वियतनाम में खोजी गई हाफ लीफ-फिंगर्ड गेको की नई प्रजाति 'हेमिफिलोडैक्टाइलस जिग्लेरी'; फोटो: एन वान फाम 
वन्य जीव एवं जैव विविधता

जैव विविधता में इजाफा: हाफ लीफ-फिंगर्ड गेको की दो नई प्रजातियां आई सामने

डीएनए शोध ने जंगलों की छिपी दुनिया का खुलासा किया है, वियतनाम में हाफ लीफ-फिंगर्ड गेको की नई प्रजातियां खोजी गई हैं

Lalit Maurya

  • वियतनाम के घने जंगलों से आई यह खोज विज्ञान और प्रकृति दोनों के लिए बड़ी उपलब्धि है, जहां हाफ लीफ-फिंगर्ड गेको की दो नई प्रजातियां सामने आई हैं।

  • आधुनिक डीएनए तकनीक ने यह साबित कर दिया है कि धरती पर जैव विविधता का विशाल संसार अभी भी हमारी नजरों से छिपा हुआ है।

  • हालांकि, इन दुर्लभ प्रजातियों का सीमित और तेजी से घटता प्राकृतिक आवास इस खोज को एक गंभीर चेतावनी में बदल देता है, अगर जंगलों का संरक्षण नहीं हुआ, तो कई अनमोल जीव दुनिया के सामने आने से पहले ही विलुप्त हो सकते हैं।

प्रकृति के रहस्यमय संसार से एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। वियतनाम के घने जंगलों में वैज्ञानिकों ने हाफ लीफ-फिंगर्ड गेको (छिपकली की एक दुर्लभ प्रजाति) की दो नई प्रजातियों की खोज की है। इनमें से एक नई प्रजाति का नाम दुनिया के प्रसिद्ध सरीसृप वैज्ञानिक प्रोफेसर डॉक्टर थॉमस जिगलर के सम्मान में रखा गया है।

हाफ लीफ-फिंगर्ड गेको बेहद छोटे, छिपकर रहने वाले जीव होते हैं, इसलिए लंबे समय तक इनकी कई प्रजातियां वैज्ञानिकों की नजर से दूर रहीं।

लेकिन हाल के वर्षों में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, खासतौर पर डीएनए और शारीरिक संरचना के अध्ययन की मदद से इनकी छिपी दुनिया धीरे-धीरे सामने आ रही है। बता दें कि हाफ लीफ-फिंगर्ड गेको (हेमिफिलोडैक्टाइलस) छिपकलियों का एक बड़ा और विविध समूह है। पिछले दस वर्षों में ही इस समूह की 60 से अधिक नई प्रजातियां खोजी जा चुकी हैं।

ये प्रजातियां दक्षिण भारत और श्रीलंका से लेकर इंडोचीन, दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र तक पाई जाती हैं।

डीएनए तकनीक से खुली नई दुनिया

वियतनाम अब इन नई प्रजातियों की खोज का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। हाल ही में वैज्ञानिक पत्रिका जूकीज में प्रकाशित शोध के अनुसार, नई प्रजाति 'हेमिफिलोडैक्टाइलस जिग्लेरी' उत्तर-पश्चिम वियतनाम के कोपिया नेचर रिजर्व में पाई गई है।

यह प्रजाति फिलहाल दुनिया में सिर्फ इसी छोटे से संरक्षित क्षेत्र में पाई गई है, जिसका क्षेत्रफल 50 वर्ग किलोमीटर से भी कम है। चिंता की बात यह है कि सड़क निर्माण और पेड़ों की कटाई के कारण यहां का प्राकृतिक आवास तेजी से नष्ट हो रहा है।

वयस्क नर 'हेमिफिलोडैक्टाइलस पाखाएंसिस'; फोटो: हा एचबी एट ऑल., 2026

इस नई प्रजाति का नाम प्रोफेसर डॉक्टर थॉमस जिगलर के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक छिपकलियों, सांपों, कछुओं, मेंढकों और अन्य जीवों पर शोध कर जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने वियतनाम की कई लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने के लिए भी अहम काम किया है।

धरती पर अभी भी छिपे हैं कई रहस्य

इस नई प्रजाति 'हेमिफिलोडैक्टाइलस जिग्लेरी' के साथ ही इस क्षेत्र में रहने वाली एक और नई प्रजाति 'हेमिफिलोडैक्टाइलस पाखाएंसिस' (सोन ला प्रांत) की जानकारी भी वैज्ञानिक पत्रिका जूकीज में दी गई है।

इन नई खोजों के बाद अब इस समूह की कुल प्रजातियों की संख्या 12 हो गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि चूना-पत्थर (कार्स्ट) वाले पहाड़ी इलाकों में अभी भी कई ऐसी प्रजातियां छिपी हो सकती हैं, जिन्हें दुनिया ने अब तक नहीं देखा है।

इन नई खोजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हमारी धरती पर प्रकृति के अनगिनत रहस्य अभी भी बाकी हैं, बस उन्हें खोजने और बचाने की जरूरत है।

देखा जाए तो यह खोज सिर्फ एक नई प्रजाति के मिलने की खबर नहीं है, बल्कि यह प्रकृति को बचाने की एक चेतावनी भी है। अगर जंगल और प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहेंगे, तभी ऐसी अनमोल प्रजातियां और हमारी जैव विविधता बच पाएगी।