बच्चों को प्यार से दिया जाने वाला पैकेटबंद जूस, कोल्ड ड्रिंक या स्पोर्ट्स ड्रिंक भविष्य में उनकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित 25 वर्षों के एक बड़े अध्ययन में 25,000 से अधिक बच्चों के स्वास्थ्य और खानपान का विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि जो बच्चे रोजाना दो या उससे अधिक मीठे पेय पीते हैं, उनमें वयस्क होने पर हाई ब्लड प्रेशर का खतरा 52 फीसदी तक बढ़ जाता है।
यहां तक कि रोजाना एक सोडा या अधिक मात्रा में पैकेज्ड फ्रूट जूस पीने से भी जोखिम उल्लेखनीय रूप से बढ़ा पाया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि बचपन की खानपान संबंधी आदतें जीवनभर हृदय और रक्तचाप की सेहत को प्रभावित करती हैं।
राहत की बात यह है कि कोल्ड ड्रिंक और पैकेटबंद जूस की जगह ताजे फल, पानी और सादा दूध देने जैसी छोटी आदतें इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं। शोध यह स्पष्ट संकेत देता है कि बच्चों की रोजमर्रा की मीठी आदतें भविष्य में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों की नींव बन सकती हैं।
अपने बच्चे को प्यार से डिब्बाबंद जूस देना या खेल-कूद के बाद एनर्जी ड्रिंक पिलाना, हर माता-पिता को एक सुरक्षित और सेहतमंद विकल्प लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बचपन की यह मीठी आदत आपके बच्चे के भविष्य को चुपचाप बीमार बना रही है?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के फ्लैगशिप जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित एक बेहद चौंकाने वाली रिसर्च ने दुनिया भर के माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है। इस अध्ययन के मुताबिक, बचपन में ज्यादा मीठे पेय पदार्थ और फ्रूट जूस पीने से बड़े होने पर हाई ब्लड प्रेशर का खतरा चिंताजनक स्तर तक बढ़ जाता है।
25 वर्षों तक किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि बचपन से लेकर युवावस्था तक मीठे पेय और अधिक मात्रा में फ्रूट जूस पीने वाले लोगों में वयस्क होने पर हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) का खतरा काफी बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जीवन के शुरुआती वर्षों में अपनाई गई खानपान की आदतें लंबे समय तक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।
25 साल की रिसर्च ने क्यों बढ़ाई चिंता?
आजकल हाई ब्लड प्रेशर केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं, किशोरों और बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है। यही कारण है कि बचपन से ही सही खानपान को अपनाना बेहद जरूरी है।
वैश्विक आंकड़ों पर नजर डालें तो हाई ब्लड प्रेशर को लेकर तस्वीर बेहद डरावनी है, दुनिया के 33 फीसदी वयस्क यानी करीब 170 करोड़ लोग इसकी चपेट में हैं। स्थिति कितनी चिंताजनक है, इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह खामोश बीमारी हर साल करीब एक करोड़ जिंदगियां निगल रही है।
लैंसेट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों में बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर के मामले दोगुने हो गए हैं। 2000 में जहां करीब 3.2 फीसदी बच्चे हाई ब्लड प्रेशर का शिकार थे, वहीं 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 6.2 फीसदी को पार कर गया है। मतलब की दुनिया में 19 वर्ष या उससे छोटे 11.4 करोड़ बच्चे इस समस्या से जूझ रहे हैं।
यह अध्ययन कोई मामूली सर्वे नहीं है, बल्कि अमेरिका में 25,000 से अधिक बच्चों पर उनकी किशोरावस्था से लेकर वयस्क होने तक, पूरे 25 वर्षों तक किया गया एक गहरा शोध है। अध्ययन के दौरान 25 वर्षों तक लगातार इन बच्चों के स्वास्थ्य और खानपान का रिकॉर्ड रखा गया। इस दौरान हर एक से चार साल के बीच बच्चों ने अपने खानपान, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी शोधकर्ताओं से साझा की थी।
रोज दो मीठे पेय, 52 फीसदी ज्यादा हाई बीपी का खतरा
नतीजे बताते हैं कि जो बच्चे रोजाना दो या उससे अधिक गिलास सोडा, स्पोर्ट्स ड्रिंक, लेमोनेड, मीठी चाय, कोल्ड ड्रिंक्स या मीठे पेय पदार्थ पीते हैं, उनमें बड़े होने पर हाई ब्लड प्रेशर का खतरा उन लोगों की तुलना में 52 फीसदी अधिक था, जो सप्ताह में तीन से भी कम बार ऐसे पेय पीते थे।
चिंता की बात है कि हर दिन पिया जाने वाला महज एक सोडा इस खतरे को 23 फीसदी और स्पोर्ट्स ड्रिंक्स 36 फीसदी तक बढ़ा देते हैं। सबसे बड़ा झटका उन माता-पिता के लिए है जो बाजार के डिब्बा बंद फ्रूट जूस को सेहत की कुंजी मानते हैं। हर रोज डेढ़ गिलास या उससे ज्यादा जूस पीने वाले बच्चों में बड़े होकर हाई बीपी का खतरा 35 फीसदी अधिक पाया गया, जिसमें पैकेज्ड ऑरेंज जूस का रोजाना एक गिलास खतरा 20 फीसदी तक बढ़ा देता है।
हालांकि साथ ही वैज्ञानिकों ने यह भी माना कि कुछ बच्चों ने अतिरिक्त चीनी वाले ऑरेंज फ्लेवर ड्रिंक को भी संतरे का जूस समझकर दर्ज किया हो सकता है।
क्या फ्रूट जूस भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं?
इस गंभीर खतरे से बच्चों को बचाने का रास्ता बेहद आसान और व्यावहारिक है, जिसे बस हर घर में अपनाने की जरूरत है। रिसर्च में साबित हुआ है कि अगर माता-पिता बच्चों को रोजाना दिए जाने वाले पैकेट बंद जूस या कोल्ड ड्रिंक की जगह एक फल खाने को दें, तो हाई बीपी का खतरा 22 फीसदी तक कम हो जाता है। फलों के जूस की जगह फल खाने से यह जोखिम 19 फीसदी तक घट सकता है।
इसी तरह, कोल्ड ड्रिंक्स और मीठे पेय पदार्थों की जगह बच्चों को पानी या सादा दूध पीने की आदत डाली जाए, तो यह साधारण सा बदलाव इस बड़े खतरे को 13 फीसदी तक घटा देता है।
अध्ययन से जुड़ी वरिष्ठ शोधकर्ता और यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर वसंती मलिक का कहना है, सॉफ्ट ड्रिंक और स्पोर्ट्स ड्रिंक जैसे मीठे पेयों का सेवन सीमित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि 100 फीसदी फलों का जूस भी सीमित मात्रा में ही पीना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में इसका सेवन भी नुकसान पहुंचा सकता है। उनकी सलाह है कि जूस की बजाय फल खाना अधिक लाभदायक है।
विशेषज्ञों की सलाह: जूस नहीं, फल चुनें
उनके मुताबिक बचपन में खान-पान की आदतें जिंदगी भर हमारी सेहत का फैसला करती हैं। आज के दौर में हाई ब्लड प्रेशर युवाओं, किशोरों और यहां तक कि बच्चों में भी बहुत कम उम्र में पैर पसार रहा है, जिससे आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर डॉक्टर अमित खेरा ने इस भ्रम को भी तोड़ा कि फलों की चीनी हर रूप में सुरक्षित है। उन्होंने साफ किया कि शरीर में शुगर किस रूप में जा रही है, यह सबसे ज्यादा मायने रखता है। लिक्विड रूप में जूस या सोडा शरीर को सीधे नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि फल खाने पर ऐसा नहीं होता।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर आगे चलकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी रोग और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए बच्चों की थाली और बोतल में मीठे पेयों की जगह पानी, दूध और ताजे फल शामिल करना भविष्य में उनके दिल और रक्तचाप दोनों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अध्ययन लोगों द्वारा दी गई स्वास्थ्य और खानपान संबंधी जानकारी पर आधारित है। इसलिए इससे सीधे कारण और परिणाम का संबंध सिद्ध नहीं होता, लेकिन इसके निष्कर्ष स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की दिशा में एक मजबूत संकेत जरूर देते हैं।