समुद्र के विशाल और रहस्यमय जीवों की कहानियां सदियों से इंसानों को रोमांचित और डराती रही हैं। दुनिया की कई संस्कृतियों में ऐसे 'क्रैकन' जैसे समुद्री दानवों का जिक्र मिलता है, जो जहाजों तक को निगल जाने की ताकत रखते थे। प्रतीकात्मक इलस्ट्रेशन: आईस्टॉक 
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

10 करोड़ साल पहले समुद्रों पर राज करते थे विशाल ऑक्टोपस, वैज्ञानिकों ने एआई की मदद से खोले राज

करोड़ों साल पुरानी चट्टानों में मिले जबड़ों के निशानों ने बताया कि ये 19 मीटर लंबे जीव समुद्र के सबसे खतरनाक शिकारियों में शामिल थे।

Lalit Maurya

  • करीब 10 करोड़ साल पहले क्रेटेशियस काल के समुद्रों में ऐसे विशाल ऑक्टोपस मौजूद थे, जो आज की कल्पना से कहीं अधिक ताकतवर और खतरनाक शिकारी थे। जापान और कनाडा में मिले 10 से 7.2 करोड़ साल पुराने चट्टानी नमूनों की एआई और अत्याधुनिक टोमोग्राफी से जांच में इनके जीवाश्म जबड़े मिले हैं।

  • स्टडी से पता चला है कि ऑक्टोपस 'नैनाइमोट्यूथिस हैगार्टी' की लंबाई 18.6 मीटर तक हो सकती थी, जबकि दूसरी प्रजाति 'नैनाइमोट्यूथिस जेलेत्जकी' 7.7 मीटर तक लंबी थी।

  • जबड़ों पर गहरी खरोंच, टूट-फूट और व्यापक घिसाव के निशान बताते हैं कि ये बड़े और कठोर शरीर वाले शिकार से भी भिड़ते थे। जबड़े के एक हिस्से पर अधिक घिसाव इनके जटिल व्यवहार और ‘लेटरलाइजेशन’ की संभावना की ओर भी इशारा करता है।

  • इससे यह संभावना भी मजबूत होती है कि करोड़ों साल पहले के ये ऑक्टोपस केवल ताकतवर ही नहीं, बल्कि जटिल व्यवहार करने की क्षमता रखने वाले बुद्धिमान शिकारी भी हो सकते थे।

  • इस खोज ने ऑक्टोपस के सबसे पुराने ज्ञात जीवाश्म रिकॉर्ड को करीब 50 लाख साल पीछे खिसका दिया है। अब इसका रिकॉर्ड करीब 10 करोड़ साल पुराना माना जा रहा है।

आज जब हम ऑक्टोपस के बारे में सोचते हैं, तो आंखों के सामने एक बेहद बुद्धिमान, शांत और चट्टानों की दरारों में खुद को समेटकर छुप जाने वाले जीव की तस्वीर उभरती है। लेकिन 10 करोड़ साल पहले क्रेटेशियस काल के विशाल महासागरों में कुदरत का नजारा बिल्कुल अलग था।

तब के समंदर शांत नहीं, बल्कि खौफनाक थे, और उस समय के सबसे बड़े शिकारी कोई शार्क या विशाल समुद्री सरीसृप नहीं, बल्कि करीब 65 फीट लंबे दानवाकार ऑक्टोपस थे। जापान की होक्काइडो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए अध्ययन में पहली बार ऐसे प्रत्यक्ष प्रमाण मिले हैं, जो बताते हैं कि प्राचीन ऑक्टोपस बड़े समुद्री जीवों के साथ शीर्ष शिकारी के रूप में समुद्रों पर राज करते थे।

इनके जबड़ों पर मिले घिसाव के निशान बताते हैं कि ये ऑक्टोपस उस दौर के बड़े समुद्री सरीसृपों, जैसे प्लेसियोसॉर और मोसासॉर, का भी शिकार करते थे। इस अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल साइंस में प्रकाशित हुए हैं।

ऑक्टोपस का शरीर नरम होता है। इसलिए इनके अवशेष हड्डियों या खोल वाले जीवों की तुलना में बहुत कम मात्रा में जीवाश्म बन पाते हैं। यही वजह है कि इनके विकास की शुरुआती कहानी वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से एक पहेली रही है।

चट्टानों के भीतर छिपा था करोड़ों साल पुराना रहस्य

हालांकि जापान की होक्काइडो यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ताओं के नेतृत्व में वैज्ञानिओं ने एआई और अत्याधुनिक टोमोग्राफी तकनीक के जरिए इस पहले को हल करने का दावा किया है। वैज्ञानिकों ने जापान और कनाडा के वैंकूवर द्वीप में पाए गए 10 से 7.2 करोड़ साल पुराने पत्थरों को डिजिटल रूप से खंगाला, तो उनके भीतर इन प्राचीन ऑक्टोपस के जबड़ों के अद्भुत जीवाश्म छिपे मिले हैं।

बता दें कि जबड़े शरीर के उन हिस्सों में हैं, जिनके जीवाश्म बनने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक होती है।

वैज्ञानिकों ने इन करोड़ साल पुराने चट्टानी नमूनों की उच्च-रिजॉल्यूशन तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से जांच की है। इस दौरान चट्टानों के भीतर जबड़ों के जो छिपे जीवाश्म सामने आए उन पर खरोंच, टूट-फूट, घिसाव और चमकदार घिसे हुए हिस्सों के सबूत मिले हियँ, जो इन पुरातन जीवों की शिकार की आदतों को बयां करते हैं।

वैज्ञानिकों के होश तब उड़ गए जब उन्होंने इन जबड़ों के आधार पर जीव के आकार को नापा। रिसर्च दर्शाती है कि जीवाश्मों में मिली विलुप्त फिन्ड ऑक्टोपस की प्रजातियों में नैनाइमोट्यूथिस हैगार्टी (Nanaimoteuthis haggarti) सबसे बड़ी थी। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका शरीर करीब 6.6 से 18.6 मीटर तक लंबा हो सकता था। मतलब की यह जीव उस दौर के विशाल समुद्री डायनासोरों से भी बड़ा था।

19 मीटर तक लंबे हो सकते थे ये ‘समुद्री दैत्य’

वैज्ञानिकों के मुताबिले इनका अधिकतम आकार करीब 19 मीटर यानी करीब पांच मंजिला इमारत जितना बढ़ा हो सकता था। यह आधुनिक ऑक्टोपस की तुलना में अकल्पनीय रूप से विशाल था। अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता यासुहिरो इबा के मुताबिक, यह आकार इतना बड़ा था कि ये जीव अपने समय के बड़े समुद्री सरीसृपों और अन्य शक्तिशाली शिकारियों के बराबर खड़े हो सकते थे।

हालांकि साथ ही पहचानी गई दूसरी प्रजाति 'नैनाइमोट्यूथिस जेलेत्जकी' इससे छोटी थी, लेकिन फिर भी यह आज के किसी विशाल समुद्री जीव की कल्पना से कम नहीं। यह करीब 10 करोड़ से 7.2 करोड़ साल पहले मौजूद थी और इसकी लंबाई 2.8 से 7.7 मीटर तक आंकी गई है।

जबड़ों पर मिले हमले और संघर्ष के निशान

इन प्राचीन ऑक्टोपसों के जबड़ों की कहानी और भी दिलचस्प है। जीवाश्मों पर गहरे खरोंच, चिपिंग, दरारें और लगातार घिसने के निशान मिले। बड़े और वयस्क नमूनों में जबड़े के सिरे का करीब 10 फीसदी हिस्सा तक घिस चुका था। आधुनिक कठोर खोल वाले शिकार को खाने वाले जीवों में भी इतना व्यापक घिसाव आम नहीं है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह घिसाव बड़े और मजबूत शिकार से बार-बार तथा बेहद ताकतवर तरीके से भिड़ने का संकेत है। यानी ये ऑक्टोपस नरम और छोटे शिकार तक सीमित नहीं थे, बल्कि कठोर शरीर वाले बड़े समुद्री जीवों से भी भिड़ते थे।

प्रोफेसर इबा के मुताबिक, जबड़ों पर मिले ये निशान बताते हैं कि इन ऑक्टोपस की भोजन रणनीति आधुनिक सेफालोपोड्स की तुलना में कहीं अधिक आक्रामक थी।

एक तरफ के जबड़े का ज्यादा घिसना भी देता है बड़ा संकेत

जीवाश्मों से एक और हैरान करने वाला संकेत मिला। दोनों प्रजातियों में जबड़े के एक हिस्से पर दूसरे की तुलना में ज्यादा घिसाव था। इससे पता चलता है कि संभवतः ये जीव शिकार करते समय जबड़े के एक हिस्से का अधिक इस्तेमाल करते थे। व्यवहार में इस तरह की असमानता को ‘लेटरलाइजेशन’ कहा जाता है। आधुनिक जीव विज्ञान में शरीर के एक हिस्से को इस तरह तरजीह देना बेहद विकसित और जटिल दिमाग की निशानी माना जाता है

इससे यह संभावना भी मजबूत होती है कि करोड़ों साल पहले के ये ऑक्टोपस केवल ताकतवर ही नहीं, बल्कि जटिल व्यवहार करने की क्षमता रखने वाले बुद्धिमान शिकारी भी हो सकते थे।

अब तक क्रेटेशियस काल के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में शीर्ष शिकारी के रूप में मुख्य रूप से मोसासॉर, प्लेसियोसॉर, शार्क और बड़ी मछलियों जैसे कशेरुकी जीवों की कल्पना की जाती रही है। लेकिन यह खोज तस्वीर को पूरी तरह बदल देती है।

इसके मुताबिक, उस दौर में विशाल ऑक्टोपस जैसे बिना हड्डी वाले जीव भी समुद्री खाद्य शृंखला के सबसे ऊपरी स्तर तक पहुंच चुके थे। होक्काइडो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यासुहिरो इबा के मुताबिक, यह अध्ययन इस बात का जीता-जागता सबूत है कि कुदरत की इस दुनिया में बिना हड्डियों वाले जीव भी अपनी बुद्धिमत्ता और ताकत के दम पर समंदर के सबसे बड़े शिकारी (सुपर प्रेडेटर) बन सकते थे।

इस खोज ने ऑक्टोपस के सबसे पुराने ज्ञात जीवाश्म रिकॉर्ड को करीब 50 लाख साल पीछे खिसका दिया है। अब इसका रिकॉर्ड करीब 10 करोड़ साल पुराना माना जा रहा है।

क्या यही था असली ‘क्रैकन’?

समुद्र के विशाल और रहस्यमय जीवों की कहानियां सदियों से इंसानों को रोमांचित और डराती रही हैं। दुनिया की कई संस्कृतियों में ऐसे 'क्रैकन' जैसे समुद्री दानवों का जिक्र मिलता है, जो जहाजों तक को निगल जाने की ताकत रखते थे।

जापान का अक्कोरोकामुई और माओरी मिथकों का ते व्हेके-आ-मुतुरांगी ऐसे ही समुद्री दानवों के उदाहरण हैं। माना जाता है कि इन कहानियों को विशाल स्क्विड जैसे वास्तविक समुद्री जीवों को देखकर प्रेरणा मिली होगी। यह विशाल स्क्विड करीब 10 मीटर या उससे भी अधिक लंबा हो सकता है।

हालांकि अब नए अध्ययन ने इस कहानी में एक और दिलचस्प कड़ी जोड़ दी है। ये वो जीव हैं जो इंसानों के समुद्रों में उतरने से बहुत पहले ही विलुप्त हो चुके थे। लेकिन जिस ‘समुद्री दानव’ की कल्पना इंसान ने सदियों बाद अपनी कहानियों में की, उसका एक बेहद प्राचीन और कहीं अधिक वास्तविक रूप करीब 10 करोड़ साल पहले समुद्र की गहराइयों में मौजूद था।

दिलचस्प बात यह है कि शायद समुद्रों की प्राचीन दुनिया हमारी कल्पना से कहीं अधिक विविध थी। जिन जीवों के शरीर आज हमें नाजुक और मुलायम दिखाई देते हैं, उनके पूर्वज कभी समुद्र के सबसे खतरनाक शिकारी रहे होंगे।

वैज्ञानिक अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल जीवाश्म तकनीकों की मदद से चट्टानों के भीतर छिपे ऐसे ही और जीवाश्म खोजने की तैयारी कर रहे हैं। संभव है कि आने वाली खोजें समुद्रों की उस पुरानी दुनिया की कई ऐसी कहानियां सामने लाएं, जिन्हें समय ने चट्टानों में छिपाकर रखा है।