नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने लखनऊ के ईंट भट्ठे से हो रहे वायु प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है।
एनजीटी ने एक संयुक्त समिति का गठन कर मामले की जांच के आदेश दिए हैं। समिति को निर्देश दिया है कि वह मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करे और प्रदूषण को रोकने एवं स्थिति में सुधार के लिए उचित कदम सुझाए।
शिकायत के अनुसार भट्ठा गांव और स्कूल से महज 150 मीटर दूर स्थित है, जो निर्धारित मानकों का उल्लंघन है। भट्ठे की नीची चिमनियों से लगातार काला धुआं और जहरीली गैसें निकलती रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां बिना रोक-टोक के काम जारी है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक ईंट भट्ठे से फैल रहे वायु प्रदूषण के गंभीर आरोपों पर सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने 5 फरवरी 2026 को इस मामले में जांच के लिए एक संयुक्त समिति के गठन का आदेश दिया है। इस समिति में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और लखनऊ के जिलाधिकारी के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
मामला नगर पंचायत एवं तहसील 'बख्शी का तालाब' के ग्राम ममपुर बाना में स्थित केसरी ब्रिक फील्ड के खिलाफ दायर शिकायत से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने समिति को निर्देश दिया है कि वह मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करे और प्रदूषण को रोकने एवं स्थिति में सुधार के लिए उचित कदम सुझाए।
राज्य सरकार से जवाब तलब
एनजीटी ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन), लखनऊ के जिलाधिकारी, के साथ-साथ उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रल बोर्ड (यूपीपीसीबी) और संबंधित ईंट भट्ठे के संचालक से भी जवाब मांगा है।
इस बाबत दाखिल याचिका में बताया गया कि यह ईंट भट्ठा घनी आबादी वाले इलाके में चल रहा है। इसके पूर्व में ममपुर बाना गांव है, जहां करीब 4,500 लोग रहते हैं। इसी गांव के पास सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल है, जहां करीब 150 बच्चे पढ़ते हैं। पश्चिम दिशा में बाना गांव है, जिसकी आबादी करीब 6,000 है।
यहां प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय भी हैं, जहां करीब 300 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
शिकायत के अनुसार भट्ठा गांव और स्कूल से महज 150 मीटर दूर स्थित है, जो निर्धारित मानकों का उल्लंघन है। भट्ठे की नीची चिमनियों से लगातार काला धुआं और जहरीली गैसें निकलती रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां बिना रोक-टोक के काम जारी है। याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार के निर्देशों के मुताबिक ईंट भट्ठे ऐसे स्थानों पर नहीं लगाए जा सकते जो तय दूरी और लेआउट मानकों के खिलाफ हों।
इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि भट्ठे के संचालन के दौरान बड़े ट्रक, ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनें लगातार इलाके से गुजरती हैं, जिससे स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना रहता है।
आरोप है कि जिला प्रशासन को इस अवैध संचालन की जानकारी होने के बावजूद अधिकारी लगातार अनदेखी कर रहे हैं। अब एनजीटी के आदेश के बाद संयुक्त समिति की रिपोर्ट से यह तय होगा कि भट्ठे पर क्या कार्रवाई की जाएगी और क्षेत्र के लोगों को प्रदूषण से राहत मिल पाएगी या नहीं।
एसटीपी की बदहाली से लोग बीमार, एनजीटी ने दिल्ली जल बोर्ड को दिए सुधार के निर्देश
दिल्ली में एक रिहायशी सोसायटी के पास चल रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की बदहाल स्थिति का मामला 9 फरवरी 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में उठाया गया। इस सम्बन्ध में दायर याचिका में कहा गया है कि प्लांट से लगातार बदबूदार गैसें निकल रही हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
एनजीटी ने कहा कि इस मामले की गंभीरता से जांच जरूरी है और पर्यावरण नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारात्मक और दंडात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।
ट्रिब्यूनल ने इस जिम्मेदारी को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के सदस्य सचिव पर सौंपा है। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि बोर्ड के संबंधित अधिकारी जल्द से जल्द आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करेंगे।
ट्रिब्यूनल ने आवेदन का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि दिल्ली जल बोर्ड जल्द से जल्द उचित कदम उठाए। साथ ही डीपीसीसी के सदस्य सचिव को आदेश दिया गया कि वे एसटीपी का निरीक्षण कराएं, एसटीपी के डिस्चार्ज प्वाइंट से नमूने लें और यह जांचें कि प्लांट पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रहा है या नहीं।
ऐसे में यदि जांच में किसी प्रकार का उल्लंघन पाया जाता है, तो डीपीसीसी को सख्त दंडात्मक कार्रवाई के साथ सुधारात्मक कदम भी सुनिश्चित करने होंगे। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।