भारत में पहली डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा को मंजूरी, 4 से 60 वर्ष के लोगों को मिलेगा बीमारी से बचाव का नया विकल्प। फोटो साभार: इंस्टाग्राम, ताकेदा जीएमबीएच
स्वास्थ्य

भारत में पहली डेंगू वैक्सीन 'क्यूडेंगा' को मिली मंजूरी, बीमारी से लड़ाई में बड़ी उपलब्धि

डेंगू मरीजों के लिए राहत की खबर, भारत में पहली वैक्सीन को मंजूरी, संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम करने की उम्मीद

Dayanidhi

  • भारत में पहली डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा को मंजूरी, 4 से 60 वर्ष के लोगों को मिलेगा बीमारी से बचाव का नया विकल्प।

  • सीडीएससीओ की स्वीकृति के बाद डेंगू के खिलाफ लड़ाई मजबूत, जल्द भारतीय बाजार में उपलब्ध होगी क्यूडेंगा वैक्सीन।

  • ताकेदा की क्यूडेंगा वैक्सीन ने वैश्विक परीक्षणों में दिखाई प्रभावशीलता, लाखों खुराकों के उपयोग से मिला सुरक्षा भरोसा।

  • दो खुराक वाली डेंगू वैक्सीन भारत में देगी नई उम्मीद, संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने का खतरा घटाने में मदद।

  • डेंगू नियंत्रण अभियान को मिलेगी नई ताकत, वैक्सीन के साथ मच्छर नियंत्रण और निगरानी प्रयास भी रहेंगे जारी।

भारत में डेंगू के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा को बाजार में लाने की मंजूरी दे दी है। यह वैक्सीन चार से 60 वर्ष तक की उम्र के लोगों में डेंगू बीमारी से बचाव के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी।

यह मंजूरी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत काम करने वाली सीडीएससीओ ने दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता की विस्तृत जांच के बाद दी है। वैक्सीन को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियमों के अनुसार वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद स्वीकृति मिली है।

जर्मनी की कंपनी ने बनाई वैक्सीन

क्यूडेंगा वैक्सीन को जर्मनी की कंपनी ताकेदा जीएमबीएच ने विकसित किया है। भारत में इसे ताकेदा बायोफार्मास्युटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।

यह एक जीवित लेकिन कमजोर किए गए वायरस से तैयार की गई टेट्रावेलेंट डेंगू वैक्सीन है। इसका मतलब है कि यह डेंगू वायरस के चारों प्रमुख प्रकारों के खिलाफ शरीर में सुरक्षा क्षमता विकसित करने में मदद करती है। इसे आधुनिक रीकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक का इस्तेमाल करके तैयार किया गया है। वैक्सीन को इंजेक्शन के रूप में दिया जाएगा। इसकी दो खुराक होंगी। पहली और दूसरी खुराक के बीच तीन महीने का अंतर रखा जाएगा। प्रत्येक खुराक 0.5 मिलीलीटर की होगी।

कई देशों में हो चुका है इस्तेमाल

क्यूडेंगा वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभाव को जांचने के लिए दुनिया के कई देशों में बड़े स्तर पर अध्ययन किए गए हैं। इन अध्ययनों में ब्राजील, थाईलैंड और श्रीलंका सहित आठ से अधिक देशों के लोगों को शामिल किया गया।

भारत में भी चार से 60 वर्ष की उम्र के लोगों पर इस वैक्सीन का तीसरे चरण का महत्वपूर्ण अध्ययन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि वैक्सीन स्वस्थ बच्चों, किशोरों और वयस्कों में सुरक्षित और प्रभावी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस वैक्सीन को दुनिया के 42 देशों में मंजूरी मिल चुकी है। इनमें यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देश शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से भी इसे प्री-क्वालिफिकेशन मिल चुका है।

अब तक दुनियाभर में इसकी 2.4 करोड़ से अधिक खुराक वितरित की जा चुकी हैं। बाजार में आने के बाद की निगरानी में भी वैक्सीन का सुरक्षा रिकॉर्ड अच्छा पाया गया है।

डेंगू से बचाव में मिलेगी नई ताकत

डेंगू भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करता है। मच्छरों से फैलने वाली इस बीमारी के कारण कई बार मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है और गंभीर मामलों में जान का खतरा भी रहता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि यह वैक्सीन देश में डेंगू नियंत्रण के लिए चल रहे प्रयासों को और मजबूत करेगी। हालांकि, डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों पर नियंत्रण, साफ-सफाई, बीमारी की निगरानी, समय पर जांच और सही इलाज जैसे उपाय भी जरूरी रहेंगे।

लंबे समय तक सुरक्षा देने का दावा

ताकेदा के वैश्विक अध्ययन कार्यक्रम में 28 हजार से अधिक लोगों को शामिल किया गया था। इसमें 19 चरण-प्रथम, चरण-द्वितीय और चरण-तृतीय के क्लीनिकल परीक्षण किए गए।

अध्ययन के अनुसार, दूसरी खुराक के 12 महीने बाद वैक्सीन ने डेंगू संक्रमण से बचाव में लगभग 80 प्रतिशत प्रभावशीलता दिखाई। वहीं 18 महीने बाद डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने से बचाने में इसकी प्रभावशीलता लगभग 90 प्रतिशत पाई गई।

लंबे समय तक किए गए अध्ययन में यह भी सामने आया कि दो खुराक लेने के बाद वैक्सीन डेंगू से संबंधित अस्पताल में भर्ती होने के मामलों को कम करने में प्रभावी रही। चारों प्रकार के डेंगू वायरस के खिलाफ इसकी सुरक्षा क्षमता कई वर्षों तक बनी रहने के संकेत मिले हैं।

भारत में उपलब्धता की तैयारी शुरू

मंजूरी मिलने के बाद ताकेदा कंपनी भारतीय नियामक संस्थाओं, स्वास्थ्य विभागों और चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मिलकर वैक्सीन की उपलब्धता और वितरण की योजना पर काम करेगी।

डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच भारत में पहली डेंगू वैक्सीन की मंजूरी को सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह वैक्सीन बीमारी से बचाव के लिए एक नया विकल्प उपलब्ध कराएगी और डेंगू नियंत्रण अभियान को और प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है।