पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती प्रसार से देशभर में मौसम बदला, कई राज्यों में बारिश, तेज हवाएं, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का अंदेशा।
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश और बर्फबारी, जबकि मैदानी इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी।
दिल्ली सहित आसपास के इलाकों में हल्की बारिश, तेज हवाएं और तापमान में गिरावट, जिससे मौसम सुहावना लेकिन अस्थिर बना हुआ।
ओलावृष्टि से गेहूं, फल और सब्जियों की फसलों को नुकसान की आशंका, किसानों को सावधानी बरतने और फसल सुरक्षा के उपाय जरूरी।
मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी, वज्रपात, आंधी-तूफान के दौरान घर में रहें और खुले स्थानों से दूरी बनाए रखने की सलाह।
भारत में इन दिनों मौसम ने उल्टा रुख अपना लिया है। इसके पीछे के मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ व देश के विभिन्न हिस्सों में जारी ऊपरी हवाओं का चक्रवाती प्रसार को माना जा रहा है। मौसम विभाग ने आज सुबह, यानी 19 मार्च, 2026 को जारी ताजा अपडेट में कहा है कि पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान और उसके आसपास के इलाकों में सक्रिय है और इसका प्रभाव पूरे उत्तर भारत सहित देश के कई इलाकों में देखा जा रहा है। इसके कारण बारिश, बर्फबारी, तेज हवाएं और आंधी-तूफान व ओले गिरने जैसी स्थितियां बन रही हैं।
उत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम?
उत्तर भारत के कई राज्यों में इस समय मौसम खराब बना हुआ है। जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश और ऊंचाई वाले हिस्सों में बर्फबारी का दौर जारी है। यहां तेज हवाएं भी चल रही हैं और कई जगहों पर ओलावृष्टि का अंदेशा भी जताया गया है। इन राज्यों में 64.5 से 115.5 मिमी तक बरस सकते हैं बादल। विभाग ने यहां बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
मैदानी इलाकों जैसे पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। इसके साथ ही वज्रपात होने तथा तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
दिल्ली में मौसम में बदलाव साफ देखा जा रहा है। आसमान में बादल छाए हुए हैं और हल्की बारिश का दौर जारी है। तापमान भी सामान्य से थोड़ा कम हो सकता है। दिन का अधिकतम तापमान लगभग 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। शाम और रात के समय मौसम ठंडा महसूस हो सकता है। इस मौसमीय प्रणाली के कारण कई जगहों पर तेज हवाएं चल सकती हैं। हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
इस समय कई राज्यों में ओलावृष्टि के आसार भी बने हुए हैं। जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में ओले गिर सकते हैं। ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हो सकता है। खासकर गेहूं, सब्जियां और फलों की फसलें प्रभावित हो सकती हैं।
मध्य और पूर्वी भारत में मौसम का मिजाज
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में भी मौसम का असर देखा जा रहा है। यहां हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। कुछ जगहों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है। इसलिए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
दक्षिण भारत में मौसम
दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी मौसम में बदलाव हो रहा है। केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में हल्की बारिश और गरज-चमक देखी जा सकती है। यहां भारी बारिश का पूर्वानुमान नहीं है, लेकिन बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। इसलिए खुले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए।
पूर्वोत्तर भारत में बारिश-बौछारें
पूर्वोत्तर भारत में अगले कुछ दिनों तक बारिश के जारी रहने की संभावना है। यहां गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश और वज्रपात होने के आसार हैं। इन राज्यों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिससे मौसम ठंडा और नम बना रहेगा।
तापमान में उतार-चढ़ाव
बारिश, आंधी-तूफान व ओले गिरने से देशभर में तापमान में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान पहले थोड़ा स्थिर रहेगा, लेकिन उसके बाद पांच से सात डिग्री तक गिर सकता है। मध्य भारत में भी तापमान में हल्की गिरावट देखी जा सकती है। वहीं कुछ दिनों बाद फिर से तापमान बढ़ने के आसार हैं।
देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान की बात करें तो कल, 18 मार्च, 2026 को उत्तर प्रदेश के बांदा में अधिकतम तापमान 39.6 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि कल, देश के मैदानी इलाकों में पंजाब के फरीदकोट में न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
किसानों के लिए सलाह
किसानों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ओलावृष्टि और तेज हवाओं से फसलों को नुकसान हो सकता है। इसलिए उन्हें कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। फल और सब्जियों की फसलों को बचाने के लिए जाल या ढकने का उपयोग करना चाहिए। खेतों में पानी का सही निकास सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
आम लोगों के लिए सुझाव
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह देते हुए कहा है कि वज्रपात के समय पेड़ों के नीचे खड़े न हों और खुले स्थानों से दूर रहें। बिजली गिरने के खतरे के कारण मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सावधानी से उपयोग करें। अगर जरूरी न हो तो खराब मौसम में यात्रा करने से बचें। सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं और दृश्यता कम हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करते समय विशेष सावधानी रखें क्योंकि वहां भूस्खलन (लैंडस्लाइड) का खतरा भी हो सकता है।
कुल मिलाकर, पश्चिमी विक्षोभ और देश के अलग-अलग हिस्सों में जारी चक्रवाती प्रसार के कारण देश के कई हिस्सों में मौसम अस्थिर बना हुआ है। बारिश, बर्फबारी, तेज हवाएं और ओलावृष्टि जैसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं।
लोगों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम की जानकारी पर ध्यान दें और आवश्यक सावधानियां बरतें। सही समय पर सतर्क रहने से किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सकता है।