तेलंगाना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीजीपीसीबी) ने 26 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट में बताया कि रंगारेड्डी जिले की कोथाकुंटा और मंगलवानी झीलों में किसी भी प्रकार का सीवेज नहीं छोड़ा गया। रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने 13 नवंबर 2025 को इन झीलों और उनके आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवानी झील 1.6 एकड़ क्षेत्र में फैली है और इसका पानी पूरी तरह वर्षा जल पर निर्भर है। झील का फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और बफर जोन हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एचएमडीए) की वेबसाइट पर दर्ज किया गया है।
निरीक्षण के दौरान झील में किसी भी प्रकार का सीवेज प्रवाह नहीं देखा गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने झील के पानी के नमूने लिए हैं और उन्हें विश्लेषण के लिए भेज दिया गया है, हालांकि यह नतीजे अभी आना बाकी हैं।
रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि कोथाकुंटा झील 11 एकड़ क्षेत्र में फैली है और इसका भी पानी पूरी तरह वर्षा जल पर निर्भर है। झील का फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और बफर जोन हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी की वेबसाइट पर दर्ज है।
निरीक्षण के दौरान नहीं देखा गया सीवेज प्रवाह
यह झील “लेक लाइफ रिवाइवल – हैदराबाद प्रोजेक्ट” के तहत जीएचएमसी, जेनपैक्ट और यूनाइटेड वे द्वारा विकसित की जा रही है। झील के चारों ओर वॉकवे बनाए गए हैं और ग्रीन बेल्ट विकसित की गई है। झील में गंदा पानी प्रवेश न करे, इसके लिए पश्चिम और दक्षिणी सीमाओं पर सीवेज डायवर्जन लाइनें बिछाई गई हैं।
निरीक्षण के दौरान कोथाकुंटा झील में भी किसी तरह का सीवेज प्रवाह नहीं देखा गया। पानी के नमूने लिए गए हैं और विश्लेषण के परिणाम आने बाकी हैं।
तेलंगाना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत हर महीने कोथाकुंटा के पानी के नमूने लेता है और भारी धातुओं की मौजूदगी का परीक्षण साल में एक बार किया जाता है।
जहां तक झील क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण का सवाल है, तेलंगाना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी, ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और हैदराबाद डिजास्टर मैनेजमेंट एंड एसेट प्रोटेक्शन एजेंसी को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजे हैं।