अनपरा, सोनभद्र; फोटो: अनीश वर्मा/ यूट्यूब 
वायु

उत्तर प्रदेश के अनपरा की हवा में घुली राहत: 6 साल में 169 से 138 पर पहुंचा एक्यूआई, लेकिन मंजिल अभी दूर

सोनभद्र के जिला मजिस्ट्रेट ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि 2019-20 में अनपरा में पीएम10 का स्तर 169 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो 2025-26 में घटकर 138.97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया है।

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • अनपरा के लिए राहत की खबर है। उत्तर प्रदेश के इस औद्योगिक शहर में पिछले छह वर्षों में वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

  • सोनभद्र जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, 2019-20 में पीएम10 का स्तर 169 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो 2025-26 में घटकर 138.97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। यह सुधार नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत लागू उपायों और लगातार निगरानी का परिणाम माना जा रहा है।

  • रिपोर्ट बताती है कि प्रदूषण कम करने के लिए उद्योगों में आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाए गए, साथ ही स्वचालित और मैनुअल निगरानी केंद्रों से हवा की लगातार जांच की जा रही है।

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर ने प्रदूषण के स्रोत और शहर की वहन क्षमता पर अध्ययन किया है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट समीक्षा के बाद जल्द आने वाली है।

  • हालांकि सुधार स्पष्ट है, लेकिन अनपरा की हवा अब भी राष्ट्रीय मानकों से बेहतर नहीं हुई है। ऐसे में यदि सख्त निगरानी और निरंतर सुधार जारी रहे, तो जल्द ही अनपरा 'प्रदूषित शहर' की छवि से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र अनपरा के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के निरंतर प्रयासों से यहां की हवा अब पहले से कहीं अधिक साफ और सांस लेने योग्य हो गई है।

सोनभद्र के जिला मजिस्ट्रेट ने 12 मई 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल रिपोर्ट में बताया है पिछले छह वर्षों में यहां वायु प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

आंकड़ों में सुधार: 169 से 138 पर पहुंचा प्रदूषण

रिपोर्ट के मुताबिक, 2019-20 में अनपरा में पीएम10 का स्तर 169 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो 2025-26 में घटकर 138.97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। यह गिरावट कड़े नियंत्रण उपायों और जन-भागीदारी के कारण आई है।

यह सुधार न केवल आंकड़ों में देखा गया है, बल्कि क्षेत्र के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में भी निरंतर प्रगति देखी जा रही है। हालांकि, चिंता की बात यह है कि यह स्तर अभी भी राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों से अधिक है, जिससे साफ है कि शहर को स्वच्छ हवा तक पहुंचने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना होगा।

प्रशासन ने जानकारी दी है कि अनपरा की हवा में प्रदूषण के स्रोत समझने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच समझौता किया गया। इसके तहत एक विस्तृत अध्ययन किया गया, जिसमें यह जांचा गया कि शहर में प्रदूषण कहां से आ रहा है और शहर की पर्यावरणीय क्षमता कितनी है।

प्रदूषण के स्रोत तलाशने की वैज्ञानिक पड़ताल

आईआईटी कानपुर ने 17 मार्च 2026 को जानकारी दी कि अध्ययन पूरा हो चुका है और उसे समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति के पास भेजा गया है।

समिति के सुझावों और जरूरी बदलावों को शामिल किया जा रहा है। इसमें प्रदूषण के स्रोतों और हवा की गुणवत्ता के विश्लेषण से जुड़ी जानकारी भी जोड़ी जा रही है। फिलहाल रिपोर्ट में संशोधन किया जा रहा है और अंतिम रिपोर्ट जल्द सौंप दी जाएगी।

इससे पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के सिविल इंजीनियरिंग विभाग और पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र ने अनपरा शहर में प्रदूषण के स्रोतों और शहर की वहन क्षमता पर एक अध्ययन किया। इस अध्ययन से जुड़ी अंतिम रिपोर्ट अप्रैल 2023 में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ को सौंप दी गई।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत अनपरा में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सिटी एक्शन प्लान 2019 में मंजूर किया गया। इसके बाद 2025-26 के लिए नई कार्ययोजना को 24 अक्टूबर 2025 को जिला और शहर स्तर की कार्यान्वयन समिति ने मंजूरी दे दी थी।

निगरानी का जाल: मशीनों से मापी जा रही हवा

रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला है कि अनपरा नगर पंचायत हर तीन महीने में वायु प्रदूषण कम करने से जुड़ी अपनी कार्ययोजना अपडेट करके केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्राण पोर्टल (पोर्टल फॉर रेगुलेशन ऑफ एयर-पॉल्यूशन इन नॉन-अटेनमेंट सिटीज) पर दर्ज करता है।

इससे शहर में चल रहे काम की जानकारी नियमित रूप से दर्ज होती रहती है।

एक्शन प्लान के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए अनपरा में थर्मल पावर और औद्योगिक इकाइयों में इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर, बैग फिल्टर, फ्ल्यू गैस डीसल्फराइजेशन (एफजीडी), वेट स्क्रबर और सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन सिस्टम जैसे उपकरण लगाए गए हैं।

साथ ही वायु गुणवत्ता की लगातार निगरानी के लिए स्वचालित वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग स्टेशन (सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन) लगाए गए हैं। ये सभी स्टेशन सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से जुड़े हैं। इसके अलावा, सोनभद्र में दो मैनुअल वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र भी काम कर रहे हैं, जहां नियमित रूप से हवा की जांच की जाती है।

कैसे एनजीटी की नजर में आया अनपरा

अनपरा के मैनुअल मॉनिटरिंग स्टेशन के 2022-23 से 2025-26 तक के आंकड़े बताते हैं कि शहर की हवा में धीरे-धीरे सुधार हुआ है। इस दौरान पीएम10 का स्तर और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दोनों में सुधार दर्ज किया गया।

गौरतलब है कि इस बारे में स्वतः संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने मामला दर्ज किया है। यह मामला केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर 20 अक्टूबर 2023 से 1 नवंबर 2023 के बीच जारी वायु गुणवत्ता बुलेटिन के आधार पर शुरू हुआ। इन बुलेटिन में कई शहरों की हवा “बेहद खराब” जबकि कुछ जगहों पर “गंभीर” श्रेणी में दर्ज की गई थी।

इसके बाद 6 नवंबर 2025 के आदेश में एनजीटी ने उत्तर प्रदेश के अनपरा सहित कई प्रदूषित शहरों को मामले में पक्षकार बनाया।

यह सही है कि सोनभद्र जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साझा प्रयासों से अनपरा अब 'प्रदूषित शहर' की छवि से बाहर निकल रहा है। सालाना कार्ययोजना और आधुनिक तकनीक के मेल ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो औद्योगिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।

हालांकि यह सफर अभी अधूरा है। औद्योगिक गतिविधियों वाले इस शहर में हवा की गुणवत्ता अब भी तय मानकों से ऊपर है। ऐसे में स्पष्ट है कि निगरानी, सख्त नियंत्रण और स्थानीय स्तर पर निरंतर कार्रवाई जारी रही, तभी अनपरा के लोगों को वास्तव में साफ हवा मिल सकेगी।