तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में बहुत भारी बारिश होने का अंदेशा जताया गया है।
कई इलाकों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने के भी आसार हैं।
देशभर में सबसे अधिक, गुजरात के राजकोट में अधिकतम तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
17 और 18 अक्टूबर को जम्मू और कश्मीर, लद्दाख तथा उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।
किसानों को भारी बारिश के मद्देनजर खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें और कटी फसल को सुरक्षित जगहों पर रखने की सलाह।
दक्षिण भारत के राज्यों में बारिश का दौर तेज रहने के आसार हैं, वहीं उत्तर भारत के कुछ पहाड़ी इलाकों में भी बारिश दस्तक दे सकती है। मौसम विभाग की ओर से आज, 17 अक्टूबर, 2026 की सुबह जारी पूर्वानुमान के अनुसार, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है।
आंध्र प्रदेश, तटीय कर्नाटक और केरल में भी भारी बारिश का अनुमान है। विभाग के अनुसार, दक्षिण भारत में भारी बारिश और गरज-चमक की वजह ऊपरी हवा में बना चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ है।
दक्षिण भारत में बारिश का जोर
दक्षिण भारत के राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम सक्रिय बना रह सकता है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के साथ दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई है। मौसम विभाग ने इन सभी राज्यों में बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां 115.6 से 204.4 मिमी तक बरस सकते हैं बादल।
वहीं आज, आंध्र प्रदेश, तटीय कर्नाटक तथा केरल और माहे में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है। इन राज्यों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां 64.5 से 115.5 मिमी तक बारिश हो सकती है। लगातार बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने और खेतों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
वहीं आज, बारिश के साथ-साथ आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं, आंतरिक कर्नाटक, केरल, माहे और तेलंगाना में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है। ऐसे मौसम में लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
कई राज्यों में गरज-चमक और वज्रपात का खतरा
बारिश के साथ देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में भी मौसम में हलचल देखने को मिल सकती है। छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र तथा मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में बिजली चमकने और गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। तटीय कर्नाटक में भी वज्रपात की आशंका जताई गई है। आंध्र प्रदेश में कुछ हिस्सों में तेज सतही हवाएं चल सकती हैं।
बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में रुकने, पेड़ों के नीचे शरण लेने और खेतों में काम जारी रखने से बचना चाहिए। मौसम खराब होने पर सुरक्षित पक्के भवन में ठहरना बेहतर रहेगा।
पहाड़ों में भी बदल सकता है मौसम
उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ का असर बना हुआ है। पंजाब और आसपास के इलाकों में ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में पश्चिमी विक्षोभ मौजूद है। इसके प्रभाव से 17 और 18 अक्टूबर को जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो सकती है। वहीं 17 और 18 अक्टूबर के दौरान उत्तराखंड में और 17 अक्टूबर को पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश का पूर्वानुमान लगाया गया है।
तापमान में भी दिख रहा उतार-चढ़ाव
देश के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है। विदर्भ में अधिकतम तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। असम और मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश और मध्य महाराष्ट्र में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा।
16 अक्टूबर, 2026 को गुजरात के राजकोट में देश का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, मैदानी इलाकों में हिमाचल प्रदेश के मंडी में सबसे कम न्यूनतम तापमान 13.2 डिग्री सेल्सियस रहा।
कहां कितने बरसे बादल?
मौसम विभाग के बारिश के आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण भारत के कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। केरल के कन्नूर में 150 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। पुडुचेरी में 100 मिमी और चेन्नई के नुंगमबक्कम इलाके में 70 मिमी बारिश दर्ज हुई। तटीय कर्नाटक के मंगलुरु स्थित बाजपे में भी 70 मिमी वर्षा हुई।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
भारी बारिश की आशंका को देखते हुए किसानों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। तमिलनाडु में धान की नर्सरी और खड़ी फसलों से अतिरिक्त पानी निकालने तथा कटी हुई उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। केले और गन्ने के पौधों को सहारा देना भी जरूरी है।
केरल में पकी धान की फसल को मौसम साफ रहने पर काटकर सूखी और सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए। कर्नाटक में खेतों में जलनिकासी की उचित व्यवस्था करने और तैयार मूंग, उड़द तथा सोयाबीन की फसल को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भी खेतों तथा बागों से अतिरिक्त पानी निकालना जरूरी है।
देश के दक्षिणी हिस्सों में बारिश का असर अधिक रहने की संभावना है, जबकि उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी मौसम बदल सकता है। लोगों और किसानों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए और उसी के अनुसार अपनी गतिविधियों की योजना बनानी चाहिए।