प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक 
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सप्तसागर संरक्षण अभियान: एनजीटी के निर्देश पर उज्जैन प्रशासन का बड़ा कदम

उज्जैन की सप्तसागर झीलों में अतिक्रमण हटाकर और सीवेज रोककर संरक्षण की दिशा में प्रशासन ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर ठोस कदम उठाए हैं।

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • उज्जैन की ऐतिहासिक सप्तसागर झीलों में अतिक्रमण और सीवेज की शिकायतों पर सख्ती दिखाते हुए प्रशासन ने 1.15 हेक्टेयर क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाए, 24 दुकानों और 7 रिहायशी ढांचों को ध्वस्त किया तथा गंदे पानी का रुख ट्रीटमेंट प्लांट की ओर मोड़ दिया।

  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर दाखिल कार्रवाई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अब झीलों में न तो अतिक्रमण है और न ही सीवेज का प्रवाह, और संरक्षण की निगरानी लगातार जारी है।

  • रिपोर्ट में सामने आया है कि विष्णु सागर में भी सीवेज या कचरा प्रवेश नहीं कर रहा है। रत्नाकर सागर, जो नगर निगम की सीमा से बाहर है, जल संसाधन विभाग के अधीन है। विभाग को अतिक्रमण और गंदगी रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में मौजूद ऐतिहासिक सप्तसागर झीलों को बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। यह जानकारी 23 फरवरी 2026 को राज्य सरकार की ओर से पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट में दी गई है। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा 4 फरवरी 2025 को दिए आदेश पर अदालत में दाखिल की गई है।

यह मामला उज्जैन शहर के नगरकोट माता मंदिर के पास स्थित गोवर्धन सागर में अतिक्रमण और प्रदूषण को लेकर दायर याचिका से जुड़ा है।

गोवर्धन सागर पर शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई

शिकायत में कहा गया था कि झील के आसपास अवैध कब्जे किए गए हैं, व्यावसायिक और निर्माण गतिविधियां चल रही हैं और बिना साफ किए गंदा पानी सीधे झील में छोड़ा जा रहा है, जिससे भूजल और तालाब दोनों प्रदूषित हो रहे हैं।

रिपोर्ट में उज्जैन सिटी के तहसीलदार का बयान भी शामिल किया गया है, जिसमें कहा गया है कि अदालत की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही प्रशासन ने कानूनी प्रावधानों के तहत सप्तसागर और अन्य जलाशयों के संरक्षण के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए थे।

अतिक्रमण की पहचान करने और हटाने के लिए उज्जैन शहर के सब-डिविजनल (राजस्व) कार्यालय की ओर से संयुक्त टीम बनाई गई। नगर निगम के अधिकारियों की मौजूदगी में सभी झीलों का सीमांकन (डिमार्केशन) किया गया है।

रुद्रसागर से पुरुषोत्तम सागर तक: जांच में क्या मिला?

सीमांकन के दौरान यह पाया गया कि महाकाल मंदिर के पास रुद्रसागर के आसपास कोई अतिक्रमण या बसाहट नहीं थी। क्षीरसागर जोकि शहर के बीच कुंड के रूप में मौजूद है, वो चारों ओर से प्राचीन पत्थर की मजबूत दीवारों से सुरक्षित है। हालांकि पुरुषोत्तम सागर के चारों ओर सड़क और खुली जमीन है, यहां भी कोई अवैध कब्जा नहीं मिला।

इसी तरह नालिया वाखल क्षेत्र में पुष्कर सागर, बावड़ी/कुंड के रूप में सुरक्षित है। घनी आबादी के बीच होने के बावजूद इसका ढांचा सही-सलामत और सुरक्षित है।

रिपोर्ट में सामने आया है कि विष्णु सागर में भी सीवेज या कचरा प्रवेश नहीं कर रहा है। रत्नाकर सागर, जो नगर निगम की सीमा से बाहर है, जल संसाधन विभाग के अधीन है। विभाग को अतिक्रमण और गंदगी रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

गोवर्धन सागर के बारे में जानकारी दी गई है कि इसके बचाव और सुरक्षा के लिए पहले डिमार्केशन किया गया था। उज्जैन के तहसीलदार और लैंड रिकॉर्ड्स के सुपरिटेंडेंट के डायरेक्शन में बनी एक टीम ने दोबारा आधुनिक तकनीक से डिमार्केशन किया है। इसमें सामने आया है कि कुल 7.716 हेक्टेयर दर्ज क्षेत्र में से करीब 1.15 हेक्टेयर पर स्थाई और अस्थाई निर्माण पाए गए।

इसके बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए, 24 खोखे (दुकानें), 7 रिहायशी ढांचे और दो बाउंड्री वॉल को हटा दिया गया है। इसके साथ ही झील के आसपास के अस्थाई अतिक्रमण को भी हटाकर खाली जमीन पर तारबंदी कर दी गई है। अवैध निर्माण हटाने की आगे की कार्रवाई उज्जैन नगर निगम द्वारा जारी है।

सीवेज का बदला रास्ता, गंदा पानी भी रोका गया

9 अक्टूबर 2025 को नगर निगम के इंजीनियरों के निरीक्षण में पाया गया कि गणेश टेकरी क्षेत्र का सीवेज अब गोवर्धन सागर में नहीं जा रहा है। चीफ मिनिस्टर इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम के तहत नया नाला बनाकर पानी का रुख मोड़ा गया है। वी डी क्लॉथ मार्केट का गंदा पानी भी पाइपलाइन के जरिए सुरसा ट्रीटमेंट प्लांट को भेजा जा रहा है।

9 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम की संयुक्त जांच में श्रीराम कॉलोनी के 20 से 30 घरों का गंदा पानी झील में जाते पाया गया। पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने तुरंत कार्रवाई कर इसे बंद कराया। फिलहाल झील में किसी तरह का गंदा पानी नहीं जा रहा है।

बाकी सप्तसागर झीलों का भी इंस्पेक्शन किया गया। अधिकारियों के इंस्पेक्शन से यह कन्फर्म हुआ कि रुद्रसागर, क्षीरसागर, पुष्करसागर, पुरुषोत्तम सागर और विष्णु सागर झीलों में सीवरेज, ड्रेनेज या सॉलिड वेस्ट नहीं जा रहा है। सारा गंदा पानी पाइपलाइन के जरिए सुरसा ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जा रहा है। वहां किसी तरह का अवैध कब्जा भी नहीं मिला है।

झीलों के किनारों पर की गई मिट्टी की भराई को हटाने के लिए 14 फरवरी 2025 को संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी किए गए और इस बारे में कार्रवाई जारी है। प्रशासन का दावा है कि अब सप्तसागर झीलों में न तो अतिक्रमण है और न ही सीवेज या ठोस कचरे मिल रहा है। साथ ही उज्जैन की इन ऐतिहासिक जलधाराओं को संरक्षित रखने के लिए निगरानी और कार्रवाई लगातार जारी है।