्रकृति के रिश्तों में बढ़ती दरार को भी दर्शाता है।
फ्रांस की मौसम विज्ञान एजेंसी मेटियो-फ्रांस ने पुष्टि की है कि इस साल जुलाई में फ्रांस ने अब तक के सबसे गर्म महीने का सामना किया, जब औसत तापमान बढ़कर 24.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके साथ ही बढ़ते तापमान ने 2003 और 2006 के पुराने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।
इससे पहले अगस्त 2003 में औसत तापमान 24.8 और जुलाई 2006 में 24.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
इतना ही नहीं, यह तीसरा सबसे सूखा और दूसरा सबसे अधिक धूप वाला जुलाई भी रहा। लगातार भीषण गर्मी, बेहद कम बारिश और तेज धूप ने खेतों, जंगलों और लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाला।
रुझान दर्शाते हैं कि जुलाई में देशभर में सामान्य से 35 फीसदी अधिक धूप दर्ज की गई। यही वजह है कि जुलाई 2026, जुलाई 2022 (40 फीसदी अधिक धूप) के बाद रिकॉर्ड में दर्ज दूसरी सबसे अधिक धूप वाली जुलाई रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति बताती है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का नहीं, बल्कि मौजूदा समय का संकट बन चुका है।
रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें
रिपोर्ट से पता चला है कि जुलाई में औसत तापमान सामान्य से 3.8 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा, जबकि दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 5.2 डिग्री सेल्सियस के ऊपर पहुंच गया। वहीं पूरे महीने एक भी ऐसा दिन नहीं रहा जब तापमान सामान्य से नीचे आया हो।
इस दौरान 4 से 19 जुलाई तक 16 दिनों चली भीषण लू फ्रांस के इतिहास की सबसे लम्बे समय तक चली लू में शामिल हो गई। मई-जून में असामान्य गर्मी के बाद जुलाई में इतनी लंबी चली लू बेहद दुर्लभ मानी जा रही है।
16 दिनों तक चला गर्मी और लू का तांडव
12 जुलाई को हालात इस कदर गंभीर हो गए कि 37 प्रशासनिक क्षेत्रों में रेड अलर्ट और 46 क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट जारी करना पड़ा। गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई 1983 में 23 दिन और जुलाई 2006 में 21 दिन तक लू चली थी।
हालांकि, लू की यह घटना 17 से 30 जून 2026 के बीच चली ऐतिहासिक लू जितनी तीव्र नहीं थी, लेकिन उससे कुछ अधिक दिनों तक इसका प्रकोप दर्ज किया गया।
स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दक्षिणी फ्रांस के मैरिग्नेन में पहली बार तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं 8 से 9 जुलाई की रात विव्स में न्यूनतम तापमान 30.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो फ्रांस में अब तक की सबसे गर्म रात का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।
इस दौरान देश भर में धूप सामान्य से 35 फीसदी ज्यादा खिली। पेरिस में 367 घंटे धूप दर्ज की गई, जो सामान्य से 65 फीसदी अधिक है।
बारिश गायब, प्यास से बेहाल धरती
फ्रांस में हालात यह रहे कि भीषण गर्मी और सूखे ने प्रकृति के पूरे संतुलन को ही बिगाड़ दिया। इस दौरान देश भर में बारिश में 70 फीसदी तक की भारी कमी दर्ज की गई। जमीन की नमी अगस्त 2022 के सर्वकालिक निचले स्तर तक गिर चुकी है।
इससे यह 2022 और 2020 के बाद तीसरा सबसे सूखा जुलाई बन चुका है। बता दें कि इससे पहले जुलाई 2022 के दौरान बारिश में 85 फीसदी और जुलाई 2020 में 75 फीसदी कमी दर्ज की गई थी।
कई इलाकों में तो करीब-करीब पूरे महीने ही बारिश नहीं हुई। दक्षिणी फ्रांस के कुछ शहरों में एक बूंद भी बारिश दर्ज नहीं की गई, जबकि कई स्थानों पर बारिश 2 मिलीमीटर से भी कम रही।
इसका असर साफ तौर पर मिट्टी पर दिखाई दिया। चिंता की बात है कि जुलाई के अंत तक मिट्टी में नमी का स्तर घटकर अगस्त 2022 के रिकॉर्ड सूखे के बराबर पहुंच गया। इससे कृषि, जल संसाधनों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर संकट और गहरा गया है।
तेज धूप ने और बढ़ाई परेशानी
जुलाई में सामान्य से 35 फीसदी अधिक धूप दर्ज की गई, जिससे यह रिकॉर्ड का दूसरा सबसे धूप वाला जुलाई बन गया। उत्तरी फ्रांस के कई हिस्सों में धूप सामान्य के 60 फीसदी से भी अधिक रही।
ऐसे में लगातार तेज धूप, भीषण गर्मी और बारिश की कमी ने मिट्टी से नमी को तेजी से सोख लिया। नतीजन पौधों में पानी की जरूरत बढ़ी और सूखे की स्थिति और गंभीर हो गई।
जंगलों में आग ने मचाई तबाही
गर्मी, सूखे और तेज हवाओं के कारण फ्रांस में पूरे महीने जंगलों में आग लगने का खतरा बेहद ऊंचा बना रहा। 12 जुलाई को 70 क्षेत्रों में जंगल की आग का उच्च जोखिम घोषित किया गया। सबसे बड़ी त्रासदी गिरोंद क्षेत्र में हुई, जहां 22 जुलाई को लगी भीषण आग ने शुरुआती अनुमान के अनुसार करीब 42 हजार हेक्टेयर में फैले जंगल को राख कर दिया।
स्थिति इस कदर गंभीर रही कि आग की वजह से 2.2 लाख से अधिक लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। यह फ्रांस में 1949 के बाद जंगल में लगी सबसे विनाशकारी आग मानी जा रही है।
गर्मी के बीच आए विनाशकारी तूफान
भीषण गर्मी के बावजूद जुलाई में कई हिस्सों में तेज आंधी-तूफान भी आए। 16 जुलाई को पूरे देश में 20 हजार से अधिक बिजली गिरने की घटनाएं दर्ज की गईं, जो इस वर्ष एक दिन में दर्ज सबसे अधिक थीं।
कुछ क्षेत्रों में बवंडर, ओला गिरने के साथ कुछ ही घंटों में 50 से 77 मिलीमीटर तक बारिश हुई, जिससे स्थानीय तौर पर बाढ़ जैसी स्थिति बन गई।
जलवायु परिवर्तन का साफ संकेत
वैज्ञानिकों के अनुसार जुलाई में आई यह लू 1947 के बाद फ्रांस में दर्ज लू की 53वीं घटना थी और इसी महीने के अंत में लू की 54वीं घटना भी सामने आने लगी है। चौंकाने वाली बात यह है कि 1947 से 2010 तक देश में लू की जितनी भी घटनाएं दर्ज हुईं हैं, उससे अधिक केवल 2010 के बाद 15 वर्षों में दर्ज की जा चुकी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी से कमी नहीं की गई, तो सदी के अंत तक फ्रांस का औसत तापमान औद्योगिक काल से करीब 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।
ऐसी स्थिति में 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान हर साल सामान्य घटना बन सकता है, कुछ क्षेत्रों में तो पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं भीषण गर्म दिनों की संख्या भी आज की तुलना में करीब 10 गुणा बढ़ सकती है।
आने वाले महीनों के लिए चेतावनी
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगस्त से अक्टूबर 2026 के दौरान भी फ्रांस और यूरोप में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ सकती है। हालांकि यह मौसम पूर्वानुमान नहीं, बल्कि जलवायु रुझान है।
फिर भी वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी और चरम मौसमी घटनाएं यह स्पष्ट कर रही हैं कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब दुनिया के विकसित देशों पर भी उतनी ही गंभीरता से दिखाई देने लगा है।