आज, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है।  फोटो: डीएनएम
मौसम

मौसम का बदला मिजाज: कहीं ओलों की मार, कहीं बारिश की फुहार; किसानों को सतर्क रहने की सलाह

उत्तर भारत में बारिश, आंधी, बिजली और ओलावृष्टि का खतरा, दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून की दस्तक की संभावना; कुछ राज्यों में गर्मी व उमस भी करेगी परेशान

Dayanidhi

  • उत्तर भारत में मौसम का कहर: दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पहाड़ी राज्यों में आंधी, ओलावृष्टि और भारी बारिश की चेतावनी।

  • दक्षिण भारत में मानसून की आहट: तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी बारिश के आसार, अगले दो दिनों में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय होने की संभावना।

  • तेज हवाओं से नुकसान का खतरा: कई राज्यों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अंदेशा।

  • गर्मी और उमस से राहत नहीं: तटीय कर्नाटक, कोंकण-गोवा समेत कई इलाकों में तापमान सामान्य से काफी अधिक, उमस बढ़ने की आशंका।

  • किसानों को सतर्क रहने की सलाह: खेतों में जल निकासी दुरुस्त रखें, पकी फसलें सुरक्षित करें और कटाई मौसम साफ रहने पर करें।

देश में मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। कहीं आसमान से बारिश की बूंदें राहत लेकर आएंगी, तो कहीं तेज हवाएं, गरजते बादल और ओले लोगों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से 14 अक्टूबर, 2026 की सुबह जारी पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर भारत के कई राज्यों में आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की आशंका है। वहीं, दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश शुरू होने के लिए मौसम अनुकूल होता जा रहा है। किसानों से लेकर आम लोगों तक, सभी को मौसम के इस बदलते रंग को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।

इस बदलते मौसम के पीछे देश के कई हिस्सों में सक्रिय ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण और पश्चिमी विक्षोभ जैसी मौसमी प्रणालियां हैं। उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऊपरी वायुमंडल में पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में बना हुआ है। वहीं, उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू के इलाकों के ऊपर भी एक और पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में सक्रिय है, साथ ही एक ट्रफ भी जारी है। इन मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है।

उत्तर भारत में बारिश, आंधी और ओलों का खतरा

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 14 अक्टूबर, 2026 को जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मौसम अचानक बिगड़ सकता है। इन राज्यों में गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है। वहीं आज, जम्मू और कश्मीर तथा आसपास के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है। इन राज्यों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां 64.5 से 155.5 मिमी तक बारिश हो सकती है।

वहीं आज, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के भी आसार जताए गए हैं। जबकि राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।

दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून की नई दस्तक

देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो दिनों के दौरान देश के बाकी हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। इसी दौरान दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश शुरू होने का पूर्वानुमान है।

वहीं आज, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों में गरज-चमक और बिजली गिरने का भी अंदेशा जताया गया है। केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी वज्रपात के साथ तूफानी मौसम देखने को मिल सकता है।

आंध्र प्रदेश और ओडिशा में गरज-चमक के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के आसार हैं। आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज सतही हवाएं भी परेशानी बढ़ा सकती हैं। ऐसे में लोगों को खुले स्थानों और कमजोर ढांचों के आसपास सावधानी बरतनी चाहिए।

कहीं उमस, कहीं सामान्य से ज्यादा गर्मी

देश के कई इलाकों में बारिश और आंधी के आसार के बीच गर्मी का असर भी बना हुआ है। तटीय कर्नाटक में अधिकतम तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक दर्ज किया जा रहा है। वहीं, असम और मेघालय, कोंकण और गोवा, विदर्भ, तेलंगाना तथा केरल के कुछ इलाकों में भी अधिकतम तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस, यानी काफी ऊपर रहा है।

तटीय कर्नाटक और कोंकण-गोवा के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम लोगों को परेशान कर सकता है। दूसरी ओर, कुछ राज्यों में रात का तापमान भी सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, 13 अक्टूबर को गुजरात के डीसा में देश का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मैदानी इलाकों में हिमाचल प्रदेश के मंडी में सबसे कम न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस रहा।

किसानों और आम लोगों के लिए सलाह

मौसम विभाग ने बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा पर ध्यान देने का सुझाव दिया है। ऐसे मौसम में पेड़ों की डालियां टूटने, बड़े पेड़ों के उखड़ने और बिजली व संचार की लाइनों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहेगा। ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलों, बागवानी और फलों के पौधों को नुकसान हो सकता है। केले और पपीते जैसे पौधों पर तेज हवाओं और ओलों की मार पड़ने की आशंका है। कमजोर मकानों, कच्ची दीवारों और झोपड़ियों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

जम्मू और कश्मीर में खेतों से पानी निकासी की उचित व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया है। पकी फसलों की कटाई मौसम साफ रहने पर करें और उपज को सुरक्षित स्थान पर रखें। तमिलनाडु में धान, कपास, मक्का, मूंगफली और सब्जियों के खेतों में जल निकासी का इंतजाम दुरुस्त रखें। आंधी, बिजली और ओलावृष्टि के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। तेज हवाओं में कमजोर मकानों से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

कुल मिलाकर, देश में मौसम के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। उत्तर भारत में आंधी और ओलों की चुनौती है, जबकि दक्षिण भारत मानसून के एक नए दौर की तैयारी कर रहा है। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी लोगों की सुरक्षा और किसानों की मेहनत, दोनों को बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।