प्रतीकात्मक तस्वीर: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) 
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गाजियाबाद: कागजों में 0.737 हेक्टेयर में जोहड़, जमीन पर कब्जा; एनजीटी ने दिए सख्त जांच के आदेश

पुराने राजस्व रिकॉर्ड और मौके पर जांच के जरिए संयुक्त समिति पता लगाएगी कि जोहड़ का कितना हिस्सा बचा है, कितनी जमीन पर अतिक्रमण हुआ है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • गाजियाबाद में राजस्व रिकॉर्ड में 0.737 हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज जोहड़ की जमीन पर कथित कब्जे और पक्के निर्माण की शिकायत पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जांच के निर्देश दिए हैं।

  • 14 अक्टूबर 2026 को दिए आदेश में ट्रिब्यूनल ने चार संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों वाली संयुक्त समिति गठित करने को कहा है।

  • समिति पुराने राजस्व रिकॉर्ड और मौके का निरीक्षण कर पता लगाएगी कि जोहड़ का मूल क्षेत्रफल कितना था, वर्तमान में उसका कितना हिस्सा बचा है और कितनी जमीन पर अतिक्रमण हुआ है। साथ ही, अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान भी की जाएगी।

  • शिकायतकर्ता का आरोप है कि खसरा नंबर 186 और 190 में दर्ज जोहड़ की जमीन पर असद अली ने कथित रूप से कब्जा कर लिया है। आरोप है कि वहां प्लॉट काटकर आवासीय मकान और अन्य स्थायी निर्माण किए जा रहे हैं।

  • शिकायत के समर्थन में राजस्व रिकॉर्ड और तस्वीरों का हवाला दिया गया है। आवेदक ने यह भी आरोप लगाया कि जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

  • तालाब और जोहड़ बारिश के पानी को सहेजने, भूजल स्तर बनाए रखने और स्थानीय पर्यावरण को सहारा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में समिति की जांच से जलस्रोत की वास्तविक स्थिति और कथित अतिक्रमण की सीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तालाब की जमीन पर कथित अतिक्रमण और वहां मकान व अन्य पक्के निर्माण किए जाने की शिकायत पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जांच के निर्देश दिए हैं।

ट्रिब्यूनल ने 14 अक्टूबर 2026 को दिए आदेश में एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है। समिति पुराने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर तालाब के मूल क्षेत्रफल का पता लगाएगी और यह भी जांच करेगी कि वर्तमान में उसका कितना हिस्सा बचा है तथा कितनी जमीन पर अतिक्रमण हुआ है।

कोर्ट के निर्देशानुसार इस समिति में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के सदस्य सचिव के एक प्रतिनिधि, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के अध्यक्ष और गाजियाबाद के जिलाधिकारी शामिल होंगे।

एनजीटी के निर्देश के मुताबिक, समिति मौके का निरीक्षण कर तालाब की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी। साथ ही, अतिक्रमण की सीमा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान भी करेगी।

राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है 0.737 हेक्टेयर तालाब

आवेदक ने शिकायत में दावा किया है कि संबंधित जमीन के खसरा नंबर 186 में करीब 0.56 हेक्टेयर और खसरा नंबर 190 में करीब 0.177 हेक्टेयर क्षेत्र तालाब या जोहड़ के रूप में दर्ज है। इस तरह दोनों भूखंडों का कुल क्षेत्रफल करीब 0.737 हेक्टेयर है। आवेदक के वकील ने अपने दावे के समर्थन में राजस्व रिकॉर्ड का हवाला दिया है।

शिकायत के अनुसार, असद अली नाम के एक व्यक्ति ने तालाब की जमीन पर कथित रूप से कब्जा कर लिया है। आरोप है कि वहां आवासीय मकान और अन्य स्थाई निर्माण किए जा रहे हैं।

आवेदक के वकील ने इस दावे के समर्थन में आवेदन के साथ जमा की गई तस्वीरों का भी उल्लेख किया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि तालाब की जमीन पर प्लॉट काटकर निर्माण कराया जा रहा है।

शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने का आरोप

आवेदक की ओर से कहा गया कि तालाब की जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर गाजियाबाद के जिलाधिकारी समेत विभिन्न संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

तालाब और जोहड़ केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि बारिश के पानी को सहेजने, भूजल के स्तर को बनाए रखने और स्थानीय पर्यावरण को सहारा देने वाले अहम प्राकृतिक संसाधन हैं। ऐसे जलस्रोतों पर अतिक्रमण होने से पानी के संचय की जगह घट सकती है और आसपास के इलाकों में जलभराव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

अब संयुक्त समिति की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज तालाब की जमीन की मौजूदा स्थिति क्या है, कितना क्षेत्र अतिक्रमण की चपेट में है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।