विसरल लीशमैनियासिस, जिसे कालाजार भी कहा जाता है, भारत में अब उन्मूलन के अंतिम चरण में है।  फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

58 देशों ने उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों पर विजय पाई, भारत में लिम्फैटिक फाइलेरियासिस का खतरा बरकरार

विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (एनटीडी) दिवस: 2024 में लगभग 1.4 अरब लोगों को एनटीडी के लिए उपचार की जरूरत थी, यह संख्या 2010 की तुलना में 36 फीसदी कम है

Dayanidhi

  • विश्व एनटीडी दिवस 30 जनवरी को मनाया जाता है, जिसे 2021 में विश्व स्वास्थ्य सभा ने आधिकारिक मान्यता दी थी।

  • दुनिया भर में 1.4 अरब लोगों को 2024 में एनटीडी उपचार की जरूरत थी, जो 2010 से 36 फीसदी कम है।

  • 2026 तक 58 देशों ने कम से कम एक एनटीडी रोग को पूरी तरह समाप्त करने में सफलता हासिल की।

  • भारत में लिम्फैटिक फाइलेरियासिस से 40.4 करोड़ लोग खतरे में हैं, जिससे विकलांगता दर्द और सामाजिक कलंक जुड़ा रहता है।

  • 2018 से 2023 के बीच एनटीडी के लिए सहायता में 41 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई, जो चिंताजनक स्थिति दर्शाती है।

हर साल 30 जनवरी को पूरी दुनिया में विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (एनटीडी) दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है, जो आज भी दुनिया के करोड़ों गरीब और वंचित लोगों को प्रभावित करती हैं। ये बीमारियां लंबे समय तक वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडे में उपेक्षित रहीं, जबकि ये रोकथाम योग्य, उपचार योग्य और पूरी तरह समाप्त की जा सकती हैं।

31 मई 2021 को विश्व स्वास्थ्य सभा ने निर्णय डब्ल्यूएचए74(18) के माध्यम से 30 जनवरी को आधिकारिक रूप से विश्व एनटीडी दिवस के रूप में मान्यता दी। इसका उद्देश्य इन बीमारियों के कारण होने वाले स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक नुकसान पर वैश्विक ध्यान केंद्रित करना है।

उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग क्या हैं?

उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (एनटीडी) कई प्रकार की बीमारियों का समूह हैं, जो मुख्य रूप से गरीबी, स्वच्छता में कमी, सीमित स्वास्थ्य सेवाओं और असमानता से जुड़ी हैं। ये रोग अधिकतर अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों में पाए जाते हैं।

वर्तमान में ये रोग लगभग एक अरब लोगों को प्रभावित करते हैं, विशेष रूप से कमजोर और दूरदराज के समुदायों में रहने वालों को।

वैश्विक स्तर पर प्रगति

हाल के वर्षों में एनटीडी के खिलाफ वैश्विक प्रयासों से बहुत ज्यादा प्रगति हुई है।

  • 2024 में लगभग 1.4 अरब लोगों को एनटीडी के लिए उपचार की जरूरत थी।

  • यह संख्या 2010 की तुलना में 36 फीसदी कम है, जो दर्शाता है कि रोकथाम और उपचार कार्यक्रम प्रभावी रहे हैं।

  • 2026 की शुरुआत तक 58 देशों ने कम से कम एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का लक्ष्य है कि 2030 तक 100 देश कम से कम एक एनटीडी को समाप्त करें। हालांकि, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

2018 से 2023 के बीच एनटीडी के लिए वैश्विक सहायता में 41 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यह कमी भविष्य की प्रगति के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है और निरंतर निवेश की आवश्यकता को दर्शाती है।

भारत में एनटीडी की स्थिति

भारत में उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के खिलाफ संघर्ष में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय विशेष रूप से दो प्रमुख बीमारियों पर गौर कर रहा है:

1. लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (हाथीपांव)

लिम्फैटिक फाइलेरियासिस भारत में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या रही है। यह रोग लगभग 40.4 करोड़ लोगों को प्रभावित करने के जोखिम में डालता है। यह रोग शरीर की लसीका प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है, जिससे हाथ, पैर या जननांगों में असामान्य सूजन हो जाती है।

इससे रोगी को दर्द, स्थायी विकलांगता और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। सरकार द्वारा सामूहिक औषधि वितरण और निगरानी कार्यक्रमों के माध्यम से इस रोग के उन्मूलन की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

2. विसरल लीशमैनियासिस (कालाजार)

विसरल लीशमैनियासिस, जिसे कालाजार भी कहा जाता है, भारत में अब उन्मूलन के अंतिम चरण में है। यह रोग गंभीर कमजोरी, कुपोषण और काम करने की क्षमता में कमी का कारण बनता है। समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा भी हो सकता है। सुदृढ़ निगरानी, शीघ्र उपचार और समुदाय आधारित प्रयासों के कारण भारत ने कालाजार उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है।

आगे की राह

उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं हैं, बल्कि ये गरीबी, सामाजिक बहिष्कार और असमानता को भी बढ़ावा देते हैं। विश्व एनटीडी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सामूहिक प्रयास, राजनीतिक इच्छाशक्ति और निरंतर वित्तीय सहयोग से इन रोगों को समाप्त किया जा सकता है।

भारत और दुनिया की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि सही रणनीति और निरंतर प्रयासों से एनटीडी का उन्मूलन संभव है। इस दिवस पर यह संकल्प लेना आवश्यक है कि कोई भी व्यक्ति, कोई भी समुदाय पीछे न छूटे, और सभी को स्वस्थ जीवन जीने का अवसर मिले।