दिल्ली में एच1एन1 के मामलों को लेकर चिंता बढ़ी, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह कोई नया वायरस या नया स्ट्रेन नहीं है।
एच1एन1 एक संक्रामक श्वसन बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और सांस लेने से दूसरे लोगों तक पहुंचती है।
बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान एच1एन1 संक्रमण के प्रमुख सामान्य लक्षण माने जाते हैं।
हाथों की सफाई, खांसते समय मुंह ढकना और बीमार होने पर घर में रहना संक्रमण रोकने में मदद करता है।
सांस लेने में परेशानी या गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, खुद दवा लेना उचित नहीं।
दिल्ली और देश के कुछ हिस्सों में एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर चर्चा बढ़ी है। इसे लेकर लोगों में चिंता भी देखी जा रही है। हालांकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार, देश में फैल रहा एच1एन1 कोई नया स्ट्रेन नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वही वायरस है, जो 2009 में महामारी का कारण बना था और अब मानव आबादी में मौसमी फ्लू के वायरस के रूप में मौजूद है।
2009 में बनी थी महामारी की स्थिति
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, एच1एन1 वायरस पहली बार 2009 में बड़े स्तर पर सामने आया था। उस समय यह एक नया वायरस था और तेजी से दुनिया के कई देशों में फैल गया था। अप्रैल 2009 में उत्तरी अमेरिका में संक्रमण के मामले सामने आने के बाद वायरस तेजी से दूसरे देशों तक पहुंचा। जून 2009 में डब्ल्यूएचओ ने इसे महामारी घोषित किया था।
उस समय वायरस से होने वाली बीमारी का पैटर्न सामान्य मौसमी फ्लू से कुछ अलग दिखाई दिया था। बाद में यह वायरस दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैलता रहा और धीरे-धीरे मानव आबादी में मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस का हिस्सा बन गया।
क्या है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन फ्लू आम बोलचाल में एच1एन1 संक्रमण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला नाम है। मूल रूप से एच1एन1 नाम का संबंध सूअरों में पाए जाने वाले इंफ्लुएंजा वायरस से रहा है। लेकिन 2009 में सामने आया वायरस बाद में इंसानों में लगातार फैलता रहा।
आज एच1एन1 को केवल 'सूअरों की बीमारी' समझना सही नहीं है। मनुष्यों में फैलने वाला ए(एच1एन1)पीडीएम09 अब एक मौसमी मानव इन्फ्लुएंजा वायरस है। इसलिए किसी व्यक्ति को एच1एन1 होने का मतलब यह नहीं है कि उसे सूअर के संपर्क में आने से ही संक्रमण हुआ है।
कैसे फैलता है संक्रमण?
एच1एन1एक संक्रामक श्वसन रोग है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने से निकलने वाले संक्रमित कणों के संपर्क में आने पर दूसरे व्यक्ति को संक्रमण हो सकता है। संक्रमित सतह को छूने और उसके बाद आंख, नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है।
बीमारी के दौरान दूसरों से दूरी रखना, खांसते और छींकते समय मुंह-नाक ढकना और हाथों को साफ रखना संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद करता है।
क्या हैं इसके लक्षण?
एच1एन1 के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही हो सकते हैं। इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान शामिल हैं। कुछ लोगों में उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं। अधिकांश लोगों में बीमारी गंभीर नहीं होती और वे आराम तथा सामान्य देखभाल से ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और निमोनिया या सांस लेने में परेशानी जैसी जटिलताएं पैदा कर सकता है।
बचाव के लिए क्या करें?
एच1एन1 से बचने के लिए साफ-सफाई और सावधानी सबसे जरूरी है। हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोना चाहिए। खांसते या छींकते समय रूमाल या टिश्यू का इस्तेमाल करना चाहिए। बीमार होने पर घर पर रहना और दूसरों के संपर्क को कम करना भी जरूरी है।
भीड़भाड़ वाली जगहों में सावधानी बरतना और पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन तथा पर्याप्त पानी लेना शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। मौसमी इन्फ्लुएंजा का टीका भी उपलब्ध है और डॉक्टर की सलाह से इसे लगवाया जा सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें फ्लू से गंभीर बीमारी का अधिक खतरा रहता है।
इलाज और डॉक्टर की सलाह
एच1एन1 के इलाज के लिए कुछ एंटीवायरल दवाएं उपलब्ध हैं। इनमें ओसेल्टामिविर जैसी दवाएं शामिल हैं। हालांकि, इन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना लेना उचित नहीं है। बीमारी की गंभीरता और मरीज की स्थिति के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि जांच या एंटीवायरल उपचार की जरूरत है या नहीं।
सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, बहुत अधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति, लगातार उल्टी या बीमारी ठीक होने के बाद अचानक फिर से बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
घबराने के बजाय सावधानी जरूरी
एच1एन1 का नाम सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है। दिल्ली में सामने आ रहे मामलों के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि मौजूदा एच1एन1 कोई नया वायरस होने का मतलब नहीं है। 2009 में महामारी पैदा करने वाला ए(एच1एन1)पीडीएम09 वायरस अब मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा है।
साफ-सफाई, संक्रमित व्यक्ति से दूरी, बीमारी के दौरान घर पर रहना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना संक्रमण से बचाव के सबसे व्यावहारिक तरीके हैं।