ओडिशा के बालासोर जिले में बचाए गए पांच छोटे ओरांग उटान कुछ समय तक इंसानों के संपर्क में रहे होंगे, ऐसा वन अधिकारियों का कहना है।
तीन नर और दो मादा ओरांग उटान, जिनकी उम्र करीब छह से आठ महीने है, 9 सितंबर को उदयपुर-तलसारी सीमा के पास काजुरिना के बागान में लावारिस हालत में मिले।
अधिकारियों को आशंका है कि गंभीर रूप से संकटग्रस्त ये वन्यजीव तस्करी के किसी मामले का हिस्सा हो सकते हैं। इसकी जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और संभावित तस्करी मार्गों की पड़ताल की जा रही है।
ओरांग उटान को एकांतवास और पुनर्वास के लिए नंदनकानन प्राणी उद्यान भेज दिया गया है। सीआईटीईएस के नियमों के तहत उन्हें उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है।
ओडिशा के बालासोर जिले के बदापाई गांव से बचाए गए पांच ओरांग उटान के व्यवहार से संकेत मिलता है कि वे कुछ समय तक इंसानों के संपर्क में रहे होंगे। वन अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।
क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक प्रकाश चंद्र गोगिनेनी ने डाउन टू अर्थ को बताया कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि केवल इंडोनेशिया व मलेशिया में पाए जाने वाले ये ओरांग उटान को जंगल से पकड़ा गया था या उन्हें कैद में पाला गया था।
उन्होंने कहा, “इंसानों के साथ उनका व्यवहार और इंसानों की गतिविधियों को समझकर उस पर प्रतिक्रिया देने की उनकी क्षमता बताती है कि वे इंसानों के अभ्यस्त हैं और कुछ समय उनके साथ रहे हैं।”
बोर्नियन ओरांग उटान केवल बोर्नियो द्वीप पर पाया जाता है और इसे प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) ने गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति की सूची में रखा है।
वन सुरक्षा समिति के सदस्यों ने 9 सितंबर 2026 की सुबह बालासोर के भोगराई क्षेत्र में उदयपुर-तलसारी सीमा के पास काजुरिना के पेड़ों के एक बागान में खुले स्थान पर इन जानवरों को देखा। अधिकारियों के अनुसार, पांचों छोटे ओरांग उटान तीन नर और दो मादा हैं और उनकी उम्र एक साल से भी कम उम्र की है और उन्हें वहां छोड़ दिया गया था।
ग्रामीणों ने सबसे पहले इन जानवरों को “बंदर” समझकर देखा और पास में गश्त कर रहे वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। बालासोर के प्रभागीय वन अधिकारी प्रतीक प्रकाश इंदलकर ने डाउन टू अर्थ को बताया कि इन ओरांग उटान की उम्र करीब छह से आठ महीने है और वे वन विभाग के कर्मचारियों के साथ सहज थे।
उन्होंने कहा, “वे डरे हुए या तनाव में नहीं थे और पूरी तरह स्वस्थ हालत में थे।”
अधिकारियों को आशंका है कि ये जानवर सीधे जंगल से नहीं आए होंगे। इंदलकर के अनुसार, मादा ओरांग उटान आमतौर पर एक बार में केवल एक बच्चे को जन्म देती है। इसलिए एक साथ पांच छोटे ओरांग उटान का मिलना असामान्य है।
उन्होंने बताया कि इनकी स्वस्थ हालत और यह तथ्य कि स्थानीय कुत्तों या सियारों ने उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया, इस बात का संकेत देते हैं कि इन्हें शायद उसी रात या इन्हें सुबह करीब 6:15 बजे पाए जाने से कुछ घंटे पहले वहां छोड़ा गया।
तस्करी की आशंका
इस घटना के बाद इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। साथ ही गश्त बढ़ा दी गई है, ताकि किसी संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया जा सके और यह भी जांच हो सके कि कहीं अन्य विदेशी वन्यजीवों को भी यहां लाकर तो नहीं छोड़ा गया।
अधिकारियों को आशंका है कि ये ओरांग उटान वन्यजीवों की तस्करी के किसी गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं।
गोगिनेनी ने बताया कि वन विभाग पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी पर नजर रखने के लिए गश्त और जांच कर रहा था। उनके मुताबिक, तस्कर घबरा गए होंगे और उन्होंने इन जानवरों को वहीं छोड़ दिया होगा।
उन्होंने कहा, “हमें यह जांच करनी होगी कि यह पहले से तय योजना के तहत किया गया था या तस्करों को पकड़े जाने का डर था।”
अधिकारी इस संभावना की भी जांच कर रहे हैं कि किसी सौदे के विफल होने के बाद इन ओरांग उटान को यहां छोड़ दिया गया हो।
इंदलकर ने बताया कि ओडिशा पश्चिम बंगाल को दक्षिण भारत से जोड़ने वाले तस्करी के रास्ते के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में बंदरगाह और हवाई अड्डा भी है। इनकी उम्र और आकार को देखते हुए इन्हें बिना किसी बड़े बक्से के आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।”
उन्होंने बताया कि घने जंगलों से होकर गुजरने वाले 40 से 45 छोटे रास्ते भी हैं। आशंका है कि इनका इस्तेमाल संदिग्ध लोगों ने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से बचने के लिए किया हो। उन्होंने कहा, “हम संदिग्ध वाहन की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं।”
एकांतवास और स्वदेश वापसी
इन ओरांग उटान को पशु चिकित्सकों और वैज्ञानिकों की निगरानी में पुनर्वास और एकांतवास के लिए नंदनकानन प्राणी उद्यान भेज दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर समझौते यानी सीआईटीईएस के नियमों के तहत इन ओरांग उटान को उनके मूल देश वापस भेजना होगा।
इंदलकर ने कहा कि यह पता लगाना मुश्किल होगा कि इन ओरांग उटान को जंगल से पकड़ा गया था या किसी दूसरे देश में कैद में पाला गया था।
उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकार इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।