अध्ययन में फ्लू के मरीजों और स्वस्थ लोगों के साथ रहने पर भी कोई संक्रमण नहीं फैला, जो चौंकाने परिणाम रहा।
वैज्ञानिकों ने पाया कि कम खांसी होने से हवा में वायरस कम फैला और संक्रमण का खतरा घटा काफी ज्यादा।
अच्छा वेंटिलेशन और लगातार हवा का चलना कमरे में मौजूद फ्लू वायरस को कम कर देता है।
मध्यम उम्र के लोग युवा लोगों की तुलना में फ्लू से कम प्रभावित होते हैं, ऐसा अध्ययन संकेत देता है।
सभी लोगों को फ्लू से बचाव के लिए अच्छी हवा, मास्क का उपयोग और बंद जगहों से बचना बहुत जरूरी है।
इस साल फ्लू का मौसम बहुत गंभीर रहा है। दुनिया के कई हिस्सों में लोग तेजी से फैलने वाले नए फ्लू वायरस से बीमार हो रहे हैं। ऐसे समय में वैज्ञानिकों का एक नया और चौंकाने वाला अध्ययन सामने आया है, जो बताता है कि फ्लू कैसे फैलता है और हम इससे खुद को कैसे बचा सकते हैं।
फ्लू पर किया गया एक अनोखा प्रयोग
यह अध्ययन अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के वैज्ञानिकों ने किया। उन्होंने फ्लू के फैलने को समझने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया। इसमें कॉलेज के कुछ छात्र शामिल थे, जो पहले से फ्लू से बीमार थे। उनके साथ कुछ स्वस्थ, मध्यम उम्र के लोगों को एक होटल के कमरे में कई दिनों तक रखा गया। सभी लोग एक साथ रहे, बात की, घूमे, और कुछ गतिविधियां भी कीं। हैरानी की बात यह रही कि इतने नजदीकी संपर्क के बावजूद, एक भी स्वस्थ व्यक्ति को फ्लू नहीं हुआ।
नजदीकी संपर्क के बाद भी कोई बीमार नहीं हुआ
यह परिणाम वैज्ञानिकों के लिए भी आश्चर्यजनक था। आमतौर पर माना जाता है कि अगर आप फ्लू से बीमार व्यक्ति के बहुत पास रहते हैं, तो बीमारी फैलना तय है। लेकिन इस अध्ययन ने दिखाया कि ऐसा हमेशा नहीं होता। इसके पीछे कुछ खास कारण थे।
पहला कारण था कम खांसी। जो छात्र फ्लू से बीमार थे, उनके नाक में वायरस की मात्रा बहुत ज्यादा थी, लेकिन वे अधिक खांस नहीं रहे थे। खांसी के जरिये वायरस हवा में फैलता है। जब खांसी कम हुई, तो हवा में वायरस भी बहुत कम गया। इसका मतलब है कि खांसी फ्लू फैलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है।
हवा का सही से चलना क्यों जरूरी है
दूसरा महत्वपूर्ण कारण था अच्छा वेंटिलेशन, यानी हवा का सही से चलना। जिस होटल के कमरे में यह प्रयोग हुआ, वहां हीटर और डीह्यूमिडिफायर लगे थे। इनकी वजह से कमरे की हवा लगातार घूम रही थी। जब हवा चलती रहती है, तो उसमें मौजूद वायरस पतला हो जाता है और लोगों तक कम मात्रा में पहुंचता है। इससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।
तीसरा कारण उम्र से जुड़ा हो सकता है। इस अध्ययन में जो स्वस्थ लोग थे, वे मध्यम उम्र के थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि मध्यम उम्र के लोग, युवा लोगों की तुलना में, फ्लू से थोड़ा कम प्रभावित होते हैं। इससे भी संक्रमण न फैलने में मदद मिली होगी।
पीएलओएस पैथोजन्स नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन से हमें फ्लू से बचाव के बारे में कई जरूरी बातें सीखने को मिलती हैं। सबसे पहले, सिर्फ किसी के पास बैठने से ही फ्लू फैल जाए, यह जरूरी नहीं है। माहौल और हालात बहुत मायने रखते हैं। अगर आप किसी बंद कमरे में हैं, जहां हवा नहीं चल रही और कोई व्यक्ति खांस रहा है, तो खतरा ज्यादा होता है।
दूसरी बात, हवा का बहाव बहुत जरूरी है। घर, दफ्तर या स्कूल में खिड़कियां खोलना, पंखा चलाना या एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना फ्लू के खतरे को कम कर सकता है। ऐसे एयर प्यूरीफायर ज्यादा फायदेमंद होते हैं, जो हवा को साफ करने के साथ-साथ उसे घुमाते भी हैं।
मास्क पहनना अब भी जरूरी
तीसरी और सबसे अहम बात है मास्क का उपयोग। अगर आप किसी बीमार व्यक्ति के बहुत पास हैं, खासकर जब वह खांस रहा हो, तो मास्क पहनना सबसे अच्छा उपाय है। वैज्ञानिकों के अनुसार, एन95 मास्क फ्लू से बचाव में बहुत असरदार हो सकता है।
इस अध्ययन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह असली मरीजों पर किया गया था, न कि प्रयोगशाला में जानबूझकर संक्रमित किए गए लोगों पर। इससे मिलने वाले नतीजे ज्यादा भरोसेमंद माने जाते हैं। वैज्ञानिक अब आगे भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि फ्लू हवा के जरिए किन हालात में ज्यादा फैलता है।
हर साल दुनिया भर में लगभग एक अरब लोग फ्लू से बीमार होते हैं। अमेरिका में ही इस साल लाखों मामले सामने आ चुके हैं और हजारों लोगों की जान गई है। इसलिए फ्लू को रोकने के बेहतर तरीकों को समझना बहुत जरूरी है।
इस अध्ययन का सरल संदेश यही है: अच्छी हवा, कम खांसी और सही सावधानी से फ्लू को फैलने से रोका जा सकता है। छोटे-छोटे कदम, जैसे हवा का ध्यान रखना और मास्क पहनना, हमें और हमारे परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।