ओजोन कमी का फायदा जलवायु नीतियों से ओजोन घटने पर 84 लाख लोगों का भूख का खतरा कम होता है।
ओजोन कमी का 56 फीसदी फायदा मुख्य रूप से सब-सहारा अफ्रीका और भारत में भूख कम करने में होता है।
यदि आज की जलवायु और वायु प्रदूषण बनी रहे, तो 2050 तक भूख का जोखिम लगभग 33 करोड़ होगा।
कार्बन मूल्य, बायोएनर्जी और वनरोपण जैसी नीतियां खाद्य कीमतें बढ़ाकर भूख का खतरा बढ़ा सकती हैं।
दुनिया के शोधकर्ताओं की हाल की रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि हम जलवायु को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए कदम उठाते हैं, तो 2050 तक भूख का खतरा बढ़ सकता है। इस अध्ययन में छह वैश्विक कृषि-आर्थिक मॉडल का उपयोग किया गया और यह नेचर फूड में प्रकाशित हुआ है।
भूख और जलवायु परिवर्तन
जलवायु परिवर्तन सीधे खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं से फसलें प्रभावित होती हैं। इससे खाद्य उपलब्धता घटती है और भूख का खतरा बढ़ता है। इसलिए दुनिया भर के देशों ने जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य अपनाया है।
जलवायु नीतियों से भूख बढ़ने का खतरा
अध्ययन में पाया गया कि जलवायु को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने वाली नीतियां - जैसे कार्बन मूल्य निर्धारण, बायोएनर्जी उत्पादन और वनरोपण कृषि उत्पादों की कीमतें बढ़ा सकती हैं। इससे खाद्य उपलब्धता घटती है और भूख का खतरा बढ़ता है।
विशेष रूप से, यदि आज की जलवायु और वायु प्रदूषण की स्थिति बनी रहती, तो 2050 तक भूख का खतरा घटकर लगभग 33 करोड़ लोग हो जाएगा। लेकिन 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य वाले परिदृश्य में भूख का खतरा 5.6 करोड़ लोगों तक बढ़ सकता है।
ओजोन घटाने से आंशिक राहत
अध्ययन ने यह भी दिखाया कि जलवायु नीतियां ओजोन प्रदूषक गैसों को कम करती हैं, जिससे ओजोन की मात्रा घटती है। कम ओजोन से फसलों की पैदावार बढ़ती है। खाद्य कीमतें घटती हैं और खाद्य उपलब्धता बढ़ती है। इस प्रभाव से लगभग 84 लाख लोगों की भूख का खतरा कम होता है, जो कुल बढ़ोतरी का लगभग 15 फीसदी है।
फायदा किस क्षेत्र में ज्यादा
ओजोन में कमी के लाभ मुख्य रूप से सब-सहारा अफ्रीका और भारत में केंद्रित हैं। ये क्षेत्र वर्तमान में भूख से सबसे अधिक प्रभावित हैं। इसलिए, जलवायु नीतियों के ओजोन-आधारित लाभ इन क्षेत्रों में विशेष महत्व रखते हैं।
नीति और समाधान
अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि केवल ग्रीनहाउस गैसों को कम करना ही पर्याप्त नहीं है। जलवायु नीतियों को बनाते समय खाद्य सुरक्षा को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। भूमि उपयोग और कृषि कीमतों का सही प्रबंधन जरूरी है, ताकि भूख का खतरा कम किया जा सके। ओजोन और अन्य वायु गुणवत्ता सुधारों को भी नीतियों में शामिल करना चाहिए।
इस तरह, जलवायु परिवर्तन और नीतियों के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों का संतुलित अध्ययन करना जरूरी है। इससे न केवल तापमान नियंत्रण में मदद मिलेगी, बल्कि भूख को भी कम किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर अध्ययन में कहा गया है कि 1.5 डिग्री सेल्सियस जलवायु लक्ष्य भूख का खतरा बढ़ा सकता है। ओजोन कमी इससे होने वाले नुकसान का लगभग 15 फीसदी कम कर सकती है। सब-सहारा अफ्रीका और भारत को सबसे अधिक फायदा मिलेगा। नीतियां सिर्फ कार्बन कटौती पर नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और भूमि प्रबंधन पर भी ध्यान दें।
इस अध्ययन से यह संदेश मिलता है कि जलवायु नीतियां प्रभावशाली हो सकती हैं, लेकिन उन्हें समग्र दृष्टिकोण से तैयार करना होगा। केवल तापमान कम करने का लक्ष्य ही पर्याप्त नहीं है, हमें यह भी देखना होगा कि हमारे फैसले दुनिया के सबसे भूखग्रस्त लोगों को कैसे प्रभावित कर रहे हैं।