प्रोटीन-समृद्ध आहार, खासकर केसीन और गेहूं का ग्लूटेन, कॉलरा बैक्टीरिया की आंत में उपस्थिति और वृद्धि को काफी कम करता है।
सभी प्रोटीन समान नहीं हैं, केसीन और गेहूं का ग्लूटेन बैक्टीरिया की टी6एसएस संरचना को कमजोर कर संक्रमण रोकते हैं।
फैट-समृद्ध आहार लगभग कोई असर नहीं डालते, जबकि कार्बोहाइड्रेट-आधारित आहार मामूली लाभ प्रदान करता है।
सस्ते और सुरक्षित आहार आधारित रणनीतियां, विशेषकर कम स्वच्छता वाले क्षेत्रों में कॉलरा संक्रमण की गंभीरता को कम कर सकती हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि उच्च-प्रोटीन आहार मानवों और अन्य संक्रमणों में भी समान लाभकारी प्रभाव दिखा सकता है।
हमारी खाने की आदतें सिर्फ वजन या ऊर्जा स्तर को ही प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि ये हमारे शरीर को खतरनाक बैक्टीरियल संक्रमणों से भी बचा सकती हैं। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, रिवरसाइड के हालिया अध्ययन में यह पता चला है कि सही प्रकार का भोजन हैजा या कॉलरा जैसी गंभीर बीमारी को कमजोर कर सकता है।
हैजा एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो दस्त और पानी की कमी जैसी समस्याएं पैदा करता है। यदि समय पर इलाज न हो तो यह जानलेवा भी हो सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रोटीन से भरपूर आहार खासतौर पर इस संक्रमण को रोकने में प्रभावी है।
कौन से प्रोटीन हैं कारगर?
अध्ययन में यह देखा गया कि केसिन (जो दूध और पनीर में पाया जाता है) और गेहूं का ग्लूटेन हैजे के बैक्टीरिया को आंत में बसने से रोकने में सबसे ज्यादा मददगार हैं।
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहना है कि आहार बैक्टीरिया से संक्रमित व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। लेकिन प्रभाव की मात्रा ने चौंका दिया। हमने देखा कि केवल आहार के आधार पर हैजा के बैक्टीरिया की संख्या में 100 गुना तक का अंतर हो सकता है।
अध्ययन का तरीका
शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि क्या हानिकारक बैक्टीरिया भी आंत में रहने वाले सामान्य माइक्रोब्स की तरह आहार से प्रभावित होते हैं। उन्होंने संक्रमित चूहों को तीन प्रकार के आहार दिए-
प्रोटीन-समृद्ध आहार
साधारण कार्बोहाइड्रेट वाला आहार
वसा (फैट) वाला आहार
परिणाम से पता चला कि फैट युक्त आहार का संक्रमण पर बहुत कम प्रभाव पड़ा, कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार थोड़ी मदद कर पाया, जबकि प्रोटीन-समृद्ध आहार ने बैक्टीरिया को लगभग रोक दिया।
शोध में कहा गया कि सभी प्रोटीन एक समान प्रभाव नहीं डालते। केसीन और गेहूं का ग्लूटेन सबसे कारगर साबित हुए।
कैसे काम करता है यह प्रभाव?
शोधकर्ताओं ने पाया कि ये प्रोटीन हैजे के बैक्टीरिया की एक छोटी, सुई जैसी संरचना (टाइप 6 स्राव प्रणाली या टी6एसएस) को प्रभावित करते हैं। यह संरचना आसपास की कोशिकाओं में विष पहुंचाने और अन्य बैक्टीरिया को मारने का काम करती है।
जब यह संरचना कमजोर पड़ती है, तो हैजा अपने प्रतिद्वंद्वी बैक्टीरिया को मारने में सक्षम नहीं होता और आंत में आसानी से नहीं बस पाता। इसका मतलब यह है कि प्रोटीन सीधे बैक्टीरिया को नहीं मारते, बल्कि उसे अपना प्रभाव दिखाने से रोकते हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
चालरा अभी भी एशिया और सब-सहारा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में गंभीर खतरा है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां साफ पानी की उपलब्धता सीमित है।
वर्तमान उपचार में मुख्य रूप से पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी को पूरा किया जाता है। एंटीबायोटिक बीमारी की अवधि को कम कर सकते हैं, लेकिन वे बैक्टीरिया द्वारा छोड़े गए विष को नहीं खत्म करते और लंबे समय में एंटीबायोटिक प्रतिरोध का खतरा भी बढ़ा सकते हैं।
शोधकर्ता कहते हैं, "डाइटरी रणनीतियां एंटीबायोटिक प्रतिरोध नहीं पैदा करतीं। इसलिए ये कम जोखिम और कम लागत वाला तरीका हो सकता है।”
भविष्य की संभावनाएं
हालांकि यह अध्ययन चूहों पर किया गया, शोधकर्ता का मानना है कि उच्च-प्रोटीन आहार लोगों में भी इसी तरह प्रभाव डाल सकते हैं। आगे चलकर शोधकर्ता यह भी देखना चाहते हैं कि अन्य संक्रमणों में भी आहार से कैसे फायदा हो सकता है।
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि कुछ आहार दूसरों से अधिक सफल होंगे। यदि हम लोगों की डाइट बेहतर बनाते हैं, तो हम उन्हें गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।
सेल होस्ट एंड माइक्रोब में प्रकाशित इस अध्ययन से पता चलता है कि केसिन और गेहूं के ग्लूटेन से भरपूर आहार हैजे के बैक्टीरिया को कमजोर कर सकता है और शरीर को संक्रमण से बचा सकता है। यह एक सरल, सुरक्षित और किफायती तरीका है, जो विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहां साफ पानी और उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सही प्रकार का प्रोटीन युक्त आहार अपनाना न केवल पाचन और पोषण के लिए, बल्कि संक्रमण से सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।