धान में ईएमएफ3 जीन की खोज से फूल जल्दी खिलेंगे, जिससे गर्मी में परागण सुरक्षित रहेगा और पैदावार बढ़ेगी।
वैज्ञानिकों ने पाया कि ईएमएफ3-1डी जीन धान का फूलना 1.5 घंटे पहले कर देता है, जिससे ताप तनाव से बचाव होता है।
शोध में विकसित तकनीक भारत सहित कई देशों की प्रमुख धान किस्मों में लागू की जा रही है।
जलवायु परिवर्तन और एल नीनो से बढ़ते तापमान में ईएमएफ3 जीन धान की फसल को उत्पादन हानि से बचाने में सहायक होगा।
नई जीन एडिटिंग तकनीकों के माध्यम से ईएमएफ3 गुण को तेजी से विकसित कर उष्ण और समशीतोष्ण क्षेत्रों की खेती सुरक्षित होगी।
जलवायु परिवर्तन और एल नीनो के कारण बढ़ती गर्मी और लंबे सूखे की अवधि ने दुनिया भर में धान की खेती के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। खासकर एशिया और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में, जहां धान मुख्य भोजन है, तेज गर्मी के कारण फसल उत्पादन पर बुरा असर पड़ रहा है। इसी समस्या के समाधान की दिशा में जापान और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण खोज की है।
जापान के राष्ट्रीय कृषि और खाद्य अनुसंधान संगठन (नारो), अन्य जापानी शोध संस्थानों और अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसा जीन खोजा है जो धान के पौधे को गर्मी से बचाने में मदद कर सकता है। इस जीन का नाम ईएमएफ3 (सुबह जल्दी फूलना 3) रखा गया है। यह शोध 'प्लांट बायोटेक्नोलॉजी जर्नल' में प्रकाशित किया गया है।
धान के फूलने का समय सबसे संवेदनशील चरण
धान की फसल में फूल आना एक बहुत ही महत्वपूर्ण और नाजुक चरण होता है। सामान्यतः धान के फूल सुबह करीब 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच खिलते हैं। इस समय तापमान अक्सर 33 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसी समय अधिक गर्मी होने से परागण प्रभावित होता है और कई दाने बन ही नहीं पाते। इससे पैदावार में भारी कमी आती है।
जलवायु परिवर्तन के कारण यह समस्या आने वाले वर्षों में और बढ़ने की आशंका है, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।
ईएमएफ3 जीन कैसे करता है काम
वैज्ञानिकों ने पाया है कि ईएमएफ3 जीन धान के फूलने के समय को बदल सकता है। इस जीन का विशेष प्रकार ईएमएफ3-1डी फूलने का समय लगभग 1.5 घंटे पहले कर देता है। इसका मतलब है कि अब धान के फूल सुबह और भी जल्दी खुलेंगे, जब तापमान अपेक्षाकृत ठंडा होता है।
कम तापमान में फूलने से परागण बेहतर होता है और दानों के बनने की संभावना बढ़ जाती है। इससे गर्मी के कारण होने वाली नुकसान की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
वैज्ञानिकों का मानना है बड़ी सफलता
शोध पत्र में जापान के राष्ट्रीय कृषि और खाद्य अनुसंधान संगठन (नारो) के वैज्ञानिक डॉ. त्सुतोमु इशिमारू ने इस खोज को एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उनके अनुसार, यह जीन धान को “गर्मी से बचने” में मदद करता है और कठिन परिस्थितियों में भी किसानों को उत्पादन बनाए रखने का अवसर देता है।
वहीं अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) के वैज्ञानिक ने बताया कि यह जीन बहुत दुर्लभ है और इसे कई प्रकार की धान की किस्मों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे भारत की स्वर्णा और पुसा बासमती, जापान की टॉयोमेकी, अफ्रीका की साहेल 329 और अन्य किस्में।
दुनिया भर की किस्मों में प्रयोग
शोधकर्ता इस जीन को कई प्रमुख धान की किस्मों में शामिल करने पर काम कर रहे हैं। इसमें भारत, जापान, ब्राजील, लाओस और पश्चिम अफ्रीका की लोकप्रिय किस्में शामिल हैं। इसका उद्देश्य है कि अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में भी धान की फसल गर्मी से सुरक्षित रह सके।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में हाइब्रिड धान उत्पादन में भी उपयोगी साबित हो सकती है, जहां फूलने के समय का मिलान बहुत महत्वपूर्ण होता है।
नई तकनीक और भविष्य की उम्मीद
वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इस जीन को पारंपरिक प्रजनन के साथ-साथ आधुनिक जीन एडिटिंग तकनीक, जैसे प्राइम एडिटिंग के जरिए भी तेजी से विकसित किया जा सकता है।
शोध में कहा गया है कि यह खोज धान को गर्मी सहने में सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा के लिए बहुत उपयोगी होगी।
समय से पहले जागने का फायदा
वैज्ञानिकों ने सरल भाषा में समझाया है कि जैसे इंसान गर्मी से बचने के लिए अपने समय में बदलाव कर सकते हैं, वैसे ही अब धान के पौधे भी “सुबह जल्दी जागकर” तेज गर्मी से बच सकते हैं। ईएमएफ3 जीन के जरिए यह संभव हो सकता है कि भविष्य में धान की फसलें जलवायु परिवर्तन की मार से सुरक्षित रह सकें और किसानों को बेहतर उत्पादन मिलता रहे।