सिंधु नदी डॉल्फिन को लेकर उठे संकट के सवालों के बीच सरकार रिपोर्ट ने दावा किया है कि यह दुर्लभ जलीय जीव पूरी तरह सुरक्षित है और उसके संरक्षण के लिए सख्त कानूनी तथा प्रशासनिक व्यवस्था लागू है।
मुख्य वन्यजीव वार्डन ने एनजीटी में दाखिल रिपोर्ट में कहा है कि ब्यास नदी के 185 किलोमीटर हिस्से को 2017 में ‘ब्यास कंजर्वेशन रिजर्व’ घोषित कर दिया गया था, जिससे डॉल्फिन के आवास को कानूनी सुरक्षा मिली है।
रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के साथ समन्वय कर नदी में न्यूनतम जल प्रवाह बनाए रखा जा रहा है, ताकि सूखे मौसम में भी डॉल्फिन का जीवन सुरक्षित रहे। साथ ही वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सहयोग से वैज्ञानिक निगरानी और शोध जारी है।
पंजाब में सिंधु नदी डॉल्फिन (इंडस रिवर डॉलफिन) की सुरक्षा को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में चल रही सुनवाई के बीच मुख्य वन्यजीव वार्डन ने दावा किया है कि राज्य में इस दुर्लभ जलीय जीव के संरक्षण के लिए ठोस कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं।
मुख्य वन्यजीव वार्डन द्वारा दाखिल रिपोर्ट में कहा गया है कि, ब्यास नदी के 185 किलोमीटर लंबे हिस्से को 29 अगस्त 2017 में वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के तहत ‘ब्यास कंजर्वेशन रिजर्व’ घोषित किया गया था, जिससे इसके आवास को कानूनी सुरक्षा मिली है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ब्यास नदी में डॉल्फिन का पर्यावास पूरी तरह सुरक्षित है और सरकार इसकी सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है।
यह भी पुष्टि की गई है कि ‘ब्यास कंजर्वेशन रिजर्व’ घोषित किए जाने से नदी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा, संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार हुआ है, जिससे डॉल्फिन के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है।
गौरतलब है कि यह मामला 15 अगस्त 2024 को पर्यावरण वेबसाइट 'मोंगाबे' में छपी एक खबर "इंडस रिवर डॉल्फिंस इन ट्रबल्ड वाटर्स" से जुड़ा है। इस मामले में एनजीटी द्वारा 9 फरवरी, 2026 को दिए निर्देश के बाद यह रिपोर्ट 15 मई 2026 को अदालत में दाखिल की गई। साथ ही, वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में उठाई गई चिंताओं पर भी इसमें जवाब दिया गया है।
मुख्य वन्यजीव वार्डन की रिपोर्ट में कहा गया है कि खबर में सही स्थिति सामने नहीं आती। इसमें राज्य सरकार का आधिकारिक पक्ष शामिल नहीं किया गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खबर में कुछ पहलुओं पर ही प्रकाश डाला गया है, जबकि पंजाब सरकार द्वारा डॉल्फिन संरक्षण के लिए उठाए कड़े संरक्षण उपायों, लगातार निगरानी, वैज्ञानिक प्रयासों और कानूनी कदमों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
ब्यास नदी में डॉल्फिन का पर्यावास पूरी तरह सुरक्षित
रिपोर्ट में ब्यास नदी और डॉल्फिन के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों का ब्यौरा दिया गया है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत 29 अगस्त 2017 को ही ब्यास नदी के 185 किलोमीटर लंबे हिस्से (तलवाड़ा हेड से हरीके बैराज तक) को 'ब्यास संरक्षण रिजर्व' घोषित कर दिया गया। यह इस पूरे नदी तंत्र को मजबूत कानूनी सुरक्षा देता है।
पंजाब के मुख्य वन्यजीव वार्डन ने रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी है कि पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने के लिए भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड और पंजाब जल संसाधन विभाग के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। इसका मकसद पोंग डैम से पानी का वैज्ञानिक तरीके से प्रवाह सुनिश्चित करना है, ताकि सूखे दिनों में भी ब्यास नदी में न्यूनतम जरूरी जल प्रवाह और पर्याप्त जलस्तर बना रहे।
इससे नदी की जलीय जैव विविधता सुरक्षित रहेगी और डॉल्फिन समेत अन्य जलीय जीवों के संरक्षण में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही प्राधिकरण ने वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया जैसी संस्थाओं के साथ तकनीकी सहयोग का भी उल्लेख किया है। इसका उद्देश्य डॉल्फिन के आवास का बेहतर प्रबंधन, वैज्ञानिक निगरानी और तथ्यों पर आधारित संरक्षण योजना तैयार करना है।
इसके तहत लगातार अध्ययन, रिसर्च, फील्ड सर्वे और तकनीकी मूल्यांकन किए जा रहे हैं। इन सहयोगों से नदी की पर्यावरणीय स्थिति की समय-समय पर समीक्षा होती है, खतरों की पहचान की जाती है और संरक्षण के लिए जरूरी कदम तय किए जाते हैं।
ब्यास नदी में खनन माफिया पर कड़ा पहरा
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तलवाड़ा हेड से हरीके बैराज तक संरक्षित क्षेत्र में किसी भी ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं है, जिससे नदी पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचे। खासतौर पर व्यावसायिक और मशीनों से होने वाली रेत खनन पर पूरी तरह रोक है।
मुख्य वन्यजीव संरक्षक का कहना है नदी पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाने वाली अवैध गतिविधियों के खिलाफ राज्य सरकार ने “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई है। उनका दावा है कि ब्यास नदी में डॉल्फिन संरक्षण के लिए निगरानी और कार्रवाई लगातार जारी है।