दिल्ली में एच1एन1 के मामले 2,000 पार, आईसीएमआर ने कहा नया स्ट्रेन नहीं, संक्रमण में अब धीरे-धीरे कमी आ रही।  फोटो साभार: आईस्टॉक
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राहत: आईसीएमआर ने कहा स्वाइन फ्लू का नया स्ट्रेन नहीं; मगर दिल्ली में एच1एन1 के मामले 2,000 के पार

दिल्ली में स्वाइन फ्लू का बढ़ता असर, एच1एन1 के मामले 2,000 पार; आईसीएमआर ने कहा नया स्ट्रेन नहीं, मामले अब धीरे-धीरे गिरावट की ओर

Dayanidhi

  • दिल्ली में एच1एन1 के मामले 2,000 पार, आईसीएमआर ने कहा नया स्ट्रेन नहीं, संक्रमण में अब धीरे-धीरे कमी आ रही।

  • राजधानी में एच1एन1 संक्रमण बढ़ा, अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा होगी, सरकार बेड, दवाओं और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता देखेगी।

  • आईसीएमआर के अनुसार मौजूदा एच1एन1 वायरस पहले से ज्ञात है और वैक्सीन में शामिल स्ट्रेन से इसका अच्छा मेल है।

  • विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को संक्रमण से विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।

  • डॉक्टरों ने मास्क पहनने, हाथ धोने, भीड़ से बचने और लक्षण गंभीर होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।

दिल्ली में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 के मामले इस साल 2,000 के आंकड़े को पार कर गए हैं। मामलों में बढ़ोतरी के बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने लोगों को राहत देने वाली जानकारी दी है। आईसीएमआर के अनुसार, दिल्ली और देश में फैल रहा एच1एन1 वायरस कोई नया स्ट्रेन नहीं है। यह पहले से वैज्ञानिकों के लिए जाना-पहचाना वायरस है और 2025 से इसके एक रूप के फैलने की जानकारी सामने आती रही है।

आईसीएमआर के मुताबिक, इस समय दिल्ली में एच1एन1 का प्रमुख रूप ए/मिसौरी/11/2025 (एच1एन1) पीडीएम09 जैसा वायरस है। यह 6बी.1ए.5ए 2ए क्लेड और डी.3.1.1 सबक्लेड से जुड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वायरस को लेकर फिलहाल किसी नए या अधिक खतरनाक स्ट्रेन के सामने आने के संकेत नहीं हैं।

पिछले दो हफ्तों में मामलों में कमी

आईसीएमआर की निगरानी के अनुसार, देश में एच1एन1 के मामले पिछले कुछ समय में बढ़े थे, लेकिन अब इनमें धीरे-धीरे कमी आने लगी है। दिल्ली में भी पिछले चार से पांच सप्ताह के दौरान संक्रमण के मामले काफी अधिक रहे। हालांकि, पिछले करीब दो सप्ताह में मामलों में गिरावट देखने को मिली है। इस सप्ताह के आंकड़ों का अभी इंतजार किया जा रहा है।

आईसीएमआर के अनुसार, पिछले सप्ताह दिल्ली में दर्ज किए गए श्वसन संक्रमण के करीब 70 प्रतिशत मामलों के पीछे एच1एन1 वायरस था। हालांकि, इस आंकड़े को जांच और निगरानी के संदर्भ में समझना जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली में सांस से जुड़ी हर बीमारी एच1एन1 के कारण हो रही है।

अस्पतालों की तैयारियों की होगी समीक्षा

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने सोमवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। बैठक में एच1एन1 के बढ़ते मामलों और सरकारी अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।

अधिकारियों से अस्पतालों में उपलब्ध बेड, दवाओं, डॉक्टरों और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की जानकारी ली जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अगर गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ती है तो अस्पतालों में इलाज की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद रहे।

वहीं दिल्ली सरकार संभावित संक्रमण बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को राजधानी में स्वास्थ्य सुविधाओं और तैयारियों की समीक्षा की

बैठक में नड्डा ने श्वसन संबंधी स्वच्छता और हाथों की स्वच्छता जैसे बचाव उपायों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। सरकार ने स्वास्थ्य संस्थानों को निगरानी और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।

ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं

विशेषज्ञों के अनुसार, मौसमी फ्लू और एच1एन1 आमतौर पर खुद ठीक होने वाली बीमारी है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, सिरदर्द और शरीर में दर्द शामिल हैं। ज्यादातर स्वस्थ लोग आराम, पर्याप्त पानी और सामान्य देखभाल से ठीक हो जाते हैं।

हालांकि सभी लोगों के लिए संक्रमण का खतरा एक जैसा नहीं होता। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

डॉक्टरों ने सावधानी बरतने की सलाह दी

चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा कि नया स्ट्रेन सामने नहीं आना राहत की बात है। उन्होंने दिल्ली में बढ़ते संक्रमण के पीछे प्रदूषण और पर्यावरण में बदलाव जैसे कारणों को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, खराब हवा, धूल, मौसम में अचानक बदलाव और अनियमित मानसून लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं।

उन्होंने लोगों से बाहर निकलते समय मास्क पहनने, नियमित रूप से हाथ धोने और भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने की सलाह दी है। बीमारी के लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना और पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।

विशेषज्ञों ने एच1एन1 कहा कि मामलों में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि कोई नया या ज्यादा खतरनाक वायरस सामने आया है। उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की।

वैक्सीन को लेकर क्या है स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) हर साल उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के लिए फ्लू वैक्सीन में शामिल किए जाने वाले वायरस के स्ट्रेन की सिफारिश करता है। इसके लिए दुनिया भर में मौजूद प्रयोगशालाओं से मिले संक्रमण के आंकड़ों का अध्ययन किया जाता है। इस साल उत्तरी गोलार्ध के लिए सुझाए गए स्ट्रेन में ए/मिसौरी/11/2025 (एच1एन1)पीडीएम09 वायरस भी शामिल है। आईसीएमआर का कहना है कि भारत में फैल रहे वायरस का वैक्सीन में शामिल स्ट्रेन से अच्छा मेल है।

घबराने के बजाय सतर्क रहें

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए। अगर बुखार, खांसी या शरीर में दर्द जैसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें, बढ़ जाएं या सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर समस्या हो, तो समय पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

फिलहाल आईसीएमआर की जानकारी का मुख्य संदेश यही है कि दिल्ली में एच1एन1 का संक्रमण जरूर बढ़ा है, लेकिन इसके पीछे किसी नए स्ट्रेन के सामने आने के प्रमाण नहीं हैं। सावधानी, साफ-सफाई और समय पर इलाज से संक्रमण के गंभीर असर से बचने में मदद मिल सकती है।