पश्चिमी घाट के नेल्लई वन्यजीव अभयारण्य में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों ने दुर्लभ पौधे की नई प्रजाति खोजी। प्रतीकात्मक छवि, साभार आईस्टॉक
वन्य जीव एवं जैव विविधता

पश्चिमी घाट में मिला पौधों का नया खजाना, तमिलनाडु के नाम पर रखा गया नाम

नेल्लई वन्यजीव अभयारण्य में नई वनस्पति प्रजाति की खोज, 50 से अधिक फूलदार पौधे मिले; पश्चिमी घाट की जैव विविधता को मिली नई पहचान।

Dayanidhi

  • पश्चिमी घाट के नेल्लई वन्यजीव अभयारण्य में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों ने दुर्लभ पौधे की नई प्रजाति खोजी।

  • नई वनस्पति प्रजाति का नाम सेरोपेजिया तमिलनाडुएन्सिस रखा गया, जो तमिलनाडु की समृद्ध प्राकृतिक विरासत को दर्शाता है।

  • गहरे भूरा-बैंगनी फूल, सफेद रंग की झलक, बिना बालों वाली कोरोना और बड़े बीज इसे विशिष्ट बनाते हैं।

  • वैज्ञानिकों ने लगभग 380 मीटर ऊंचाई पर सदाबहार जंगल के पास 50 से अधिक फूलदार पौधे देखे।

  • नई प्रजाति को फिलहाल ‘डेटा डेफिशिएंट’ श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि इसकी आबादी और भौगोलिक विस्तार की जानकारी सीमित

प्रकृति की गोद में छिपे रहस्यों को उजागर करते हुए भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) के वैज्ञानिकों ने पश्चिमी घाट की पहाड़ियों में एक नई पौध प्रजाति की खोज की है। इस नई प्रजाति का नाम सेरोपेजिया तमिलनाडुएन्सिस रखा गया है। यह खोज तमिलनाडु के नेल्लई वन्यजीव अभयारण्य में की गई, जहां हरी-भरी पहाड़ियों, घास के मैदानों और सदाबहार जंगलों के बीच यह अनोखा पौधा मिला। यह शोध 'क्यू बुलेटिन' नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

नियमित सर्वेक्षण में मिली बड़ी सफलता

भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण की वार्षिक अनुसंधान योजना के तहत वैज्ञानिकों की टीम क्षेत्र में पौधों की विविधता का अध्ययन कर रही थी। इसी दौरान शोधकर्ताओं की नजर इस अनोखे पौधे पर पड़ी। टीम ने इसके ताजे नमूनों का बारीकी से निरीक्षण किया। इसके लिए स्टीरियो माइक्रोस्कोप और प्रत्यक्ष क्षेत्रीय अवलोकन की मदद ली गई।

वैज्ञानिकों ने केवल पौधे को देखकर ही निष्कर्ष नहीं निकाला, बल्कि इसके नमूनों की तुलना पुराने हर्बेरियम रिकॉर्ड और दुनिया भर में प्रकाशित वनस्पति संबंधी शोध साहित्य से भी की। विस्तृत अध्ययन के बाद इसे एक नई प्रजाति के रूप में वर्णित किया गया।

फूलों का अनोखा रंग और बड़े बीज हैं खास पहचान

यह एक बहुवर्षीय शाकीय पौधा है, जो लगभग 380 मीटर की ऊंचाई पर एक पहाड़ी ढलान में, जलधारा के पास सदाबहार जंगलों के बीच पाया गया। इसकी बनावट में कुछ समानताएं पहले से ज्ञात सेरोपेजिया स्वरूपा और सेरोपेजिया अन्नामाचर्ये प्रजातियों से मिलती हैं, लेकिन इसके कई गुण इसे अलग पहचान देते हैं।

इस पौधे के फूल पत्तियों के जोड़ से अकेले निकलते हैं और इनके डंठल नीचे की ओर झुके रहते हैं। इसके फूलों का रंग गहरा भूरा-बैंगनी है, जिसमें सफेद रंग की झलक भी दिखाई देती है। फूल के भीतर मौजूद कोरोना नामक संरचना पर बाल नहीं होते। इसके अलावा, इसके बीज लगभग 14 मिलीमीटर तक लंबे हो सकते हैं, जो इसकी एक प्रमुख विशेषता है।

तमिलनाडु के नाम पर मिला वैज्ञानिक परिचय

नई प्रजाति का नाम उस राज्य के सम्मान में रखा गया है, जहां इसके मूल नमूने मिले। इस तरह सेरोपेजिया तमिलनाडुएन्सिस का नामकरण तमिलनाडु की प्राकृतिक विरासत को भी पहचान देता है।

संरक्षण के लिए आगे के अध्ययन जरूरी

शोधकर्ताओं ने अभयारण्य में इस पौधे के 50 से अधिक फूलदार नमूने देखे। हालांकि अभी इसकी वास्तविक भौगोलिक सीमा और कुल आबादी के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) के दिशा-निर्देशों के अनुसार इसकी संरक्षण स्थिति फिलहाल ‘डेटा डेफिशिएंट’ यानी ‘आंकड़ों की कमी’ वाली श्रेणी में रखी गई है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि आगे के सर्वेक्षणों से इस पौधे के फैलाव, आबादी और संभावित खतरों की बेहतर जानकारी मिलेगी। यह खोज एक बार फिर साबित करती है कि पश्चिमी घाट जैसे जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र आज भी प्रकृति के अनगिनत रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए हैं।