रिपोर्टों के अनुसार, इस साल सात जून, 2026 तक शिगेलोसिस के 85 पुष्ट मामले और 70 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

केरल में शिगेला संक्रमण का प्रकोप: बच्चों में बढ़ते मामले, अब तक एक मौत की पुष्टि

शिगेला संक्रमण से केरल में चिंता: स्कूलों में मामले बढ़े, कोझिकोड में मौत के बाद सतर्कता, पानी की जांच और क्लोरीनेशन, सफाई अभियान तेज।

Dayanidhi

  • केरल में शिगेला संक्रमण से बच्चों में तेजी से मामले बढ़े, स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों और गांवों में निगरानी बढ़ाई।

  • कोझिकोड में चार साल की बच्ची की शिगेला से मौत, राज्य में संक्रमण से जुड़ा पहला दर्ज गंभीर मामला।

  • वायनाड में 800 से अधिक घर और 13 संस्थान स्वास्थ्य विभाग की कड़ी निगरानी और जांच के दायरे में।

  • स्कूलों में छात्रों की जांच, कई नमूनों की रिपोर्ट लंबित, संक्रमित बच्चों का उपचार स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के तहत जारी है।

  • स्वच्छता अभियान तेज, पानी के स्रोतों का क्लोरीनेशन और सैनिटेशन शुरू, संक्रमण रोकने के लिए सख्त कदम।

केरल राज्य में इन दिनों शिगेला बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण का प्रकोप देखा जा रहा है। यह संक्रमण मुख्य रूप से स्कूली बच्चों में फैल रहा है और कई जिलों में इसके मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को गंभीर मानते हुए निगरानी और जांच को तेज कर दिया है। स्कूलों और आसपास के इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

हाल ही में कोझिकोड जिले में चार साल की एक बच्ची की इस संक्रमण के कारण मौत हो गई। इसे राज्य में शिगेला से जुड़ी पहली दर्ज की गई मौत बताया जा रहा है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और अधिक सक्रिय हो गया है और प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

शिगेला क्या है?

शिगेला एक प्रकार का बैक्टीरिया है जो आंतों में संक्रमण पैदा करता है। इससे होने वाली बीमारी को शिगेलोसिस कहा जाता है। यह वायरस नहीं बल्कि बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारी है। यह दुनिया भर में दस्त (डायरिया) का एक प्रमुख कारण माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, यह संक्रमण खासकर उन देशों में अधिक फैलता है जहां साफ पानी और स्वच्छता की कमी होती है।

यह संक्रमण बच्चों, विशेषकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक गंभीर रूप ले सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग भी इससे जल्दी प्रभावित हो सकते हैं।

कैसे फैलता है संक्रमण?

शिगेला संक्रमण बहुत आसानी से फैलता है। यह मुख्य रूप से गंदे हाथों, दूषित पानी और भोजन के माध्यम से फैलता है। अगर कोई व्यक्ति शौच के बाद हाथ ठीक से नहीं धोता और फिर भोजन या किसी वस्तु को छूता है, तो बैक्टीरिया दूसरों तक पहुंच सकता है। स्कूलों, घरों और भीड़भाड़ वाले स्थानों में यह तेजी से फैलने की संभावना रहती है।

संक्रमण फैलने के लिए बहुत कम मात्रा में बैक्टीरिया भी पर्याप्त होता है, इसलिए यह बहुत संक्रामक माना जाता है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी यह रोग फैल सकता है।

लक्षण और प्रभाव

इस बीमारी के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के एक से दो दिन बाद दिखाई देने लगते हैं। मरीज को तेज दस्त, पेट में दर्द, बुखार और लगातार शौच जाने की इच्छा महसूस हो सकती है। कई बार मरीज को ऐसा लगता है कि पेट खाली होने के बाद भी शौच की जरूरत बनी रहती है।

बच्चों में यह बीमारी जल्दी गंभीर रूप ले सकती है और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) का खतरा बढ़ जाता है। यदि समय पर इलाज न मिले तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

जटिलताएं और खतरे

कुछ मामलों में शिगेला संक्रमण गंभीर जटिलताएं भी पैदा कर सकता है। छोटे बच्चों में दौरे पड़ने का खतरा हो सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में यह बैक्टीरिया खून में फैल सकता है, जिसे बैक्टीरिमिया कहा जाता है। इसके अलावा यह किडनी को प्रभावित करने वाली एक गंभीर स्थिति भी पैदा कर सकता है, जिसे हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम कहा जाता है। कुछ मरीजों में बाद में जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या भी हो सकती है।

वर्तमान स्थिति

रिपोर्टों के अनुसार, इस साल सात जून, 2026 तक शिगेलोसिस के 85 पुष्ट मामले और 70 से ज्यादा संदिग्ध मतलब सामने आए हैं। सामान्य रूप से स्वस्थ वयस्कों में यह बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन छोटे बच्चों में, खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में, यह जानलेवा भी हो सकती है और मौत का सबसे ज्यादा खतरा उन्हीं में देखा जाता है। बुजुर्ग और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग भी इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

में कहा गया है कि वायनाड जिले में 800 से अधिक घरों और 13 संस्थानों की निगरानी की जा रही है। कई स्कूलों में छात्रों की जांच की गई है और जिन बच्चों में लक्षण पाए गए हैं उनका इलाज किया जा रहा है। कुछ नमूनों की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।

अब तक अस्पतालों में दर्जनों मरीजों का इलाज चल रहा है और कई लोग ओपीडी में उपचार ले चुके हैं। अधिकारियों का मानना है कि कुछ मामलों में संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संपर्क के माध्यम से फैला है।

स्वास्थ्य विभाग ने पानी के स्रोतों की जांच और सफाई अभियान शुरू किया है। स्कूलों में कुओं और पानी के टैंकों को क्लोरीन से साफ किया जा रहा है ताकि बैक्टीरिया को खत्म किया जा सके।

रोकथाम और सावधानी

विशेषज्ञों का कहना है कि साफ-सफाई और स्वच्छता इस संक्रमण को रोकने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। हाथों की सफाई, साफ पानी का उपयोग और भोजन को ढककर रखना बेहद जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति को अलग रखने और समय पर इलाज देने से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।

केरल में शिगेला संक्रमण का यह प्रकोप एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्थिति बन गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन लोगों की जागरूकता और स्वच्छता की आदतें इस बीमारी को रोकने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।