राजस्थान सरकार ने एनजीटी को बताया कि निजामपुरा में कोई अवैध खनन नहीं हो रहा है। खदान की लीज 2061 तक वैध है, लेकिन फिलहाल खनन गतिविधियां बंद हैं।
सुरक्षा के लिए खनन गड्ढों की घेराबंदी की गई है और नियमित निगरानी की जा रही है।
हालांकि, अभी तक न तो भूमि पुनर्बहाली (रिक्लेमेशन) की प्रक्रिया शुरू की गई है और न ही अंतिम खदान को बंद (फाइनल माइन क्लोजर) करने की कोई कार्रवाई की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक विजिट के दौरान माइन चालू नहीं थी। न ही खदान क्षेत्र में किसी तरह का पौधारोपण देखा गया।
वहीं एक अन्य मामले में नाहरगढ़ अभयारण्य के आसपास पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए चल रही कथित गैर-वन गतिविधियों के आरोपों की जांच के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने तीन सदस्यीय संयुक्त समिति के गठन का निर्देश दिया है, जो पर्यावरण नियमों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगी।
निजामपुरा में फिलहाल किसी भी तरह की खनन गतिविधि नहीं चल रही है। ताजा निरीक्षण में पाया गया कि खदान पूरी तरह बंद है और मौके पर इससे जुड़ी कोई गतिविधि नहीं चल रही है। मामला राजस्थान के अजमेर जिले की नसीराबाद तहसील का है।
राज्य सरकार की ओर से 16 जनवरी 2025 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल रिपोर्ट के मुताबिक, इस खदान की लीज 2061 तक वैध है और स्वीकृत खनन योजना में खनिज भंडार की उपलब्धता भी दर्शाई गई है। हालांकि, अभी तक न तो भूमि पुनर्बहाली (रिक्लेमेशन) की प्रक्रिया शुरू की गई है और न ही अंतिम खदान को बंद (फाइनल माइन क्लोजर) करने की कोई कार्रवाई की गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि खनन पूरी तरह बंद होने के बाद ही फाइनल माइन क्लोजर योजना प्रस्तुत और लागू की जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक विजिट के दौरान माइन चालू नहीं थी। न ही खदान क्षेत्र में किसी तरह का पौधारोपण देखा गया। लीज एरिया में केवल प्राकृतिक झाड़ियां मौजूद थी। वहीं, कुछ स्थानों पर ओवरबर्डन यानी निकाली गई मिट्टी और पत्थरों के छोटे ढेर भी पाए गए।
सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से सरकार ने दावा किया है कि खनन गड्ढों को चारों ओर से घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया है, ताकि किसी तरह की अनधिकृत आवाजाही न हो और आम लोगों को खतरा न पहुंचे। साथ ही, खनन विभाग और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि अवैध खनन या पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की कोई घटना न हो।
यह रिपोर्ट एनजीटी के 22 अगस्त 2025 के आदेश पर दाखिल की गई है, जिसमें खनन साइट्स की स्थिति और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों पर विस्तृत जानकारी देने को कहा गया था।
नाहरगढ़ अभयारण्य मामला: एनजीटी ने गठित की जांच समिति
राजस्थान में जयपुर स्थित नाहरगढ़ अभयारण्य के आसपास पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना इजाजत के चल रही कथित गैर-वन गतिविधियों के आरोपों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंभीरता से लिया है।
एनजीटी ने 15 जनवरी 2026 को तीन सदस्यीय संयुक्त समिति के गठन का निर्देश दिया है, जो पर्यावरण नियमों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगी।
इस समिति में जयपुर के जिला कलेक्टर के साथ नाहरगढ़ के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक-एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। एनजीटी ने समिति को निर्देश दिया है कि वह मौके का दौरा कर छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा अधिकरण को सौंपे।