कांगो में इबोला का प्रकोप गंभीर, अब तक 7,022 मामले सामने आए और 3,398 लोगों की मौत हो चुकी है।
सरकार को राहत की उम्मीद, अगस्त के तीसरे सप्ताह में संक्रमण चरम पर पहुंचा, अब नए मामलों में कमी आई।
इबोला सात प्रांतों तक पहुंचा, दक्षिण-उबांगी में नए मामले सामने आने से बीमारी को लेकर चिंता बढ़ी है।
स्कूलों में बढ़ा संक्रमण का डर, बच्चों की सुरक्षा के लिए हाथ धोना और स्वास्थ्य नियम जरूरी किए गए।
संघर्ष और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था बनी चुनौती, दूरदराज इलाकों में बीमारी रोकना और मरीजों तक इलाज पहुंचाना मुश्किल है।
अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) इस समय इबोला वायरस के सबसे गंभीर प्रकोप का सामना कर रहा है। देश में अब तक इबोला के 7,022 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 3,398 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 1,671 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। यह देश में इबोला का अब तक का सबसे बड़ा प्रकोप माना जा रहा है।
कांगो की सरकार ने शनिवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी। हालांकि सरकार का कहना है कि बीमारी का फैलाव अब कम होता दिखाई दे रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अगस्त के तीसरे सप्ताह की शुरुआत में इबोला के मामले सबसे अधिक थे। इसके बाद नए मामलों की संख्या में कमी देखी गई है।
सात प्रांतों तक पहुंचा वायरस
कांगो में इस बार इबोला का प्रकोप मई के मध्य में सामने आया था। शुरुआत देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से के इतुरी प्रांत से हुई। इसके बाद यह बीमारी दूसरे इलाकों में भी फैल गई। अब तक देश के सात प्रांतों में इबोला की पुष्टि हो चुकी है।
हाल ही में दक्षिण-उबांगी प्रांत में भी इबोला का मामला सामने आया। यह इलाका सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक और कांगो-ब्राजाविल की सीमा के पास है। इससे अधिकारियों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों से बीमारी के दूसरे इलाकों तक पहुंचने का खतरा बना रहता है।
सरकार को उम्मीद, हालात सुधर रहे
कांगो सरकार ने कहा कि बीमारी के फैलने की रफ्तार कम हुई है। प्रभावित 61 स्वास्थ्य क्षेत्रों में से 10 में पिछले 21 दिनों से कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है। अगर नए मामले लगातार कम होते हैं और संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वाले लोगों की सही निगरानी होती है, तो बीमारी पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है।
स्कूलों में भी बढ़ी चिंता
इतुरी प्रांत में इबोला को लेकर खास चिंता बनी हुई है। यहां स्कूलों में भी बीमारी के मामले सामने आने के बाद अभिभावक और स्वास्थ्यकर्मी चिंतित हैं। छुट्टियों के बाद जब बच्चे स्कूल लौटे, तब इबोला के मामलों ने चिंता बढ़ा दी। स्कूल आने वाले बच्चे किन परिवारों से आते हैं और उनके परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य स्थिति क्या है, इसकी पूरी जानकारी नहीं होती।
स्कूल प्रशासन ने बीमारी को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। स्कूलों में बच्चों के लिए साबुन से हाथ धोना जरूरी किया गया है। कक्षाओं में बच्चों की संख्या सीमित रखने की कोशिश की जा रही है। बच्चों को एक-दूसरे को छूने से बचने और नियमित रूप से हाथ धोने की जानकारी भी दी जा रही है।
संघर्ष वाले इलाकों में बड़ी चुनौती
कांगो में इबोला को रोकना आसान नहीं है। बीमारी से प्रभावित कई इलाके लंबे समय से हिंसा और संघर्ष का सामना कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में सशस्त्र समूह सक्रिय हैं और सरकार की मौजूदगी भी कई जगह कमजोर है।
इसके अलावा, कई दूर-दराज के इलाकों में अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में मरीजों की पहचान करना, उन्हें इलाज तक पहुंचाना और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी करना स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
इबोला कितना खतरनाक है?
इबोला एक बेहद खतरनाक और संक्रामक बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैल सकती है। गंभीर मामलों में मरीज को शरीर के अंदर और बाहर खून बहने, अंगों के काम करना बंद करने और मौत का सामना करना पड़ सकता है।
पिछले 50 वर्षों में अफ्रीका में इबोला से 15,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कांगो इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। वर्तमान प्रकोप में बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के वायरस की पहचान हुई है। इस स्ट्रेन के खिलाफ अभी कोई स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कई टीकों और उपचारों पर परीक्षण जारी हैं।
खतरा कम हुआ, लेकिन सावधानी जरूरी
कांगो सरकार के अनुसार बीमारी के मामलों में कमी आना राहत की बात है। लेकिन सात प्रांतों में वायरस की मौजूदगी और नए इलाकों में मामलों का सामने आना यह बताता है कि खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नए संक्रमण को रोकना, संक्रमित लोगों की पहचान करना और लोगों को सुरक्षित रखना है। विशेषज्ञों के लिए आने वाले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि नए मामलों में लगातार गिरावट जारी रहती है, तो कांगो इस गंभीर स्वास्थ्य संकट पर धीरे-धीरे नियंत्रण पाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।