पश्चिमी विक्षोभ के कारण जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बारिश, बर्फबारी व ओलावृष्टि की आशंका
30 जनवरी की रात से नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में फिर मौसम सक्रिय कर सकता है जिससे प्रभाव और बढ़ेगा
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व चंडीगढ़ में गरज-चमक, तेज हवाएं, बारिश और शीतलहर का खतरा
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में कहीं-कहीं गरज के साथ बारिश व बिजली गिरने के आसार
दक्षिण भारत व समुद्री इलाकों में तेज हवाएं, ऊंची लहरें, मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में इन दिनों मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां मौसम काफी सक्रिय बना हुआ है। यहां भारी बारिश व जमकर बर्फबारी जारी है। इसका मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ है, जो ऊपरी वायुमंडल में पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली हवाओं के साथ भारत को प्रभावित करता है। वर्तमान समय में एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत पर बना हुआ है और इसके साथ ही एक और नया पश्चिमी विक्षोभ 30 जनवरी, 2026 की रात से उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम में फिर से बदलाव कर सकता है।
मौसम विभाग के द्वारा आज सुबह, 27 जनवरी, 2026 को जारी बुलेटिन में कहा गया है कि पश्चिमी विक्षोभ सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत में बारिश और पहाड़ों में बर्फबारी के लिए जिम्मेवार है। यह गतिविधि मध्य और ऊपरी वायुमंडल में सक्रिय होती है। अभी जो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, वह लगभग 5.8 किमी की ऊंचाई पर मौजूद है और इसके कारण हवाओं में तेजी देखी जा रही है। इसके साथ ही निचले स्तरों पर भी पश्चिमी हवाओं का एक और ट्रफ बना हुआ है।
हरियाणा और उसके आसपास के इलाकों में एक प्रेरित चक्रवाती प्रसार बना हुआ है, जो मौसम को और अधिक अस्थिर बना रहा है। इस गतिविधि से एक ट्रफ दक्षिण-पश्चिम राजस्थान तक फैला हुआ है, जिससे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी बारिश और आंधी-तूफान का अंदेशा बढ़ गया है।
उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम का असर
उत्तर भारत के ऊपर उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम बहुत तेज गति से बह रही है। इसकी हवा की रफ्तार 125 नॉट तक पहुंच रही है। यह जेट स्ट्रीम पश्चिमी विक्षोभ को मजबूत बनाए रखने में मदद करती है। इसके कारण मौसमी गतिविधि ज्यादा प्रभावी हो जाती है और बारिश, बर्फबारी तथा तेज हवाओं के आसार बढ़ जाते हैं।
हिमालयी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी
पश्चिमी हिमालयी इलाकों जैसे जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी होने का पूर्वानुमान है। कई इलाकों में भारी बारिश व जमकर बर्फबारी हो सकती है। पहाड़ी इलाकों में कहीं-कहीं गरज के साथ ओलावृष्टि भी होने का अंदेशा जताया गया है। हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में शीत दिवस की स्थिति बन सकती है, जहां दिन का तापमान सामान्य से काफी कम रहेगा।
उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में कैसा रहेगा मौसम?
विभाग की मानें तो पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में गरज के साथ बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका है। कुछ हिस्सों में हवा की गति 40 से 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं, हालांकि यहां हवा की रफ्तार थोड़ी कम यानी 30 से 40 किमी प्रति घंटे रहने का पूर्वानुमान है।
इन क्षेत्रों में ठंड का असर भी बना रहेगा। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली में कहीं-कहीं शीतलहर चलने की आशंका जताई गई है, जिससे लोगों को सुबह और रात के समय ज्यादा ठंड महसूस होगी।
मध्य भारत में मौसम का हाल
मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी मौसम पूरी तरह शांत नहीं रहेगा। इन इलाकों में कहीं-कहीं गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी गरज के साथ बारिश हो सकती है। इससे तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।
दक्षिण भारत और समुद्री इलाकों में मौसम का मिजाज
दक्षिण भारत में केरल तट के पास अरब सागर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में एक कमजोर उत्तर-दक्षिण ट्रफ बना हुआ है। इसके कारण तमिलनाडु में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
वहीं, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और दक्षिण तमिलनाडु तथा श्रीलंका के तटों के पास मौसम समुद्र में खराब रह सकता है। यहां 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं में और इजाफा होकर इनके 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार में तब्दील होने के आसार हैं। इस कारण समुद्र में ऊंची लहरें उठने की आशंका व्यक्त की गई है और मौसम विभाग ने मछुआरों को सावधानी बरतने के लिए कहा है।
तापमान में उतार-चढ़ाव
मौसम विभाग के द्वारा जारी पूर्वानुमान में कहा गया है कि आने वाले दिनों में तापमान में लगातार बदलाव देखने को मिलेगा। उत्तर-पश्चिम भारत में अगले दो दिनों तक न्यूनतम तापमान में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद अगले दो दिनों में तापमान में तीन से पांच डिग्री की गिरावट आएगी और फिर उसके बाद फिर से तापमान बढ़ने लगेगा।
वहीं, मध्य भारत में अगले 24 घंटों तक तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है, लेकिन उसके बाद दो से तीन डिग्री की गिरावट और फिर धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। महाराष्ट्र और गुजरात में भी इसी तरह तापमान पहले गिरेगा और फिर धीरे-धीरे सामान्य की ओर लौटेगा।
देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान की बात करें तो कल, 26 जनवरी, 2026 को केरल के कोट्टायम में अधिकतम तापमान 36.0 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि कल, देश के मैदानी इलाकों में राजस्थान के सीकर में न्यूनतम तापमान 0.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कुल मिलाकर, देश के बड़े हिस्से में मौसम सक्रिय बना हुआ है। उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश, बर्फबारी, आंधी और ओलावृष्टि का अंदेशा है। मैदानी इलाकों में ठंड और शीतलहर का असर महसूस किया जा सकता है। दक्षिण भारत में हल्की बारिश और समुद्री क्षेत्रों में तेज हवाओं के कारण सतर्क रहने की आवश्यकता है। लोगों को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।