अफगानिस्तान में इस साल अच्छी फसल होने के बावजूद लाखों लोगों के सामने भूख और कुपोषण का संकट गहराता जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने चेतावनी दी है कि नवंबर 2026 से अप्रैल 2027 के बीच देश की करीब 38 फीसदी आबादी यानी 1.92 करोड़ लोगों को गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ सकता है।
इनमें करीब 50 लाख लोगों के भूख के आपातकालीन स्तर पर पहुंचने की आशंका है, जिन्हें तत्काल भोजन और कृषि सहायता की जरूरत होगी। वहीं, 2027 में कुपोषण के मामले करीब 10 फीसदी बढ़कर 40 लाख तक पहुंच सकते हैं। इनमें करीब 10 लाख मामले गंभीर और जानलेवा हो सकते हैं।
इस संकट की मार महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा पड़ने का खतरा है। बेहतर बारिश और बढ़ी पैदावार के बावजूद बेरोजगारी, कम आमदनी, महंगाई और मानवीय सहायता के लिए घटती धनराशि गरीब परिवारों को पौष्टिक भोजन से दूर रख रही है।
ईरान और पाकिस्तान से लौटे 12 लाख से अधिक अफगान नागरिकों ने भी सीमित संसाधनों पर दबाव बढ़ाया है। एफएओ और डब्ल्यूएफपी ने सर्दियां आने से पहले खाद्य सहायता, किसानों को आपातकालीन मदद और कुपोषण की रोकथाम व इलाज के लिए तत्काल संसाधन जुटाने की अपील की है।
अफगानिस्तान में इस साल अच्छी फसल होने के बावजूद भूख और कुपोषण का संकट गहराता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने अपनी नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि आने वाली सर्दियों में अफगानिस्तान की करीब 38 फीसदी आबादी यानी 1.92 करोड़ लोगों को गंभीर खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट में इस बात की भी आशंका जताई गई है कि देश में 2027 तक कुपोषण के मामले बढ़कर करीब 40 लाख तक पहुंच सकते है। चिंता की बात है कि इनमें से करीब एक-चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा रूप ले सकते हैं।
दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा पर नजर रखने वाले प्लैटफॉर्म आईपीसी ने अपने ताजा आकलन में पुष्टि की है कि अफगानिस्तान में 1.59 करोड़ लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिल रहा। वहीं 34 लाख लोगों के लिए तो स्थिति बेहद गंभीर है। इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि आने वाले समय में स्थिति और ज्यादा बदतर हो सकती है।
रिपोर्ट में अंदेशा जताया गया है कि नवंबर 2026 से अप्रैल 2027 के बीच अफगानिस्तान में खाद्य संकट से जूझने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 1.92 करोड़ पर पहुंच सकती है। वहीं एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.74 करोड़ रहने का अनुमान जताया गया था।
इस संकट की सबसे भयावह तस्वीर उन करीब 50 लाख लोगों की है, जिन्हें भूख के सबसे गंभीर स्तरों में से एक, आपातकालीन स्थिति (आईपीसी चरण 4) का सामना करना पड़ सकता है। हैरानी की बात है कि यह संख्या अप्रैल से सितंबर 2026 के लिए लगाए गए अनुमान से दोगुनी है।
ऐसे में इन लोगों को तत्काल भोजन और खेती-बाड़ी के लिए आपातकालीन सहायता की जरूरत है, ताकि भूख से होने वाली मौतों और आजीविका के पूरी तरह बर्बाद होने से बचाया जा सके। यह भी पता चला है कि बदख्शां, बदगीस, दयकुंडी, घोर, समांगन, सर-ए-पुल और गजनी के ग्रामीण हिस्सों में हालात विशेष रूप से गंभीर हो सकते हैं।
अफगानिस्तान में बढ़ते खाद्य संकट के साथ कुपोषण भी गंभीर रूप ले रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ने की आशंका है। अंदेशा है कि 2027 में कुपोषण के मामले 2026 की तुलना में करीब 10 फीसदी बढ़कर 40 लाख तक पहुंच सकते हैं। इनमें करीब 10 लाख मामले गंभीर और जानलेवा हो सकते हैं।
चिंता की बात यह भी है कि भले ही देश में कुपोषण के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन इससे बचाव और इलाज की सुविधाएं जरूरत के मुकाबले काफी पीछे हैं। ऐसे में समय पर पौष्टिक भोजन और उपचार न मिलने से बच्चों की सेहत और जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
रिपोर्ट से पता चला है कि इस संकट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। इस साल ईरान और पाकिस्तान से 12 लाख से अधिक अफगान नागरिकों को अपने देश लौटना पड़ा। इससे पहले से ही सीमित संसाधनों पर जीवन यापन कर रहे समुदायों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। वहीं, सीमा बंद होने और होर्मुज समेत दूसरे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर आपूर्ति बाधित होने से रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं।
इसके साथ ही मानवीय सहायता के लिए मिलने वाली धनराशि में भी भारी कमी आई है। ऐसे समय में, जब जरूरतमंद परिवारों की संख्या बढ़ रही है, राहत पहुंचाने के संसाधन घट रहे हैं। सर्दियों के करीब आने के साथ ये सभी मुश्किलें भूख और कुपोषण के संकट को और गहरा सकती हैं।
यह सही है कि 2026 में बेहतर बारिश से फसलों की पैदावार बढ़ी है और चरागाहों की स्थिति में सुधार हुआ है। इससे कई किसान परिवारों को फायदा मिला। वहीं आने वाले अल नीनो मौसम में भी सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है, जिससे जलस्रोतों को भरने, चरागाहों को बेहतर बनाने और सर्दियों व वसंत की फसलों को सहारा मिलने की उम्मीद है।
लेकिन अच्छी फसल का मतलब यह नहीं कि हर परिवार को भरपेट और पौष्टिक भोजन मिल रहा है। जिन परिवारों के पास अपनी जमीन नहीं है या जो खुद अनाज नहीं उगाते, उनके लिए भोजन खरीदना अब भी मुश्किल है। लगातार बेरोजगारी और कम आमदनी के कारण परिवार बाजार में खाद्य सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद पौष्टिक भोजन नहीं खरीद पा रहे।
ऐसे में जब सर्दियों में खेती-किसानी से जुड़े काम के अवसर भी कम हो जाएंगे। इससे गरीब परिवारों की आमदनी और घट सकती है और उन्हें भोजन के लिए मानवीय सहायता पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है।
किसानों के सामने भी चुनौतियां कम नहीं हैं। खाद, बीज और खेती में इस्तेमाल होने वाली दूसरी जरूरी चीजों की ऊंची कीमतें तथा फसलों के कम दाम छोटे किसानों को कम बुवाई करने या खेती में जरूरी निवेश घटाने के लिए मजबूर कर सकते हैं। इसके अलावा, ज्यादा बारिश से स्थानीय बाढ़, मिट्टी के कटाव, फसलों को नुकसान और पौधों व मवेशियों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
इसलिए केवल अनुकूल मौसम और अच्छी पैदावार के भरोसे अफगानिस्तान में खाद्य संकट से निपटना संभव नहीं है। किसानों को समय पर मदद और गरीब परिवारों को भोजन खरीदने के लिए जरूरी आर्थिक व खाद्य सहायता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
समय की गंभीरता को देखते हुए एफएओ और डब्ल्यूएफपी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल धन मुहैया कराने की अपील की है, ताकि जरूरतमंद परिवारों तक खाद्य सहायता पहुंचाई जा सके और किसानों को खेती के लिए आपातकालीन मदद मिल सके। साथ ही, कुपोषण की रोकथाम, पहचान और इलाज की सुविधाओं को भी बढ़ाने की जरूरत है।
संगठनों का कहना है कि सहायता सर्दियों के कारण रास्ते बंद होने और दुर्गम इलाकों तक पहुंच मुश्किल होने से पहले पहुंचनी चाहिए। किसानों को भी बुवाई के महत्वपूर्ण समय पर मदद मिलना जरूरी है, ताकि वे अगली फसल उगा सकें और अपने परिवारों के लिए भोजन व आमदनी का इंतजाम कर सकें।
अफगानिस्तान में एफएओ के प्रतिनिधि रिचर्ड ट्रेंचर्ड के मुताबिक, इस साल की अच्छी फसल बताती है कि अफगान किसान कितनी क्षमता रखते हैं। लेकिन जिन माता-पिता के पास नियमित आमदनी नहीं है, उनके लिए बाजार में उपलब्ध पौष्टिक भोजन भी बच्चों की पहुंच से बाहर हो सकता है।
उन्होंने कहा कि समय पर और जरूरत के मुताबिक दी गई खाद्य सहायता तथा कृषि के लिए आपातकालीन मदद से खाद्य संकट को कम किया जा सकता है।
बच्चों को कुपोषण का शिकार होने से बचाने के लिए उनके परिवारों को पौष्टिक भोजन उगाने या खरीदने में मदद देना जरूरी है। इसके साथ ही, स्थानीय कृषि कारोबार और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर किसानों को बाजार से जोड़ने और रोजगार के अवसर पैदा करने की जरूरत है।
अफगानिस्तान का संकट बताता है कि सिर्फ अनाज की पैदावार बढ़ना पर्याप्त नहीं है। जब लोगों के पास रोजगार, आमदनी और भोजन खरीदने की क्षमता नहीं होती, तो अच्छी फसल भी भूख नहीं मिटा पाती। ऐसे में सर्दियां आने से पहले समय पर मदद पहुंचाना लाखों लोगों, खासकर बच्चों, को भूख और जानलेवा कुपोषण से बचाने के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।