बर्फ के बीच बने घोंसले में जेंटू पेंगुइन और उसके दो नन्हे सपने; फोटो: आईस्टॉक 
जलवायु

जलवायु संकट की आहट: अंटार्कटिका में बदल रहा पेंगुइन का ‘जैविक कैलेंडर’

जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ते तापमान के साथ गर्म होते अंटार्कटिका में पेंगुइन का प्रजनन समय तेजी से बदल रहा है

Lalit Maurya

  • अंटार्कटिका में जलवायु परिवर्तन के कारण पेंगुइन के प्रजनन समय में बड़ा बदलाव देखा गया है।

  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार, जेंटू पेंगुइन हर दशक 13 दिन पहले प्रजनन करने लगे हैं, कुछ कॉलोनियों में यह बदलाव 24 दिन तक का है।

  • इसी तरह एडेली और चिनस्ट्रैप पेंगुइन भी औसतन 10 दिन पहले अंडे देने लगे हैं।

  • वैज्ञानिकों के मुताबिक, पक्षियों और संभवतः किसी भी कशेरुकी जीव में यह दर्ज किया गया अब तक का सबसे तेज जैविक बदलाव है।

  • वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि पेंगुइन के प्रजनन समय में हो रहे ये बदलाव समुद्री बर्फ, जैविक उत्पादकता और तापमान में बदलाव से जुड़े हैं, जो अंटार्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।

अंटार्कटिका में जलवायु परिवर्तन के संकेत अब सिर्फ पिघलती बर्फ तक सीमित नहीं रहे। यह बदलाव दुनिया के इस सबसे ठंडे महाद्वीप में जीवन को भी चुनौती दे रहे हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ऑक्सफोर्ड ब्रूक्स यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक दशक लंबे अध्ययन में अंटार्कटिका के पेंगुइनों के प्रजनन समय में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव सामने आया है। वैज्ञानिक इस बदलाव को जलवायु संकट की गंभीर चेतावनी मान रहे हैं।

इससे पेंगुइनों को भोजन मिलने में दिक्कत हो सकती है और अलग-अलग प्रजातियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने का खतरा है। इसका असर अंटार्कटिक के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है। अध्ययन के नतीजे जर्नल ऑफ एनिमल इकोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं।

10 साल में बदल गया पेंगुइन का जैविक कैलेंडर

अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने 2012 से 2022 के बीच अंटार्कटिका और उप-अंटार्कटिक द्वीपों में स्थित पेंगुइन की 37 कॉलोनियों पर नजर रखी। इसके लिए 77 टाइम-लैप्स कैमरों का इस्तेमाल किया गया, जिनसे तीन प्रजातियों एडेली, चिनस्ट्रैप और जेंटू पेंगुइन के प्रजनन संबंधी व्यवहार का अध्ययन किया गया। इनकी कॉलोनियों में कुछ दर्जन से लेकर लाखों तक घोंसले पाए गए।

उन्होंने उस तारीख पर नजर रखी जब पेंगुइन कॉलोनी में आकर लगातार घोंसले बनाना शुरू करते हैं। अध्ययन में 77 टाइम-लैप्स कैमरों से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, ताकि नतीजे केवल कुछ इलाकों तक सीमित न रहें, बल्कि पूरी प्रजाति पर लागू हों।

अध्ययन में पाया गया कि पेंगुइन की तीनों प्रजातियों का प्रजनन समय रिकॉर्ड स्तर पर आगे खिसक गया है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव जेंटू पेंगुइन में देखा गया, जो हर दशक औसतन 13 दिन पहले प्रजनन करने लगे हैं, जबकि कुछ कॉलोनियों में यह बदलाव 24 दिन तक का है। इसी तरह एडेली और चिनस्ट्रैप पेंगुइन भी औसतन 10 दिन पहले अंडे देने लगे हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, पक्षियों और संभवतः किसी भी कशेरुकी जीव में यह दर्ज किया गया अब तक का सबसे तेज जैविक बदलाव है। वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि पेंगुइन के प्रजनन समय में हो रहे ये बदलाव समुद्री बर्फ, जैविक उत्पादकता और तापमान में बदलाव से जुड़े हैं।

चार गुणा तेजी से गर्म हो रहे पेंगुइन कॉलोनी क्षेत्र

अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉक्टर इग्नासियो जुआरेज मार्टिनेज के मुताबिक जलवायु परिवर्तन में पेंगुइन की कुछ प्रजातियां फायदा उठा सकती हैं, जबकि कुछ को नुकसान झेलना पड़ सकता है।

उनके अनुसार, अंटार्कटिक प्रायद्वीप में बढ़ती गर्मी जेंटू जैसे सामान्य परिस्थितियों में ढलने वाले पेंगुइन के पक्ष में जा रही है, जबकि क्रिल पर निर्भर चिनस्ट्रैप और बर्फ पर आश्रित एडेली पेंगुइन के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि पेंगुइन अंटार्कटिका की खाद्य श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं और यदि उनकी प्रजातियों की विविधता घटती है, तो पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के असंतुलित होने का खतरा बढ़ सकता है।

अध्ययन में शामिल हर कैमरे के साथ थर्मामीटर भी लगाए गए थे। इससे पता चला कि पेंगुइन कॉलोनियों वाले इलाके हर साल 0.3 डिग्री सेल्सियस की दर से गर्म हो रहे हैं, जो अंटार्कटिका के औसत तापमान में हो रही वृद्धि से चार गुणा अधिक है। इसकी वजह से ये इलाके अब दुनिया के सबसे तेजी से गर्म होते आवासों में शामिल हो गए हैं।

क्या यह अनुकूलन है या खतरे की घंटी?

सांख्यिकीय मॉडल बताते हैं कि प्रजनन समय में आए इन बदलावों की एक बड़ी वजह तापमान में हो रही बढ़ोतरी है, लेकिन वैज्ञानिक अभी यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि पेंगुइन इस बदलाव के साथ सचमुच खुद को ढाल पा रहे हैं या नहीं।

वैज्ञानिकों को आशंका है कि इससे भोजन की उपलब्धता जैसे अन्य प्राकृतिक कारकों के साथ तालमेल बिगड़ सकता है। यहां तक कि सबसे अच्छे हालात में भी यह कहना मुश्किल है कि अगर तापमान इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो पेंगुइन की ये प्रजातियां आगे कितनी दूर तक खुद को अनुकूलित कर पाएंगी।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता डॉक्टर फियोना जोन्स का इस बारे में कहना है, “पेंगुइन को जलवायु परिवर्तन का संकेतक माना जाता है। इसलिए उनके जीवन में हो रहे ये बदलाव पूरी दुनिया की जैव विविधता के लिए चेतावनी हैं।“

उनके मुताबिक यह समझने के लिए आगे भी निगरानी जरूरी है कि प्रजनन समय में आया यह रिकॉर्ड बदलाव पेंगुइनों की प्रजनन सफलता को किस तरह प्रभावित कर रहा है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, पेंगुइन सिर्फ एक प्रजाति नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन का जीवित थर्मामीटर हैं। उनके व्यवहार में हो रहा यह बदलाव संकेत देता है कि धरती की जलवायु प्रणाली तेजी से असंतुलित हो रही है और इसके असर अब दूर-दराज के बर्फीले इलाकों में भी साफ दिखने लगे हैं।