बारबाडोस ने रचा इतिहास: डब्ल्यूएचओ ने मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण खत्म करने की उपलब्धि पर देश को आधिकारिक मान्यता दी।
तीन साल में शून्य संक्रमण: 2022 से 2024 के बीच बारबाडोस में मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण का कोई नया मामला नहीं।
98 प्रतिशत महिलाओं को सुविधा: गर्भवती महिलाओं की जांच, प्रसव पूर्व देखभाल और एचआईवी संक्रमित महिलाओं के इलाज में 98 प्रतिशत सफलता।
मुफ्त इलाज से मिली कामयाबी: राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना सभी गर्भवती महिलाओं को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं और सम्मानजनक उपचार उपलब्ध कराया गया।
कैरेबियाई क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि: बारबाडोस की सफलता से दुनिया को एचआईवी मुक्त बचपन सुनिश्चित करने की नई उम्मीद मिली है।
दुनिया को एड्स मुक्त बनाने की दिशा में कैरेबियाई देश बारबाडोस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बारबाडोस को मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण के उन्मूलन के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धि के रूप में मान्यता दी है। यह उपलब्धि सिर्फ एक देश की सफलता नहीं, बल्कि उन लाखों महिलाओं और बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो एचआईवी के खतरे के बीच जिंदगी की शुरुआत करते हैं।
बारबाडोस ने साबित कर दिया है कि अगर गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, सही इलाज और बिना किसी भेदभाव के स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, तो आने वाली पीढ़ी को एचआईवी से सुरक्षित रखा जा सकता है।
तीन साल में संक्रमण का एक भी नया मामला नहीं
डब्ल्यूएचओ के आकलन के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2024 के बीच बारबाडोस में मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण का एक भी नया मामला सामने नहीं आया। इस उपलब्धि के पीछे गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, समय पर इलाज और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम भूमिका रही है।
आंकड़े बताते हैं कि इस तीन साल की अवधि में 98 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिलीं। इतनी ही महिलाओं की एचआईवी जांच की गई। वहीं, एचआईवी से संक्रमित गर्भवती महिलाओं में से 98 प्रतिशत को एंटीरेट्रोवायरल (एआरवी) दवाओं से उपचार दिया गया।
ये आंकड़े बताते हैं कि बीमारी को रोकने के लिए सिर्फ दवाएं ही नहीं, बल्कि समय पर पहचान और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच भी बेहद जरूरी है।
हर महिला को मुफ्त इलाज, नहीं देखा राष्ट्रीयता का फर्क
बारबाडोस की इस सफलता की सबसे खास बात यह है कि वहां गर्भवती महिलाओं को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। महिला किस देश की नागरिक है, उसकी आर्थिक स्थिति क्या है या वह किस सामाजिक पृष्ठभूमि से आती है, इन बातों को इलाज के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया गया।
प्रेस विज्ञप्ति में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसस ने बारबाडोस को बधाई देते हुए कहा कि देश ने बच्चों की एक पूरी पीढ़ी को एचआईवी से बचाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हर गर्भवती महिला को मुफ्त सेवाएं देना, उसकी निजता और अधिकारों का सम्मान करना ही सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की असली तस्वीर है।
मां को इलाज, बच्चे को सुरक्षित जिंदगी
गर्भावस्था के दौरान एचआईवी संक्रमण की पहचान और सही उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। यदि एचआईवी से संक्रमित महिला को समय पर एंटीरेट्रोवायरल दवाएं दी जाएं और गर्भावस्था तथा प्रसव के दौरान उचित चिकित्सकीय देखभाल मिले, तो बच्चे में संक्रमण का खतरा काफी कम किया जा सकता है।
बारबाडोस की स्वास्थ्य मंत्री लिसा कमिंस ने इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि इस सफलता से बच्चों को स्वस्थ और बेहतर जीवन जीने का अवसर मिलेगा। साथ ही एचआईवी से संक्रमित माताओं को गर्भावस्था के दौरान जरूरी उपचार और देखभाल मिल सकेगी।
कैरेबियाई क्षेत्र ने दुनिया को दिखाई राह
बारबाडोस अब उन 26 देशों और क्षेत्रों के समूह में शामिल हो गया है, जिन्हें एचआईवी, सिफलिस या हेपेटाइटिस-बी के मां से बच्चे में संक्रमण को खत्म करने या इसके लक्ष्य की दिशा में प्रगति के लिए डब्ल्यूएचओ ने मान्यता दी है। इनमें से 15 देश और क्षेत्र अमेरिका महाद्वीप में हैं। इस तरह यह क्षेत्र दुनिया में सबसे आगे है।
डब्ल्यूएचओ की मान्यता किसी औपचारिक घोषणा के आधार पर नहीं, बल्कि स्वतंत्र मूल्यांकन के बाद दी गई है। इसमें संक्रमण के आंकड़ों, जांच, इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता जैसे पहलुओं को परखा गया।
वर्षों की मेहनत लाई रंग
इस सफलता के पीछे बारबाडोस सरकार, पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (पीएएचओ), डब्ल्यूएचओ और अन्य सहयोगी संस्थाओं का लंबे समय से चला आ रहा साझा प्रयास है। इन संस्थाओं ने एचआईवी जांच, इलाज, निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए मिलकर काम किया।
प्रेस विज्ञप्ति में पीएएचओ के निदेशक डॉ. जार्बस बारबोसा ने कहा कि बारबाडोस ने दिखाया है कि जब महिलाओं और बच्चों को बिना किसी बाधा के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं, तो मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण को रोका जा सकता है।
बारबाडोस की यह उपलब्धि दुनिया को एक सीधा संदेश देती है - एचआईवी के खिलाफ लड़ाई केवल दवाओं से नहीं, बल्कि समान अधिकार, समय पर जांच और सबको इलाज उपलब्ध कराने से जीती जा सकती है। आखिरकार, हर बच्चे को स्वस्थ जन्म और हर मां को सुरक्षित मातृत्व का अधिकार है।